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वाराणसी: राष्ट्रपत गंगा आरतीमंत्रों को अंतस में उतारा, भावपूर्ण आंखों से मां गंगा को निहारा
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राष्ट्रपति के आगमन के साथ गंगा तट का नजारा देव दीपावली सरीखा दिखा। ऐसा लगा कि राष्ट्रपति मां गंगा की आरती के मंत्रों को अंतस में उतार रही थीं और हर क्षण को साक्षी भाव से निहार रही थीं। करीब घंटे भर तक सदानीरा के तट पर भक्तिभाव के साथ आरती के हर पल को हृदयंगम कर रही थीं। राष्ट्रपति ने मां गंगा की आरती उतारकर विश्व कल्याण की कामना की और गंगा की स्वच्छता के साथ जल संरक्षण का संकल्प भी लिया।
सोमवार की शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दशाश्वमेध घाट पहुंचीं। गंगा सेवा निधि के आरती स्थल पर ब्राह्मणों ने सबसे पहले संकल्प दिलाया, फिर राष्ट्रपति और उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू ने अक्षत, धूप, दीप गंगा को समर्पित किया। शिव स्तोत्र से भगवान शिव की स्तुति के बाद मां गंगा व महालक्ष्मी की स्तुति हुई। षोडशोपचार विधि से मां गंगा का पूजन और अभिषेक हुआ। रामजनम योगी ने अविरल शंख वादन करके आरती शुरू होने के संकेत दिए। नौ अर्चक और 21 कन्याओं ने मां गंगा की आरती आरंभ की तो गंगा के तट पर देव दीपावली का नजारा जीवंत हो उठा। कुछ पल तो ऐसा लगा मानों कि साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। राष्ट्रपति गंगा आरती की हर क्रिया को भावपूर्ण ढंग से निहार रही थीं। अर्चकों ने जब तालियां बजानी शुरू कीं तो मंच पर बैठीं राष्ट्रपति, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ताली बजाकर मां गंगा की आरती में साथ दिया। जय गंगे माता, जो नर तुमको ध्याता पार उतर जाता...की धुन से घाट का कोना-कोना झंकृत हो उठा। धूप, गुग्गल, कपूर की सुगंध हवाओं में तैरती रहीं और दीपों, रंगीन झालरों की रोशनी से दशाश्वमेध घाट जगमगा उठा। देवी सुरेश्वरि भगवति गंगे...की शुरूआत हुई तो राष्ट्रपति भी पूरी तरह से मां गंगे के भक्ति भाव में तल्लीन नजर आईं। अगल-बगल के घाटों पर खड़ी काशी की जनता भी देश की प्रथम महिला के भावों की साक्षी बनीं। आचार्य श्रीधर पांडेय व अर्चक रणधीर पांडेय ने मां गंगा का वैदिक रीति से पूजन कराया। घाट पर गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी, ट्रस्ट सचिव हनुमान यादव ने फूल देकर स्वागत किया। इस दौरान गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, सुरजीत सिंह, पंकज अग्रवाल, सिद्धार्थ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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सोमवार की शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दशाश्वमेध घाट पहुंचीं। गंगा सेवा निधि के आरती स्थल पर ब्राह्मणों ने सबसे पहले संकल्प दिलाया, फिर राष्ट्रपति और उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू ने अक्षत, धूप, दीप गंगा को समर्पित किया। शिव स्तोत्र से भगवान शिव की स्तुति के बाद मां गंगा व महालक्ष्मी की स्तुति हुई। षोडशोपचार विधि से मां गंगा का पूजन और अभिषेक हुआ। रामजनम योगी ने अविरल शंख वादन करके आरती शुरू होने के संकेत दिए। नौ अर्चक और 21 कन्याओं ने मां गंगा की आरती आरंभ की तो गंगा के तट पर देव दीपावली का नजारा जीवंत हो उठा। कुछ पल तो ऐसा लगा मानों कि साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। राष्ट्रपति गंगा आरती की हर क्रिया को भावपूर्ण ढंग से निहार रही थीं। अर्चकों ने जब तालियां बजानी शुरू कीं तो मंच पर बैठीं राष्ट्रपति, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ताली बजाकर मां गंगा की आरती में साथ दिया। जय गंगे माता, जो नर तुमको ध्याता पार उतर जाता...की धुन से घाट का कोना-कोना झंकृत हो उठा। धूप, गुग्गल, कपूर की सुगंध हवाओं में तैरती रहीं और दीपों, रंगीन झालरों की रोशनी से दशाश्वमेध घाट जगमगा उठा। देवी सुरेश्वरि भगवति गंगे...की शुरूआत हुई तो राष्ट्रपति भी पूरी तरह से मां गंगे के भक्ति भाव में तल्लीन नजर आईं। अगल-बगल के घाटों पर खड़ी काशी की जनता भी देश की प्रथम महिला के भावों की साक्षी बनीं। आचार्य श्रीधर पांडेय व अर्चक रणधीर पांडेय ने मां गंगा का वैदिक रीति से पूजन कराया। घाट पर गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी, ट्रस्ट सचिव हनुमान यादव ने फूल देकर स्वागत किया। इस दौरान गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, सुरजीत सिंह, पंकज अग्रवाल, सिद्धार्थ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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