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वर्तमान भारत की तस्वीर रामानंदाचार्य की देन : वेदांती महाराज
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वाराणसी। कथावाचक स्वामी डॉ. राम कमल दास वेदांती महाराज ने कहा कि श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज ने मुगलों के आक्रमण के कारण ध्वस्त हुए हिंदू समाज को फिर से जोड़ने के लिए हिंदुओं में प्रचलित सभी जातियों को शिष्य के रूप में स्वीकार किया। छुआछूत का भेदभाव मिटाते हुए उन्होंने समस्त सनातन धर्मावलंबियों को एकजुट किया।
वह सोमवार को श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज का जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डॉ. वेदांती महाराज ने कहा कि अपने शिष्यों के प्रभाव से उन्होंने मुगलों द्वारा चलाए गए जजियाकर टैक्स को समाप्त करवाया। रामानंदाचार्य जी के प्रमुख शिष्यों में अनंतानंदाचार्य, संत कबीर दास, संत रविदास, धन्ना जाट, सेन नाई आदि बड़े प्रसिद्ध संत हुए। इससे स्वामी रामानंदाचार्य जी के व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। आज जो भी भारत की तस्वीर है वह रामानंदाचार्य जी की देन है।
पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामानंदाचार्य जी के सिद्धांतों को श्रीरामचरितमानस में निरूपित किया है। इस अवसर पर जयंती शोभायात्रा को अनुमति नहीं मिलने के कारण संत समाज ने गंगा की लहरों पर शोभायात्रा निकाली। दशाश्वमेध घाट से राजघाट तक संत समाज ने गंगा की लहरों पर शोभायात्रा निकाली। खिड़किया घाट पर शोभायात्रा सभा में तब्दील हो गई और इसके बाद आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद भी ग्रहण किया। इस दौरान महंत रामशरण दास, उमेश दास, अवध किशोर दास, धनुषधारी महाराज, सिया राम दास उपस्थित रहे।
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वह सोमवार को श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज का जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डॉ. वेदांती महाराज ने कहा कि अपने शिष्यों के प्रभाव से उन्होंने मुगलों द्वारा चलाए गए जजियाकर टैक्स को समाप्त करवाया। रामानंदाचार्य जी के प्रमुख शिष्यों में अनंतानंदाचार्य, संत कबीर दास, संत रविदास, धन्ना जाट, सेन नाई आदि बड़े प्रसिद्ध संत हुए। इससे स्वामी रामानंदाचार्य जी के व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। आज जो भी भारत की तस्वीर है वह रामानंदाचार्य जी की देन है।
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पातालपुरी मठ के महंत बालक दास ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामानंदाचार्य जी के सिद्धांतों को श्रीरामचरितमानस में निरूपित किया है। इस अवसर पर जयंती शोभायात्रा को अनुमति नहीं मिलने के कारण संत समाज ने गंगा की लहरों पर शोभायात्रा निकाली। दशाश्वमेध घाट से राजघाट तक संत समाज ने गंगा की लहरों पर शोभायात्रा निकाली। खिड़किया घाट पर शोभायात्रा सभा में तब्दील हो गई और इसके बाद आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद भी ग्रहण किया। इस दौरान महंत रामशरण दास, उमेश दास, अवध किशोर दास, धनुषधारी महाराज, सिया राम दास उपस्थित रहे।
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