फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Premchand village is silent on his jayanti

प्रेमचंद जयंती : बयां करते रहे गरीबों का दर्द, खामोश इमारत बता रही नहीं है कोई हमदर्द

Tue, 31 Jul 2018 02:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 31 Jul 2018 02:34 PM IST
विज्ञापन
Premchand village is silent on his jayanti
टूटता नहीं है मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान का सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
किस्से कहानियां, उपन्यास की दुनिया में अमर किरदार हैं मुंशी प्रेमचंद...। सदी बीत गई, आज भी उनकी कहानियां, उपन्यास की तासीर जस की तस है। करीब चार पीढ़ियां इस कलम के जादू से मंत्रमुग्ध हैं। काशी के वैभव में यह भी एक बेशकीमती अलंकरण है कि इस अप्रतिम कथाकार की जन्मभूमि यहीं है, लमही गांव। आज इस अमर साहित्य नायक की जयंती है। जयंती उनकी इसी जन्मभूमि पर लमही महोत्सव का आयोजन हो रहा है। पूरा गांव इस महोत्सव की तैयारी कर रहा है। यह सही है कि वक्त के साथ लोगों को भूला देना आम बात है लेकिन प्रेमचंद के किस्से कहानियां का आकर्षण नहीं टूटने नहीं वाला...। 
विज्ञापन


वो कलम जब चली, गरीबों, शोषितों के दर्द को, उनके मन के मर्म को उपन्यास की पंक्तियों में पिरो दिया। उपन्यास को बेहद खास तबके की हिंदी से निकालकर आम लोगों की बोलचाल वाली भाषा बनाने वाले, दमनकारी शक्तियों की यातनाओं पर आघात और सामाजिक व्यवस्था पर कुठाराघात जिनकी स्याही की ताकत थी, ऐसे थे कथाकार मुंशी प्रेमचंद।
विज्ञापन


उनकी कहानियों में किसान का दर्द झलकता था, जिसे गांव का साहूकार छलता था। आज फिर वो छलावा हो रहा है मुंशी प्रेमचंद के साथ, उनकी कहानियों, उपन्यासों के साथ। महज नाम के लिए ईंट पत्थर का भवन बना दिया, मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान। दो साल बीत गए और यह इमारत खामोश खड़ी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही की सूरत बदलने की प्रशासन ने कवायद की थी। आज गांव जाने को चौड़ी सड़क और पक्का रास्ता है, जिस घर में कभी उन्होंने कालजयी रचनाएं गढ़ीं, उसे सहेज दिया गया है। हां, वो इतर है कि वो वीरान पड़ा है। यहां पार्क बना, स्मारक बना और साथ ही मुंशी प्रेमचंद शोध संस्थान की स्थापना हुई।

दो साल पहले इसका उद्घाटन हुआ। इस उद्देश्य से कि यहां शोधार्थी आएं, उपन्यास सम्राट को जानें। उनकी कहानियों और साहित्य पर शोध करें। उम्मीद थी कि ये शोध संस्थान उनके बारे में कुछ नए तथ्य सामने लाएगा लेकिन दो साल का परिणाम निराशाजनक है। उद्घाटन के बाद यह संस्थान एक कदम आगे नहीं बढ़ सका है।

हां, सुरक्षा में जरूर दो सुरक्षागार्ड, माली तैनात कर दिया गया है। सुबह इसका ताला खुलता है, शाम को बंद कर दिया जाता है। ये प्रशासन की बड़ी विफलता है कि उपन्यास जगत में ध्रुव तारे के मानिंद चमकने वाले मुंशी प्रेमचंद का शोध संस्थान, जहां शोधार्थियों से गुलजार होना चाहिए था, उपन्यास के किसी किसान की तरह विवश है, वीराने से बतियाने को। 

नहीं बन सका म्यूजियम, उठा ले गए प्रोजेक्टर भी

Premchand village is silent on his jayanti
varanasi - फोटो : अमर उजाला
मुंशी प्रेमचंद के पैतृक आवास को म्यूजियम बनाने की कवायद भी कई वर्षों से की जा रही है लेकिन इसे भी मूर्त रूप अब तक नहीं दिया जा सका है। म्यूजियम बनाने के लिए हुआ भर ये कि उनके आवास की मरम्मत कराकर उसकी रंगाई पुताई भर करा दी गई है। यही नहीं पिछले साल उनके आवास पर वीडीए की पहल पर उनके आवास के एक कमरे में प्रोजेक्टर लगाया गया।

प्रेमचंद स्मारक न्यास लमही के अध्यक्ष सुरेंद्र चंद्र दूबे बताते हैं कि ये प्रोजेक्टर इसलिए लगाया ताकि यहां आने वाले स्कूली बच्चों, शोधार्थियों को प्रेमचंद की कहानियां दिखाई जा सकें। उनके गांव से रूबरू कराया जा सके। इस प्रोजेक्ट का जिम्मा वीडीए ने एक इवेंट कंपनी को दिया लेकिन वीडीए की ओर से पैसों का भुगतान न होने की वजह से कंपनी अपना सामान वगैरह लेकर चली गई। 

 

सामंतवाद से जूझती रही मुंशी प्रेमचंद की लेखनी

Premchand village is silent on his jayanti
प्रेमचंद की किताबें
 कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित लमही महोत्सव के तहत उनकी पूर्व संध्या पर संस्कृति विभाग और काशी विद्यापीठ हिंदी विभाग की ओर से राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। काशी विद्यापीठ के केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बीएचयू के प्रो. कुमार पंकज रहे।

लमही महोत्सव का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी आदर्श का सपना देखा, साम्राज्यवाद और सामंतवाद जूझती रही और अपनी यथार्थ दृष्टि से जिस कथालोक का सृजन किया वह अप्रतिम है। प्रेमचंद ने कफन, गोदान और निर्मला जैसी रचनाओं से अंध आस्था के खतरों से वाकिफ कराया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का लेखनीय कद इतना बड़ा है कि दुनिया उन्हें सलाम करती है। वे किसानों, मजदूरों और मेहनतकशों के सच को उजागर करने वाले रचनाकार हैं। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed