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मां के बाद छूटा पिता का सहारा, भीख मांगने निकल पड़े बेसहारा, किसी को नहीं आई तरस

Sun, 14 Feb 2021 07:53 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sun, 14 Feb 2021 07:53 PM IST
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Poverty: The dead bodies were not shed for the funerals in the Ganga
अनाथ बच्चे - फोटो : अमर उजाला

बीमार मां पांच साल पहले ही परलोक सिधार गई थी। बीते हफ्ते सड़क हादसे में पिता की जान चली गई। इस मुश्किल हालात में झोपड़ी में रहने वाले दो नन्हें वनवासी भाइयों की मन:स्थिति का जायजा सहज ही लगाया जा सकता है। इन सबके बावजूद पेट की आग बगैर पेट में अन्न गए नहीं बुझ पाती है। नतीजतन, पिता का शव शनिवार को गंगा में प्रवाहित करने वाले दोनों नन्हें भाई रविवार को अपनी झोपड़ी से भीख मांगने निकल गए।

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मिर्जामुराद थाना अंतर्गत चित्रसेनपुर गांव निवासी सुक्खू वनवासी की बीती नौ फरवरी की रात सड़क पार करते समय किसी वाहन की टक्कर से मौत हो गई थी। सुक्खू के 10 और आठ साल के दो बेटे पिता की घर वापसी का इंतजार करते रहे। किसी तरह से शनिवार को सुक्खू के शव का पोस्टमार्टम हुआ।
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अंत्येष्टि करने के लिए पैसे न होने के कारण दोनों बच्चों ने पिता का शव सामने घाट ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। इस बीच दोनो भाइयों की देखरेख के लिए उनकी बड़ी बहन रेखा अपने पति के साथ उनके पास आ गई है। आगामी दिनों में यह देखने लायक बात होगी कि शासन और प्रशासन की नजर दोनों मासूमों पर पड़ती है या सब कुछ जैसे का तैसा चलता रहेगा।
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मौत के बाद भी समाज ने नहीं दिया साथ 
गरीबी का दंश झेलने वाले सुक्खू की मौत के बाद उसकी अंतिम क्रिया भी सही ढंग से नहीं हो पाई। इसका कारण भी उसी समाज के लोग बने। इलाके के लोगों ने रविवार को बताया कि सुक्खू की मौत के बारे में जानकारी मिलने के बाद वाहन से उसके बच्चों को बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस तक भेजने और शव की अंत्येष्टि के लिए सामूहिक सहयोग से 7000 रुपये से ज्यादा चंदा इकट्ठा हुआ था। इसके बाद सुक्खू के बच्चों के हाथ में 1200 रुपये वाहन का किराया और 200 रुपये कफन के लिए दिया गया। शेष पैसा कहां गया, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।
 

कराएंगे मदद जैसे वादों के शुरू हुए दौर
ग्राम प्रधान रूप नारायण पटेल ने कहा कि सुक्खू अपनी ससुराल में रहता था। उसकी पत्नी की मौत पहले ही हो गई थी। सुक्खू का कोई कागज गांव का न होने के कारण वह सरकारी योजनाओं से वंचित रहा। दोनों बच्चे छोटे हैं, उनका आधार कार्ड भी नहीं है। दोनों बच्चों के कागज बनवाकर उनको सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।

सेवापुरी विधायक नीलरतन सिंह पटेल उर्फ  नीलू ने कहा कि सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद पोस्टमार्टम में हुई देरी पुलिस की लापरवाही का नतीजा है। जल्द ही सुक्खू वनवासी के दोनों बच्चों से मुलाकात कर उनको समस्त प्रकार की सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। पूरा प्रयास होगा कि दोनों बच्चों को किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए।

राशन और नकदी देकर की अफसरों से बात
सेवापुरी मंडल के भाजपा अध्यक्ष यतीश त्रिपाठी और महामंत्री अरुण तिवारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल सुक्खू बनवासी के घर पहुंचा। भाजपा नेताओं ने एसडीएम राजातालाब और खंड विकास अधिकारी सेवापुरी को फोन कर वनवासी बस्ती के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलाने एवं सुक्खू के बच्चों का राशन कार्ड बनाने की मांग की। इसके साथ ही सरकारी गल्ले की दुकान से दोनों बच्चों को 35 किलो राशन दिलाने के अलावा नकदी देकर भी मदद की।
 

बाबू चुनाव आते हैं तभी इधर लोग दिखते हैं
सुक्खू की बस्ती में रहने वाले अन्य वनवासी परिवार के लोगों ने बताया कि चुनाव के अलावा हमारी ओर अफसर और नेता कोई नहीं आते हैं। बस्ती में किसी के पास भी सरकारी आवास नहीं है, शौचालय नहीं है और न किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ मिला हुआ है। सभी झोपड़ी डालकर प्लास्टिक की छाया में रहते हैं। कहने को पांच बिस्वा जमीन आवंटित है, लेकिन वह भी झगड़े में ही फंसी है। हम सबके नेता और अफसर ऊपर वाले ही हैं, वह जैसे रखते हैं, हम वैसे ही रहते हैं।

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