राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार से सम्मानित इंस्पेक्टर समरजीत के निधन पर पूर्वांचल के पुलिसकर्मी गमगीन
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1997-1998 बैच के दरोगा समरजीत के निधन से बनारस सहित पूर्वांचल और प्रदेश के अन्य जिलों के पुलिसकर्मी गमगीन हैं। भदोही जिले के क्राइम ब्रांच प्रभारी अजय सिंह ने 'अमर उजाला' से कहा कि यारबाज समरजीत सिंह का असमय जाना खल गया।
राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार से सम्मानित मेरा भाई पुलिस की ड्यूटी के साथ ही अपने निजी संबंधों को बेहतर तरीके से निभाने और जिंदादिली के साथ जीने के लिए जाना जाता था। पुलिस की नौकरी के शुरुआती दौर में वह बनारस में चौकी प्रभारी और थानाध्यक्ष के तौर पर तैनात रहे। ऊपर वाले ने ऐसे नेक आदमी और उनके परिवार के साथ बहुत गलत किया है।
वाराणसी में तैनात इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय, लंका इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी, थानाध्यक्ष लोहता राकेश सिंह, हाल ही में डीएसपी के पद पर प्रमोट हुए अनिरुद्ध सिंह, विक्रम सिंह, वाराणसी एटीएस के प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी, चंदौली जिले के मुगलसराय थाने के कोतवाल शिवानंद मिश्रा, बलिया जिले में तैनात इंस्पेक्टर शशिमौली पांडेय, भदोही जिले के थानाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह, जौनपुर जिले के थानाध्यक्ष ओम नारायण सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों ने समरजीत सिंह की मौत को अपनी निजी क्षति बताई। सभी का कहना यही था कि वह एक जाबांज पुलिसकर्मी के साथ ही सदैव सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने वाले अच्छे आदमी थे। उनकी मौत पुलिस महकमे की बड़ी क्षति है।