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पुलिस महकमे में छुट्टी के लिए आपाधापी
वाराणसी
Updated Fri, 12 Dec 2014 02:20 AM IST
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पुलिस महकमे में इस समय छुट्टी लेने की आपाधापी मची है। पुलिस अफसरों के यहां रोजाना छुट्टी के लिए सिपाहियों का जमावड़ा लग रहा है। इसके पीछे वीआईपी मूवमेंट की वजह से तीन माह से छुट्टी का बंद होना माना जा रहा है। किसी को वाजिब कारणों से छुट्टी चाहिए तो कोई दिसंबर बीतने के साथ छुट्टी लैप्स होने की चिंता में अर्जी लगाए हुए है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक दिसंबर में अब तक 200 से अधिक पुलिसकर्मी अवकाश पर जा चुके हैं जबकि 500 से अधिक आवेदन अफसरों के यहां पेंडिंग हैं।
पुलिस विभाग में छह तरह की छुट्टियों के प्रावधान हैं। इसमें मुख्य अर्जित अवकाश, मेडिकल, आकस्मिक अवकाश, एजूकेशनल, स्पेशल, रिवार्ड लीव शामिल है। महिला पुलिस कर्मियों को इनके अलावा मैटरनिटी और बेबी केयर लीव भी देय है।
पुलिसकर्मियों को हर साल 30 उपार्जित, 30 आकस्मिक अवकाश देय है लेकिन अधिकतर पुलिस कर्मियों को निर्धारित छुट्टियां नहीं मिल पातीं। विभागीय प्रावधान है कि उपार्जित अवकाश 300 तक पहुंचने के बाद ये सभी छुट्टियां समाप्त हो जाती हैं।
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पिछले तीन महीने से शहर में वीआईपी मूवमेंट अधिक होने के चलते अधिकतर पुलिस कर्मियों को छुट्टियां नसीब नहीं हो सकीं। अब साल का आखिरी महीना होने के नाते पुलिस कर्मी छुट्टियों के लिए परेशान हैं। किसी के यहां शादी हैं तो किसी की मां, पत्नी बीमार हैं। पुलिस अफसरों के यहां छुट्टियों के आवेदनों की भरमार लग गई है।
दर्द सुनाएं किसको
इंस्पेक्टर स्तर के एक अफसर कहते हैं कि कभी पुलिस वाला बनकर पुलिस के बारे में सोचिए। 90 प्रतिशत ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो त्योहारों पर घर नहीं जा पाते। पत्नी, बच्चे, माता, पिता बीमार हो जाते हैं तो भी समय पर उन्हें छुट्टियां नहीं मिल पातीं। एक हेड कांस्टेबल ने कहा कि सरकार की तरफ से छुट्टियां निर्धारित हैं लेकिन पुलिस कर्मियों को नहीं मिल पातीं। अगर हकीकत में जांच करा ली जाए तो 60 प्रतिशत पुलिसकर्मी शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपर टेंशन से ग्रसित हैं। सरकार और उच्चाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साल भर में जो भी अवकाश मिलता है वह उसी साल प्रत्येक पुलिस कर्मी को अनिवार्य रूप से दिए जाएं।
छुट्टी देने में कोई मनाही नहीं है। जिसकी छुट्टी बची है अगर वह मांगता है तो उसे छुट्टी दी जाती है। प्रेशर जैसी कोई बात नहीं है। वीआईपी मूवमेंट और कानून व्यवस्था की वजह से कभी कभार छुट्टी पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
- जोगेंद्र कुमार एसएसपी
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पुलिस विभाग में छह तरह की छुट्टियों के प्रावधान हैं। इसमें मुख्य अर्जित अवकाश, मेडिकल, आकस्मिक अवकाश, एजूकेशनल, स्पेशल, रिवार्ड लीव शामिल है। महिला पुलिस कर्मियों को इनके अलावा मैटरनिटी और बेबी केयर लीव भी देय है।
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पुलिसकर्मियों को हर साल 30 उपार्जित, 30 आकस्मिक अवकाश देय है लेकिन अधिकतर पुलिस कर्मियों को निर्धारित छुट्टियां नहीं मिल पातीं। विभागीय प्रावधान है कि उपार्जित अवकाश 300 तक पहुंचने के बाद ये सभी छुट्टियां समाप्त हो जाती हैं।
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पिछले तीन महीने से शहर में वीआईपी मूवमेंट अधिक होने के चलते अधिकतर पुलिस कर्मियों को छुट्टियां नसीब नहीं हो सकीं। अब साल का आखिरी महीना होने के नाते पुलिस कर्मी छुट्टियों के लिए परेशान हैं। किसी के यहां शादी हैं तो किसी की मां, पत्नी बीमार हैं। पुलिस अफसरों के यहां छुट्टियों के आवेदनों की भरमार लग गई है।
दर्द सुनाएं किसको
इंस्पेक्टर स्तर के एक अफसर कहते हैं कि कभी पुलिस वाला बनकर पुलिस के बारे में सोचिए। 90 प्रतिशत ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो त्योहारों पर घर नहीं जा पाते। पत्नी, बच्चे, माता, पिता बीमार हो जाते हैं तो भी समय पर उन्हें छुट्टियां नहीं मिल पातीं। एक हेड कांस्टेबल ने कहा कि सरकार की तरफ से छुट्टियां निर्धारित हैं लेकिन पुलिस कर्मियों को नहीं मिल पातीं। अगर हकीकत में जांच करा ली जाए तो 60 प्रतिशत पुलिसकर्मी शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपर टेंशन से ग्रसित हैं। सरकार और उच्चाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साल भर में जो भी अवकाश मिलता है वह उसी साल प्रत्येक पुलिस कर्मी को अनिवार्य रूप से दिए जाएं।
छुट्टी देने में कोई मनाही नहीं है। जिसकी छुट्टी बची है अगर वह मांगता है तो उसे छुट्टी दी जाती है। प्रेशर जैसी कोई बात नहीं है। वीआईपी मूवमेंट और कानून व्यवस्था की वजह से कभी कभार छुट्टी पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
- जोगेंद्र कुमार एसएसपी