Varanasi News: ईद-उल-अजहा को लेकर पुलिस सतर्क, सोशल मीडिया पर निगाह हुई पैनी, दिए गए जरूरी निर्देश
ईद-उल-अजहा पर्व को लेकर पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से अलर्ट पर है। सोशल मीडिया पर निगाह पैनी कर ली गई है और निर्देश दिया गया है कि कुर्बानी के वीडियो न डालें इसके साथ ही ये भी कहा गया कि सड़क पर नमाज न पढ़ें और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं होगी। पुलिस आयुक्त ने कहा थानाध्यक्ष रोजाना पीस कमेटी की बैठक करें जिसमें एसीपी मौजूद रहें।
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बकरीद के दिन सड़क पर नमाज नहीं होगी। इसके लिए ड्रोन और वीडियो कैमरों से नजर रखी जाए। यह निर्देश पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय में कमिश्नरेट के तीनों जोन के डीसीपी को दिया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं होगी। निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी होगी। खुले में कुर्बानी प्रतिबंधित रहेगी।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि मिश्रित आबादी वाले संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। चिह्नित स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। सभी थाना प्रभारी संभ्रांत व्यक्तियों और धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित कर शांति समिति की बैठकें आयोजित करें।
इन बैठकों में सहायक पुलिस आयुक्त अनिवार्य रूप से मौजूद रहें। जोन स्तर पर नगर निगम, जल निगम, विद्युत और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ डीसीपी शांति समिति की बैठक करें। सोशल मीडिया पर पुलिस की सतर्क नजर रहे।
कोई कुर्बानी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट न करे। सभी अधिकारी नियमित गश्त करें और हर स्तर पर समन्वय बनाए रखें। अफवाह फैलाने वालों पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया पर न डालें कुर्बानी की फोटो और वीडियो
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार सात जून को मनाया जाएगा। त्योहार से पहले मुत्तहिदा उलेमा कौंसिल की ओर से मुस्लिम समुदाय के लिए एडवाइजरी जारी की है। कौंसिल की ओर से मुस्लिम इलाकों में बकरीद के त्योहार के दौरान बरते जानी वाली सात सावधानियों के पर्चों का वितरण भी कराया जा रहा है।
इसमें सोशल मीडिया पर कुर्बानी की फोटो और वीडिया न डालने की भी अपील की गई है। मुत्तहिदा उलेमा कौंसिल ने पेशगी मुबारकबाद पेश करते हुए सात अपील जारी की है। इसके तहत सबसे पहले सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। कुर्बानी के मलबे को उन्हीं जगहों पर डालें जो नगर निगम की तरफ से तय की गई हैं।
कुर्बानी के गोश्त को किसी झोले या कपड़े में लपेटकर ही तकसीम करें। खुली जगहों और आम रास्तों पर कुर्बानी न करें। ऐसा कोई भी अमल अंजाम न दें जिसकी वजह से समाज में गलत संदेश जाए जो अपने मजहब की बदनामी का सबब बने। कुर्बानी के दिनों में खून से सने कपड़ों और बदन में बाहर निकलने से परहेज करें।