UP: BHU के PhD मामले में PMO का हस्तक्षेप, धरनास्थल के बाद VC ऑफिस पहुंचे ADM सिटी; छात्रों ने जताया गुस्सा
काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित केंद्रीय कार्यालय के सामने बैठी छात्रा अर्चिता सिंह से मिलने एटीएम सिटी पहुंचे थे। एटीएम सिटी में अर्चिता से लगभग 10 मिनट तक वार्ता किया। उन्होंने वार्ता के बाद एक-एक बिंदुओं पर जानकारी ली और उसे नोट किया।
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BHU Collage: बीएचयू के पीएचडी मामले में चल रहे धरनों को लेकर अब पीएमओ ने हस्तक्षेप किया है। सोमवार को एडीएम सिटी आलोक कुमार सेंट्रल ऑफिस पहुंचे और छात्रा से 10 मिनट तक बातचीत कर मामले को समझा। हर एक बिंदु को डायरी में नोट भी किया।
इसके बाद बीएचयू के शीर्ष अधिकारियों से वार्ता के लिए कार्यालय गए। कार्यवाहक कुलपति से मुलाकात कर विवादों पर चर्चा की। एबीवीपी ने वीसी लॉज के बाहर धरने पर बैठे छात्र के समर्थन में विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला फूंका। कहा कि बीएचयू को राजनैतिक दलों का अड्डा बना दिया गया है। वहीं, जातिगत मुद्दा भी तूल पकड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय प्रशासन तीनों धरनारत विद्यार्थियों को प्रवेश देने की तैयारी कर रहा है।
चर्चा रही कि करणी सेना की एंट्री के बाद से कैंपस में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। सपा के भी नेता समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी छात्रा से फोन पर बात कर समर्थन दिया है। एनएसयूआई और आइसा पांच दिन से धरनास्थल पर है। ऐसे में सोशल मीडिया पर काफी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।
पीएमओ जल्द से जल्द मामले को खत्म कराना चाह रहा है। उधर, खुफिया विभाग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट कहा गया कि जो काम 15 मिनट में हो सकता है, उसे पांच दिन तक टाला गया। अगर नियम के विरुद्ध एडमिशन हुए तो और भी छात्र अपना-अपना धरना लेकर बैठ सकते हैं।
नारेबाजी-परिसर विभाजनकारी राजनीति का बना प्रयोगशाला
एबीवीपी के छात्रों ने एमएमवी तिराहे पर पुतला फूंका। एबीवीपी के प्रांत मंत्री अभय सिंह ने कहा कि बीएचयू की पूरी प्रवेश प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अनियमितता दूर की जाए। विवि प्रशासन की शह पर परिसर विभाजनकारी राजनीति का प्रयोगशाला बन गया है।
मांग रखी कि भारत सरकार के ईडब्ल्यूएस संबंधित नियम के अनुसार छात्र हित में फैसला हो। जो बाहरी राजनैतिक और अवांछनीय लोग इन मुद्दों को भुनाने के लिए कैंपस को शिक्षा विरोधी राजनीतिक अड्डा बना रहे हैं, उससे कैंपस का वातावरण खराब हो रहा है। प्रशांत सिंह, सर्वेश सिंह समेत 50 छात्रों ने नारेबाजी भी की।
बीएचयू में 5 दिन पहले हिंदी विभाग में पीएचडी प्रवेश के लिए अर्चिता सिंह ने सेंट्रल ऑफिस के बाहर धरने की शुरुआत की थी। जिस पर आरोप लगाया, दो दिन बाद वह छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी भी कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठ गया। तीन दिन पहले तीसरा धरना परीक्षा नियंता कार्यालय के बाहर शुरू हो गया।
तीनों अभ्यर्थियों की मांग
अर्चिता सिंह - पांच दिन से सेंट्रल ऑफिस के बाहर धरना। हिंदी विभाग में ईडब्ल्यूएस आरक्षण सर्टिफिकेट देर में जमा करने पर प्रवेश न देने का मामला। हालांकि अंडरटेकिंग सर्टिफिकेट पहले जमा किया था। कहा ये पहला संघर्ष है। इन विषम परिस्थितियों में घबराने के बजाय न्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ने का काम करती रहूंगी।
भास्करादित्य त्रिपाठी - तीन दिन से वीसी लॉज के बाहर धरनारत। आरोप- हिंदी विभाग में नियम के तहत प्रवेश नहीं मिल रहा है। कहा- विश्वविद्यालय प्रशासन और हिंदी विभाग की मिलीभगत से एडमिशन बाधित करने के विरोध में तीखी धूप में बैठा हूं।
कुणाल गुप्ता - तीन दिन से परीक्षा नियंता कार्यालय के बाहर धरना। प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में ओबीसी सीट पर प्रवेश न मिल पाने का आरोप है। कहा- सामाजिक न्याय पसंद लोगों से अपील है कि आरक्षण और संविधान पर हमले के खिलाफ लड़ाई में साथ दें।