{"_id":"5ac60ac64f1c1beb618b590d","slug":"pmo-get-notice-from-amar-ujala-news-varanasi-ganga-ghat-will-be-renovate","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मुकाम पर पहुंची 'अमर उजाला' की मुहिम, काशी में गंगा के बदहाल घाटों की बदलेगी सूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुकाम पर पहुंची 'अमर उजाला' की मुहिम, काशी में गंगा के बदहाल घाटों की बदलेगी सूरत
पीयूष तिवारी, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:51 AM IST
विज्ञापन
पेशवाओं की निशानी किसी भी दिन हो सकती है जमींदोज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बनारस की शान में शुमार गंगा घाटों को जल्द ही नवजीवन मिलने वाला है। इन घाटों की मरम्मत, संवारने और मूल रूप में लाने के लिए वाराणसी नगर निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। यह एक साल के भीतर पूरा करना है। इसके लिए नगर निगम के जायका विंग की ओर ने 26 घाटों की मरम्मत कराने की कवायद की जा रही है।
सभी घाटों को सजाने-संवारने के लिए भी सर्वे हो चुका है। अमर उजाला में घाटों की दुर्दशा को लेकर चलाए गए अभियान का प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया। पीएमओ के निर्देश पर ही नगर निगम घाटों के सौंदर्यीकरण में जुटा है।
पढ़ेंः काशी में पेशवाओं की निशानी पर मंडरा रहे संकट के बादल
विज्ञापन
वरुणा और अस्सी के बीच गंगा किनारे बने 84 घाटों में से 26 घाटों की स्थिति बहुत ही खराब हो चुकी है। यहां घाट अंदर से खोखले हो चुके हैैं। इसकी वजह कछुआ सैंक्चुअरी के चलतेे रेत का कटाव न होने से गंगा की धारा डायवर्ट होकर घाटों पर अपना दबाब बना रही है।
इससे घाट की नींव अंदर से खोखली होती जा रही है। घाट और घाटों के किनारे स्थित प्राचीन विरासतें जैसे महल मंदिर, मठ को भी आनेे वाले समय में खतरा है।
इन प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने और घाटों को बचाने के लिए नगर निगम ने घाटों की मरमत कराने के लिए 10 करोड़ 76 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। यह कार्य जायका के नमामि गंगे और नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के तहत किया जा रहा है।
अमर उजाला ने बताई थी घाटों की दुर्दशा
गंगा के घाटों की दुर्दशा को लेकर अमर उजाला ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में अभियान चलाया था। इसमें घाटों की दुर्दशा को लेकर घाट पड़ताल करके खबरें प्रकाशित की गई थीं। इसमें दरकते घाटों और श्रद्घालुओं की दयनीय स्थिति को प्रदर्शित किया गया था।
गंगा प्रेमियों, संतों और विद्वानों ने भी अपनी राय देकर गंगा के घाटों को बचाने की अपील की थी। इन खबरों का पीएमओ ने भी संज्ञान लिया। वहां से नगर निगम को कार्य कराने के लिए पत्र जारी हुआ। इसके बाद नगर निगम ने इन घाटों को बचाने के लिए पूरा प्लान तैयार कर उसके लिए टेंडर जारी किया है।
विज्ञापन
सभी घाटों को सजाने-संवारने के लिए भी सर्वे हो चुका है। अमर उजाला में घाटों की दुर्दशा को लेकर चलाए गए अभियान का प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया। पीएमओ के निर्देश पर ही नगर निगम घाटों के सौंदर्यीकरण में जुटा है।
विज्ञापन
पढ़ेंः काशी में पेशवाओं की निशानी पर मंडरा रहे संकट के बादल
विज्ञापन
वरुणा और अस्सी के बीच गंगा किनारे बने 84 घाटों में से 26 घाटों की स्थिति बहुत ही खराब हो चुकी है। यहां घाट अंदर से खोखले हो चुके हैैं। इसकी वजह कछुआ सैंक्चुअरी के चलतेे रेत का कटाव न होने से गंगा की धारा डायवर्ट होकर घाटों पर अपना दबाब बना रही है।
इससे घाट की नींव अंदर से खोखली होती जा रही है। घाट और घाटों के किनारे स्थित प्राचीन विरासतें जैसे महल मंदिर, मठ को भी आनेे वाले समय में खतरा है।
इन प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने और घाटों को बचाने के लिए नगर निगम ने घाटों की मरमत कराने के लिए 10 करोड़ 76 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। यह कार्य जायका के नमामि गंगे और नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी के तहत किया जा रहा है।
अमर उजाला ने बताई थी घाटों की दुर्दशा
गंगा के घाटों की दुर्दशा को लेकर अमर उजाला ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में अभियान चलाया था। इसमें घाटों की दुर्दशा को लेकर घाट पड़ताल करके खबरें प्रकाशित की गई थीं। इसमें दरकते घाटों और श्रद्घालुओं की दयनीय स्थिति को प्रदर्शित किया गया था।
गंगा प्रेमियों, संतों और विद्वानों ने भी अपनी राय देकर गंगा के घाटों को बचाने की अपील की थी। इन खबरों का पीएमओ ने भी संज्ञान लिया। वहां से नगर निगम को कार्य कराने के लिए पत्र जारी हुआ। इसके बाद नगर निगम ने इन घाटों को बचाने के लिए पूरा प्लान तैयार कर उसके लिए टेंडर जारी किया है।
इन 26 घाटों की होगी मरम्मत
दरकने के कगार पर हैं घाट
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि गंगा किनारे के घाटों की मरम्मत कराने के लिए 26 घाटों को चयनित किया गया है। इनमें वे घाट शामिल हैं, जो अंदर से खोखला होने के चलते टूट गए हैं, जिनकी मरम्म्त जरूरी है। इनके लिए 10.76 करोड़ का टेंडर हुआ है। एक साल के अंदर कार्य को पूर करना है।
नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत प्रभु घाट, भदैनी घाट, जानकी घाट, आनन्दमई घाट, बद्री नारायन घाट, गोला घाट, त्रिलोचन घाट, नया घाट, राम घाट, निशाद घाट, गाय घाट, बूंदी परकोटा घाट, मानसरोवर घाट, जैन घाट, संकठा घाट, पांडेय घाट, लाल घाट, केदार घाट, चौकी घाट, जतर घाट, सक्का घाट, तेेलियानाला घाट, राजा ग्वालियर घाट, नारद घाट, शीतला घाट और नंदेश्वर घाट शामिल है।
नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत प्रभु घाट, भदैनी घाट, जानकी घाट, आनन्दमई घाट, बद्री नारायन घाट, गोला घाट, त्रिलोचन घाट, नया घाट, राम घाट, निशाद घाट, गाय घाट, बूंदी परकोटा घाट, मानसरोवर घाट, जैन घाट, संकठा घाट, पांडेय घाट, लाल घाट, केदार घाट, चौकी घाट, जतर घाट, सक्का घाट, तेेलियानाला घाट, राजा ग्वालियर घाट, नारद घाट, शीतला घाट और नंदेश्वर घाट शामिल है।
ऐसे तो आने वाले वर्षों में भी साफ नहीं हो पाएंगी गंगा
चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह
- फोटो : अमर उजाला
धर्मनगरी वाराणसी से गुजर रही गंगा और वरुणा में 32 नाले अब भी गिर रहे हैं। जब तक इन नालों के मुहाने को बंद नहीं किया जाएगा तब तक गंगा साफ नहीं होंगी। अस्सी से राजघाट के बीच गंगा में और वरुणा में गिरने वाले नाले के सीवर को एसटीपी तक पहुंचाने की योजना है।
दीनापुर में एसटीपी चालू है लेकिन पर्याप्त मात्रा में सीवर का शोधन नहीं हो रहा है। गोइठहां के अलावा रमना में भी एसटीपी बन रहा है। इसके अलावा गंगा किनारे घाटों पर एसटीपी बनाने की योजना प्रस्तावित है। बनारस में गंगा निर्मलीकरण के लिए अब तक सिर्फ फाइलों का गठ्ठर ही तैयार हो रहा है।
नमामि गंगे मिशन के तहत काम के खाते में सिर्फ और सिर्फ रमना में प्रस्तावित 150 करोड़ की लागत वाला 50 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ही दर्ज है। गंगा में प्रदूषण रोकने को शहरी इलाके में 27 किलोमीटर ट्रंक सीवर तथा ट्रांस वरुणा में 144 किलोमीटर सीवर लाइन डालने से लेकर तीन पम्पिंग स्टेशन और 260 एमएलडी के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम चल रहा है, मगर उसकी रफ्तार बेहद ही सुस्त है।
प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो गंगा की सफाई की पहली कड़ी नालों को गिरने से रोकना है। गंगा सफाई के लिए लगातार मुहिम चलाए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में जो काम जरूरी है वे पूरे नहीं होने से गंगा मैली है। अस्सी नदी के पानी को भी शोधन करके छोड़ने की योजना है। गंगा किनारे पेड़ लगाने के साथ साथ डाल्फिन को छोड़ने की योजना बनाई गई है।
दीनापुर में एसटीपी चालू है लेकिन पर्याप्त मात्रा में सीवर का शोधन नहीं हो रहा है। गोइठहां के अलावा रमना में भी एसटीपी बन रहा है। इसके अलावा गंगा किनारे घाटों पर एसटीपी बनाने की योजना प्रस्तावित है। बनारस में गंगा निर्मलीकरण के लिए अब तक सिर्फ फाइलों का गठ्ठर ही तैयार हो रहा है।
नमामि गंगे मिशन के तहत काम के खाते में सिर्फ और सिर्फ रमना में प्रस्तावित 150 करोड़ की लागत वाला 50 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ही दर्ज है। गंगा में प्रदूषण रोकने को शहरी इलाके में 27 किलोमीटर ट्रंक सीवर तथा ट्रांस वरुणा में 144 किलोमीटर सीवर लाइन डालने से लेकर तीन पम्पिंग स्टेशन और 260 एमएलडी के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम चल रहा है, मगर उसकी रफ्तार बेहद ही सुस्त है।
प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो गंगा की सफाई की पहली कड़ी नालों को गिरने से रोकना है। गंगा सफाई के लिए लगातार मुहिम चलाए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में जो काम जरूरी है वे पूरे नहीं होने से गंगा मैली है। अस्सी नदी के पानी को भी शोधन करके छोड़ने की योजना है। गंगा किनारे पेड़ लगाने के साथ साथ डाल्फिन को छोड़ने की योजना बनाई गई है।