{"_id":"60d8d4b48ebc3e72d925b450","slug":"pm-s-words-encouraged-i-will-do-my-best-varanasi-news-vns597313026","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम की बातों ने बढ़ाया हौसला, करूंगा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम की बातों ने बढ़ाया हौसला, करूंगा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे एथलीट शिवपाल सिंह ने कहा कि वह ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे। प्रधानमंत्री ने मन की बात में जिस परंपरा की बात कही है मैं उसको निरंतर कायम रखूंगा। उनकी बातों ने मेरे हौसले को और मजबूत किया है। मैं प्रधानमंत्री का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
रविवार को अमर उजाला से बातचीत में शिवपाल ने बताया कि वह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जो मन की बात में कहा उसे सुनकर बहुत अच्छा लगा। प्रधानमंत्री की बातों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ललक को और बढ़ा दिया है। मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस के शिवपाल जी का पूरा परिवार ही इसी खेल से जुड़ा है। उनके पिता, चाचा और भाई सभी भाला फेंकने में एक्सपर्ट हैं। परिवार की यही परंपरा उनके लिए टोक्यो आलंपिक में काम आने वाली है। 2020 में साउथ अफ्रीका में 85.47 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक का टिकट पा चुके एथलीट शिवपाल सिंह का रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में उनके संघर्षों का जिक्र किया।
शिवपाल तो मूल रूप चंदौली के धानापुर ब्लाक के हिगुतरगढ़ गांव के रहने वाले हैं। जिनका नाता बनारस से भी रहा है। पिछले एक साल से पटियाला ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यास कर रहे शिवपाल पिता रामाश्रय सिंह के साथ रामनगर में भी रहा करते थे। इस दौरान वो अक्सर अभ्यास और दौड़ लगाने के लिए चांदमारी स्थित खेल मैदान आते थे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश पुलिस में कास्टेबल रामाश्रय ने बताया कि पत्नी पूनम के निधन के बाद दोनों बेटे शिवपाल और नंदकिशोर ने चाचा जगमोहन के साथ रहकर जेवलिन थ्रो में कई उपलब्धियां हासिल कीं। छोटा बेटा नंदकिशोर सिंह भी जेवलिन के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी है। जो सेना में तैनात है। जब मेरी ड्यूटी बनारस में होती है तो दोनों बेटे मेरे पास रामनगर में रहने आते थे। इस दौरान अभ्यास के लिए चांदमारी खेल मैदान में अभ्यास के लिए भी जाते थे। लेकिन जब मेरी ड्यूटी बाहर लगती थी तो दोनों बेटे अपने चाचा के पास चले जाते थे।
ये हैं उपलब्धियां --
शिवपाल की प्रतिभा को देखते हुए उनके चाचा जगमोहन 16 वर्ष की अवस्था में ही उन्हें अपने साथ दिल्ली ले गए और जेवलिन थ्रो की ट्रेनिंग दिलाई। स्पोर्ट्स कोटे से ही शिवपाल एयरफोर्स में भर्ती हुए। वर्ष 2018 में एशियन गेम्स, वर्ष 2019 में नेशनल फेडरेशन कप एथलेटिक चैंपियनशिप सहित वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। इसके अलावा शिवपाल चार बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। सेना के विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
विज्ञापन
रविवार को अमर उजाला से बातचीत में शिवपाल ने बताया कि वह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जो मन की बात में कहा उसे सुनकर बहुत अच्छा लगा। प्रधानमंत्री की बातों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ललक को और बढ़ा दिया है। मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस के शिवपाल जी का पूरा परिवार ही इसी खेल से जुड़ा है। उनके पिता, चाचा और भाई सभी भाला फेंकने में एक्सपर्ट हैं। परिवार की यही परंपरा उनके लिए टोक्यो आलंपिक में काम आने वाली है। 2020 में साउथ अफ्रीका में 85.47 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक का टिकट पा चुके एथलीट शिवपाल सिंह का रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में उनके संघर्षों का जिक्र किया।
विज्ञापन
शिवपाल तो मूल रूप चंदौली के धानापुर ब्लाक के हिगुतरगढ़ गांव के रहने वाले हैं। जिनका नाता बनारस से भी रहा है। पिछले एक साल से पटियाला ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यास कर रहे शिवपाल पिता रामाश्रय सिंह के साथ रामनगर में भी रहा करते थे। इस दौरान वो अक्सर अभ्यास और दौड़ लगाने के लिए चांदमारी स्थित खेल मैदान आते थे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश पुलिस में कास्टेबल रामाश्रय ने बताया कि पत्नी पूनम के निधन के बाद दोनों बेटे शिवपाल और नंदकिशोर ने चाचा जगमोहन के साथ रहकर जेवलिन थ्रो में कई उपलब्धियां हासिल कीं। छोटा बेटा नंदकिशोर सिंह भी जेवलिन के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी है। जो सेना में तैनात है। जब मेरी ड्यूटी बनारस में होती है तो दोनों बेटे मेरे पास रामनगर में रहने आते थे। इस दौरान अभ्यास के लिए चांदमारी खेल मैदान में अभ्यास के लिए भी जाते थे। लेकिन जब मेरी ड्यूटी बाहर लगती थी तो दोनों बेटे अपने चाचा के पास चले जाते थे।
ये हैं उपलब्धियां --
शिवपाल की प्रतिभा को देखते हुए उनके चाचा जगमोहन 16 वर्ष की अवस्था में ही उन्हें अपने साथ दिल्ली ले गए और जेवलिन थ्रो की ट्रेनिंग दिलाई। स्पोर्ट्स कोटे से ही शिवपाल एयरफोर्स में भर्ती हुए। वर्ष 2018 में एशियन गेम्स, वर्ष 2019 में नेशनल फेडरेशन कप एथलेटिक चैंपियनशिप सहित वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। इसके अलावा शिवपाल चार बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। सेना के विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।