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‘कटप्पा’ ने ‘बाहुबली’ को क्यों मारा, जनता ने बताया
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:34 PM IST
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विनीत, धनंजय, उपेंद्र, बजरंगी की बीवी, अखंड और भूपेंद्र को जनता ने नकारा
- फोटो : Self
पीएम मोदी के ‘कटप्पा’ विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के बाहुबलियों और उनके सगे संबंधियों पर भारी पड़े। हालांकि मुख्तार अंसारी सलाखों के पीछे रहकर भी अपनी हनक बरकरार रखने में कामयाब रहे लेकिन उनके अपनों को चुनाव में मुंह की खानी पड़ी।
वहीं विनीत, धनंजय और उपेंद्र जैसे जरायम की दुनिया के कुख्यात नामों को जनता ने सिरे से खारिज कर विकास का वादा करने वालेे प्रत्याशियों को चुना।
जानकारों का कहना है कि यह पूर्वांचल की राजनीति के लिए सुखद संकेत है और इससे साबित होता है कि नेता अब जनता से काम के बल पर ही वोट मांग पाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी को मऊ में चुनावी रैली में कहा था कि एक फिल्म के प्रमुख किरदार ‘कटप्पा’ ने बाहुबलियों का सफाया किया था।
सभा में ही एक छड़ी की तरफ इशारा करते हुए पीएम ने कहा था कि यह कानून का डंडा है और यह भी कटप्पा की तरह ही बाहुबलियों का सफाया करेगी। 11 मार्च के बाद सारे खेल खत्म हो जाएंगे। बीजेपी सरकार में जेल का मतलब पता चला जाएगा।
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पीएम मोदी की इस बात को पूर्वांचल के मतदाताओं ने गंभीरता से लिया। नतीजतन, आगरा जेल में निरुद्ध मुख्तार अंसारी मऊ सदर से बमुश्किल 7452 वोट से बीजेपी-भासपा प्रत्याशी महेंद्र राजभर से जीत पाए।
मगर, मुख्तार के नाम के दम पर घोसी से उनका बेटा अब्बास अंसारी और गाजीपुर के मुहम्मदाबाद से उनके भाई शिबगतुल्लाह अंसारी को भाजपा प्रत्याशियों ने हरा दिया। इसी तरह मोदी लहर में पूर्वांचल के अन्य बाहुबलियों में से रांची केंद्रीय कारागार में निरुद्ध चंदौली के सैयदराजा से बसपा प्रत्याशी विनीत सिंह को भाजपा के सुशील सिंह ने हराया।
जौनपुर के मड़ियाहू से झांसी जेल में निरुद्ध मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह भी प्रत्याशी थी लेकिन इस सीट से भाजपा-अद (एस) गठबंधन की लीना तिवारी के सिर पर जीत का सेहरा बंधा।
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वहीं विनीत, धनंजय और उपेंद्र जैसे जरायम की दुनिया के कुख्यात नामों को जनता ने सिरे से खारिज कर विकास का वादा करने वालेे प्रत्याशियों को चुना।
जानकारों का कहना है कि यह पूर्वांचल की राजनीति के लिए सुखद संकेत है और इससे साबित होता है कि नेता अब जनता से काम के बल पर ही वोट मांग पाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी को मऊ में चुनावी रैली में कहा था कि एक फिल्म के प्रमुख किरदार ‘कटप्पा’ ने बाहुबलियों का सफाया किया था।
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सभा में ही एक छड़ी की तरफ इशारा करते हुए पीएम ने कहा था कि यह कानून का डंडा है और यह भी कटप्पा की तरह ही बाहुबलियों का सफाया करेगी। 11 मार्च के बाद सारे खेल खत्म हो जाएंगे। बीजेपी सरकार में जेल का मतलब पता चला जाएगा।
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पीएम मोदी की इस बात को पूर्वांचल के मतदाताओं ने गंभीरता से लिया। नतीजतन, आगरा जेल में निरुद्ध मुख्तार अंसारी मऊ सदर से बमुश्किल 7452 वोट से बीजेपी-भासपा प्रत्याशी महेंद्र राजभर से जीत पाए।
मगर, मुख्तार के नाम के दम पर घोसी से उनका बेटा अब्बास अंसारी और गाजीपुर के मुहम्मदाबाद से उनके भाई शिबगतुल्लाह अंसारी को भाजपा प्रत्याशियों ने हरा दिया। इसी तरह मोदी लहर में पूर्वांचल के अन्य बाहुबलियों में से रांची केंद्रीय कारागार में निरुद्ध चंदौली के सैयदराजा से बसपा प्रत्याशी विनीत सिंह को भाजपा के सुशील सिंह ने हराया।
जौनपुर के मड़ियाहू से झांसी जेल में निरुद्ध मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह भी प्रत्याशी थी लेकिन इस सीट से भाजपा-अद (एस) गठबंधन की लीना तिवारी के सिर पर जीत का सेहरा बंधा।
ये रहे लाज बचाने में कामयाब
इसी तरह भाजपा प्रत्याशियों की तगड़ी चुनौती के कारण ही जौनपुर के मल्हनी से निषाद पार्टी प्रत्याशी धनंजय सिंह, चंदौली के सकलडीहा से बसपा प्रत्याशी उपेंद्र सिंह गुड्डू, आजमगढ़ सदर से बसपा प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह मुन्ना और अतरौलिया से बसपा प्रत्याशी अखंड प्रताप सिंह को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने तगड़ी शिकस्त दी।
इस बीच रोचक यह रहा कि सपा से निकाल गए आपराधिक छवि के विजय मिश्र निर्दल प्रत्याशी के तौर पर भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा से अपनी लाज बचाने में कामयाब रहे।
इस बीच रोचक यह रहा कि सपा से निकाल गए आपराधिक छवि के विजय मिश्र निर्दल प्रत्याशी के तौर पर भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा से अपनी लाज बचाने में कामयाब रहे।