बीएचयूः सुब्रमण्यम भारती के सम्मान में कला संकाय में लगेगी चेयर, पुण्यतिथि पर पीएम मोदी ने की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सुब्रह्मण्यम भारती की पुण्यतिथि पर बीएचयू कला संकाय में चेयर को स्थापित करने की घोषणा की। यहां तमिल भाषा, साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ ही शोध भी कराया जाएगा।
विस्तार
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में जाने माने तमिल लेखक, कवि, दार्शनिक सुब्रह्मण्यम भारती के नाम पर चेयर स्थापित किया जाएगा। इससे न केवल परंपरा और मजबूत होगी बल्कि युवाओं को तमिल भाषा के कवियों, उनके विचारों को जानने का मौका मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सुब्रह्मण्यम भारती की पुण्यतिथि पर कला संकाय में इस चेयर को स्थापित करने की घोषणा की। यहां तमिल भाषा, साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ ही शोध भी कराया जाएगा।
कवि सुब्रह्मण्यम भारती चेयर स्थापित करने की प्रधानमंत्री की घोषणा से बीएचयू के प्रभारी वीसी प्रो. वीके शुक्ला सहित शिक्षक, छात्र, अधिकारी कर्मचारी बहुत उत्साहित हैं।
आज इस अवसर पर मैं एक महत्वपूर्ण घोषणा भी कर रहा हूं।
— PMO India (@PMOIndia) September 11, 2021
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में सुब्रमण्य भारती जी के नाम से एक Chair स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
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चेयर की स्थापना की घोषणा से बीएचयू उत्साहित
प्रभारी कुलपति ने बताया कि महाकवि भारती जैसे महान व्यक्तित्व के नाम पर इस चेयर की स्थापना की घोषणा से बीएचयू उत्साहित है और एवं गर्व का अनुभव कर रहा है। काशी की नगरी प्राचीन काल से ज्ञान एवं अध्यात्म का प्रकाश चारों ओर फैलाती आई है। बीएचयू ने राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य पर आगे बढ़ते हुए इस ज्ञान परंपरा को न सिर्फ संजोने का काम किया है, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी को इसे संप्रेषित भी किया है।
कई बार बनारस आ चुके हैं सुब्रह्मण्यम भारती
जाने माने तमिल कवि और लेखक सुब्रह्मण्यम भारती का काशी से गहरा नाता है। यहां वह दो बार आ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी की शिक्षा भी काशी में हासिल की थी। अब उनके नाम पर बीएचयू के तमिल अध्ययन केेंद्र में चेयर स्थापित होने से यहां शिक्षण और शोध को नया आयाम मिलेगा।
सुब्रह्मण्यम भारती के नाम पर चेयर स्थापित करने का प्रस्ताव 2008 में तमिल अध्ययन केंद्र में तत्कालीन प्रो. अरुणा भारती ने भेजा था। इसके अलावा पिछले महीने भी सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। अब जाकर मंजूरी मिली। बीएचयू से जुड़ा हर कोई बहुत खुश है। पीठ स्थापित होने के बाद सरकार की ओर से धनराशि भी दी जाएगी, जिसके बाद यहां शोध कार्य भी होंगे।