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पीएम के दूत ने लिया जमीनी हकीकत का जायजा

Wed, 23 Nov 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 23 Nov 2016 02:13 AM IST
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PM angel took stock of the ground realities
नाोटबंदी मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूत के रूप में पहुंचे सचिव अरुण सिंघल ने नोटबंदी से उपजी समस्याओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उन्होंने बैंक अफसरों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। कारोबारियों से उनकी समस्याएं पूछीं। व्यापारियों ने भी उनसे अपना दर्द साझा किया। बैंक-डाकघर के अधिकारियों ने कैश की कमी की बात कही। आयकर अफसरों से भी उन्होंने इस बारे में बात की। बातचीत के दौरान खाते में 50 हजार रुपये से अधिक जमा करने वालों पर नजर रखने के बारे में लिखे गए पत्र का भी मसला उठा। उन्होंने सभी को भरोसा दिलाया कि वे उनकी समस्याओं के बारे में पीएम और वित्त मंत्री को रिपोर्ट देंगे। बैठक के बाद संयुक्त सचिव ने मौके पर जाकर एटीएम का हाल भी देखा।
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पीएम के दूत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के  संयुक्त सचिव अरुण सिंघल नोटबंदी से उपजी समस्याएं जानने मंगलवार को शहर में थे। कुछ बैंकों के एटीएम और प्रधान डाकघर के निरीक्षण के बाद उन्होंने कमिश्नरी सभागार में बैंक, आयकर अधिकारियों और व्यापारियों के  साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। ज्यादातर कारोबारियों ने कहा कि नोटबंदी से धंधा चौपट हो गया है। बैंक अधिकारियों ने कैश कम होने की समस्या बताई। इस पर अरुण सिंघल ने कहा कि वह आरबीआई के अधिकारियों से बात करेंगे। उन्होंने बताया कि वह हालात की रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को देंगे।
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बैठक में मौजूद फल और सब्जी कारोबारियों ने कहा कि उन्हें माल लेकर आने वाले ट्रक चालकों को नगद पैसे देने होते हैं। वे चेक नहीं लेते। कैश न होने के चलते ट्रक अगर दो दिन खड़े रहे तो पूरा माल खराब हो रहा है। ट्रक ऑपरेटर्स से सरकार को बात करनी चाहिए कि वे चेक से पेमेंट लें। किसानों का माल उनके यहां डंप पड़ा है क्योंकि उन्हेें भी नगद भुगतान चाहिए।
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कुछ व्यापारियों की शिकायत थी कि बैंककर्मी मनमानी कर रहे हैं। परिचितों को बिना कतार में लगे पैसे दिलवाते हैं। इस बात पर कुछ बैंककर्मी नाराज हो गए। उनका कहना था कि बैंककर्मियों की वजह से ही व्यवस्था संभली हुई है। बैंकों में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। विशेश्वरगंज डाकघर के सीनियर पोस्टमास्टर सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि डाकघर में नोट बदलवाने वालों की लाइन लग रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि डाकघर में खाते खुलवाएं और हर सप्ताह 25 हजार रुपये निकालें लेकिन इसके बाद भी कोई खाता नहीं खुलवा रहा। बैठक के बाद संयुक्त सचिव ने कहा कि सभी समस्याओं से पीएम और वित्त मंत्री को अवगत कराया जाएगा। वाराणसी के बाद वह चंदौली और फिर भदोही रवाना हुए।


संयुक्त सचिव अरुण सिंघल ने सोमवार को प्रधान डाकघर कैंट एवं दो बैंकों के एटीएम का निरीक्षण किया गया। वह सेंट्रल जेल रोड स्थित सिंडिकेट बैंक के एटीएम पहुंचे तो पता चला कि वहां दो हजार के नोट नहीं निकल रहे हैं। बैंक की ओर से बताया गया कि तकनीकी खराबी न होने न वजह से एटीएम अपग्रेड नहीं हो रहा है। उन्होंने इंजीनियरों से बात कर समस्या दूर करने का निर्देश दिया। पता चला कि कई बैंकों के एटीएम से दो हजार केे नोट नहीं निकल रहे हैं। प्रधान डाकघर के अधिकारियों ने अरुण सिंघल को बताया कि उन्हें दस-दस के नोट बांटने को दिए जा रहे हैं। नगदी की कमी की समस्या भी बताई। सिंघल देहात क्षेत्र में हरहुआ स्थित स्टेट बैंक के एटीएम पहुंचे। वहां बताया गया कि नगदी समाप्त होने के बाद एटीएम बंद कर दिया जाता है।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही घोषणा की हो कि 2.5 लाख रुपये तक जमा करने वालों के  खातों की जांच नहीं होगी लेकिन आयकर विभाग 50 हजार जमा करने वालों पर भी नजर रख रहा है। मंगलवार को कमिश्नरी सभागार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के संयुक्त सचिव की बैठक में इसका पता चला। एक बैंक अधिकारी ने कहा कि आयकर की ओर से पत्र भेजकर आठ नवंबर के बाद 50 हजार और उससे अधिक रकम जमा करने वाले खाताधारकों के बारे में जानकारी मांगी है।



यह मसला उठने पर आयकर अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि उन्हें केंद्र सरकार से जो लिखित आदेश मिला है वे उसके अनुरूप ही काम कर रहे हैं। किस मंच से क्या घोषणा हुई, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। यह बैठक नोटबंदी के बाद उपजी समस्याओं पर थी। बैंकों, व्यापारियों को आ रही दिक्कतों पर चर्चा के दौरान आयकर की ओर से पचास हजार जमा करने वालों की जानकारी देने के बारे में पत्र भेजने की बात सामने आई। इससे नाराज व्यापारियों का कहना था कि आयकर विभाग नोटिस भेजकर अब मनचाहे तरीके से खाताधारकों का उत्पीड़न करेगा। खासकर व्यापारियों का, जिन्होंने पचास हजार या उससे अधिक रकम अपने खातों में जमा कराई है। जितने रुपये जमा नहीं होंगे, उससे अधिक वकील को पैसे देकर पैरवी में लग जाएंगे। प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि जनधन खातों में पचास हजार और अन्य खातों में ढाई लाख जमा करने पर कोई जांच नहीं होगी तो फिर ऐसा क्यों किया जा रहा है। इस पर संयुक्त सचिव ने यह कहकर मामला शांत कराने का प्रयास किया कि आयकर अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या ही कितनी है कि वो इतने ढेर सारे खातों की जांच करेंगे। वहीं, आयकर अधिकारी ने सीनियर पोस्टमास्टर सत्यदेव त्रिपाठी की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि इनके विभाग से लेन-देन की कोई सूचना आयकर विभाग को नहीं दी जा रही है।
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