खिलाड़ियों की कहानी: बीमार मां ने दवा के पैसे से दिलाया फुटबॉल किट, तो कोई पिता की ममद को आयरन करती है कपड़े
वाराणसी में आगामी राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता खेलने के लिए बालक व बालिका वर्ग के खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। प्रतियोगिता के लिए तैयारी में जुटी कई ऐसी खिलाड़ी हैं जो काफी संघर्ष कर आगे बढ़ रही हैं।
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आगामी राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता खेलने के लिए खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर बरेका इंटर कॉलेज मैदान में लगाया गया है। इसमें फुटबॉल कोच भैरव दत्त खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बताया कि खेल मैदान पर प्रतिदिन 150 से अधिक बालक बालिका वर्ग के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता के अलावा महिला लीग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 20 से अधिक खिलाड़ी खेल चुके हैं। भैरव दत्त की देखरेख में खेल की शुरूआत करने वाली पहाड़ी गांव की गुड़िया ने अबतक 13 राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीत चुकी हैं। उत्कृष्ट खेल के आधार पर 2019-23 तक साई सेंटर में खेल चुकी हैं। घुटने में चोट लगने की वजह इस समय घर पर रहकर फुटबॉल मैदान पर उतरने के लिए रिहैब कर रही हैं।
सुलेखा कन्नोजिया 2018 से फुटबॉल खेल रही है। घर में पिता के काम में हाथ बंटाने के लिए लोगों के कपड़े आयरन करती हैं। बताया कि बीमार मां ने दवा के पैसे से उनके लिए फुटबॉल का किट पर खर्च कर दिया। वह अबतक दो नेशनल खेल चुकी हैं।
अमृता शर्मा के पिता शहर में घूम- घूम कर लोगों के कैंची और चाकू आदि की धार तेज करते हैं। गरीब परिवार से होने के बावजूद उनकी अमृता की फुटबॉल की धार बेहद तेज हैं। वह अबतक तीन राष्ट्रीय और दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेल चुकी हैं।
प्रतीमा चार राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेल चुकी हैं। उन्होंने दो उड़िसा में जयपुर और आसाम में एक- एक प्रतियोगिता खेला है। पूजा के पिता का निधन हो चुका है। मां दूसरे के घरों में काम करती हैं। पूजा शत प्रतिशत छात्रवृत्ति पर पंजाब के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं।
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