Pitru Paksha: चंद्रतीर्थ पर श्राद्ध से पितरों को मिलता है गया श्राद्ध का फल, काशी में तर्पण का खास महत्व
Varanasi News: काशी में तर्पण से 100 पीढ़ियां तर जाती हैं। ऐसे में वाराणसी के गंगा तटों पर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितरों के तर्पण और श्राद्ध का सिलसिला शुरू हुआ।
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मोक्ष की नगरी काशी में पितृपक्ष पर पितरों के तर्पण और श्राद्ध के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। पिशाचमोचन और गंगा के तट के अलावा काशी में 15 से अधिक तीर्थ हैं, जहां श्राद्ध और तर्पण से सौ पीढ़ियां तर जाती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितरों के तर्पण और श्राद्ध का सिलसिला चंद्र तीर्थ से शुरू हुआ।
रविवार को काशी के वैदिक विद्वानों ने चंद्रतीर्थ और चंद्रेश्वर लिंग पर पूजन अनुष्ठान किया। मान्यता है कि जो श्रद्धा और भक्ति से चंद्रतीर्थ में स्नान कर चंद्रेश्वर लिंग का पूजन करेगा, वह भक्त चंद्रलोक की प्राप्ति करेगा।
वैदिक विद्वान आचार्य चंद्रशेखर द्रविड़ ने बताया कि जब कोई चंद्रेश्वर दर्शनार्थ आता है, तो उसके पूर्वज हर्ष से नृत्य करने लगते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अब तर्पण अवश्य होगा। इस दौरान वैदिक आचार्य चंद्रशेखर द्राविड़, पंडित शिवम शर्मा, पंडित विकास गर्ग, पंडित दीपक भारद्वाज, पं. नरेंद्र पांडेय, इंद्रनील श्रीवास्तक अनुष्ठान में शामिल हुए।
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चंद्रेश्वर लिंग का पूजन करने वालों को मिलता है चंद्रलोक
पं. चंद्रशेखर द्राविड़ ने बताया कि काशीखंड में महादेव कहते हैं कि चंद्रेश्वर लिंग का पूजन करने वाला सीधे चंद्रलोक को प्राप्त होता है। चंद्रदेव ने कठोर तपस्या कर पवित्र चंद्रतीर्थ और चंद्रेश्वर लिंग की स्थापना की। देवाधिदेव महादेव ने उनको वरदान दिया कि जो श्रद्धा और भक्ति से इस चंद्रतीर्थ में स्नान कर मेरे चंद्रेश्वर लिंग का पूजन करेगा, वह भक्त चंद्रलोक की प्राप्ति करेगा।