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पिशाचमोचन कुंड पर किन्नरों ने किया त्रिपिंडी श्राद्ध

Thu, 17 Sep 2020 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 01:12 AM IST
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pitr paksh
वाराणसी। गया तीर्थ की मान्यता वाले पिशाचमोचन कुंड पर किन्नर गुरुओं की आत्मा की शांति के लिए किन्नरों ने त्रिपिंडी श्राद्ध किया। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ पहुंचे किन्नरों के दल ने अपने गुरुओं के साथ ही ज्ञात-अज्ञात पितरों को तर्पण किया।
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बुधवार को किन्नरों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति व मोक्ष की प्राप्ति के लिए विधि-विधान से तर्पण किया। किन्नर गुरु एकता जोशी की आत्मा की शांति के लिए भी विशेष पूजा की गई। मोक्षदायिनी काशी में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी देशभर के किन्नरों ने कोरोना काल के बीच किन्नर अखाड़ा के नेतृत्व में पितरों को नमन किया। इस दौरान कौशल्या नंदन गिरि, देवी पवित्रा, कामिनी माई सहित कई गुरु मौजूद रहे। महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि जितनी भी आत्माएं हमारा साथ छोड़कर परमधाम चली गईं हैं, उन सभी के लिए आज त्रिपिंडी श्राद्ध किया गया। 2016 से जब मैंने किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर का पद ग्रहण किया तो मुझे लगा कि धर्म के अनुसार श्राद्ध करना चाहिए।
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शिखंडी ने शुरू की थी परंपरा
महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पहली बार महाभारत काल में शिखंडी ने पिंडदान कर यह परंपरा शुरू की थी। किन्नर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर पिछले चार साल से परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, अश्विन माह के कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक पितरों के श्राद्ध की परंपरा है। उन्होंने कहा कि पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज और सरल मार्ग है।
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प्रभु राम के दरवाजे सभी के लिए खुले, नहीं होना चाहिए विवाद : महामंडलेश्वर
वाराणसी। किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का समर्थन किया है। बुधवार को त्रिपिंडी श्राद्ध करने काशी पहुंची महामंडलेश्वर ने कहा कि रामलला की जन्मभूमि और रामलला की चौखट कोई भी जा सकता है। उसे रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। अयोध्या में उद्धव को रोके जाने के संतों के बयान पर उन्होंने कहा- मुझे लगता है किसी भी व्यक्ति को, जो सत्य सनातन धर्म के हैं उन्हें रामलला के दरबार में जाने से कोई नहीं रोक सकता है। जो लोग रोकने की बात कर रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं। कंगना और उद्धव ठाकरे के बीच चल रहे टकराव पर कहा कि यह राजनीतिक प्रश्न है, वह इसमें नहीं पड़ना चाहतीं। उन्होंने कहा कि मैं बस यही कहना चाहती हूं कि उद्धव ठाकरे हों या लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, या कोई भी किन्नर, दलित, सवर्ण, प्रभु राम के दरवाजे सबके लिए बराबर हैं और इस पर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए।
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