ज्ञानवापी प्रकरण: सर्वे के विवाद के बीच अलग-अलग दावे, अयोध्या मामले के बाद बंद हो गया दर्शन-पूजन
काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के विवाद के बीच हर कोई अपने अलग-अलग दावे कर रहा है।
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ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के विवाद के बीच हर कोई अपने अलग-अलग दावे कर रहा है। किसी का कहना है कि 1991 के पहले शृंगार गौरी के दर्शन पूजन को लेकर कोई विवाद नहीं था। ज्ञानवापी परिसर में 1991 तक आने-जाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी। काशी आने वाला हर श्रद्धालु बड़े आराम से शृंगार गौरी का दर्शन-पूजन कर सकता था।
अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को हुए विवाद के बाद जब मस्जिद की बैरिकेडिंग हो गई और सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया तबसे श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिल रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर में गंगा जमुनी तहजीब नजर आती थी।
बेरोकटोक आते जाते थे ज्ञानवापी परिसर में
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि हम लोगों को बचपन ही यहीं बीता है। मस्जिद के प्रवेश द्वार के पास ही एक कोयले की दुकान हुआ करती थी। बगल वाले रास्ते से हम लोग अक्सर अंदर आया जाया करते थे। पंचक्रोशी परिक्रमा के दौरान वहीं ज्ञानवापी परिसर में ही तीर्थयात्री यात्रा का संकल्प लेकर यात्रा आरंभ करते थे।
हालांकि उस दौरान भीड़-भाड़ बहुत कम हुआ करती थी। मस्जिद के एक कोने में हेड कांस्टेबल नियमित ड्यूटी देता था। ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार में शृंगार गौरी का दर्शन होता था। 1992 में अयोध्या विवाद के बाद से मस्जिद की बैरिकेडिंग हो गई और आम लोगों का प्रवेश ही बंद हो गया।
ज्ञानवापी परिसर में नजर आती थी गंगा जमुनी तहजीब
शहर ए मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने बताया कि 1991 के पहले ज्ञानवापी परिसर में गंगा जमुनी तहजीब नजर आती थी। किसी भी तरह की रोक टोक नहीं थी। ढुंढिराज गली में तो शहर भर के मुसलमान ईद की खरीददारी करने आते थे। 1992 के बाद से हालात बदले और पाबंदियां लागू हो गईं। मंदिर-मस्जिद के आसपास हिंदुओं के ही मकान हुआ करते थे लेकिन उनसे कभी किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। आज भी लोग दूसरी जगह बस गए हैं लेकिन रिश्ते वैसे ही हैं। महंत परिवार के साथ जो रिश्ता शुरू से था, वह आज भी कायम हैं। इस इलाके के लोगों के बीच आपस में कोई विवाद नहीं हुआ।
1991 की पूर्व स्थिति बहाल करने की है मांग
महिलाओं के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने बताया कि राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, मंजू व्यास, सीता साहू और रेखा पाठक ने 18 अगस्त 2021 को संयुक्त रूप से सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में याचिका दायर की थी।
इसमें मांग की गई थी कि काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी और विग्रहों को 1991 की पूर्व स्थिति की तरह नियमित दर्शन-पूजन के लिए सौंपा जाए। आदि विश्वेश्वर परिवार के विग्रहों की यथास्थिति रखी जाए। इससे आम श्रद्धालु शृंगार गौरी का नियमित दर्शन कर सकेंगे।