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गजब! पांच साल से काट रहा था ईंट-भट्ठों का फर्जी रॉयल्टी चालान, लगाया करोड़ों का चूना
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:42 AM IST
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आरोपी को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस, ब्रिक एसोसिएशन और बैंकों की फर्जी मुहरें बरामद
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के आजमगढ़ में ईंट-भट्ठों के रॉयल्टी चालान में बहुत बड़े फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। सोमवार को एक दलाल के पकड़े जाने के बाद इसका खुलासा हुआ है। उसकी निशानदेही पर ब्रिक एसोसिएशन के कार्यालय पर की गई छापेमारी में बड़ी संख्या में मुहरें, ईंट भट्ठों के नाम पर बनाए गए कूटरचित चालान बरामद हुए।
खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी की तहरीर पर देर रात कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही थी। आजमगढ़ कलक्ट्रेट स्थित खनन अनुभाग के पास सोमवार को कुछ लोग संदिग्ध हालात में खड़े दिखाई दिए। खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी ने इन्हें बुलवाया तो ये भागने लगे।
इस पर एक व्यक्ति को दौड़ा कर पकड़ लिया गया। पकड़े गए रमेश चंद्र विश्वकर्मा निवासी बेलनाडीह सिधारी ने पूछताछ में बताया कि वह ईट भट्ठा मालिकों के लिए कूटरचित चालान बनाता है। हर चालान के लिए उसे 500 रुपये मिलते हैं। उसकी निशानदेही पर नेहरू हाल स्थित ब्रिक एसोसिएशन के कार्यालय पर छापेमारी की गई, जहां से सात कूटरचित चालान, ब्रिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कई मुहरें बरामद हुई हैं।
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मामले की जानकारी के बाद डीएम ने उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी की तहरीर पर देर रात कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही थी।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि कूटरचित चालान के जरिए रायल्टी के करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की बातें सामने आ रही है। मैने खनन अधिकारी को पकड़े गए व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्देश दिया है। जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
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खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी की तहरीर पर देर रात कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही थी। आजमगढ़ कलक्ट्रेट स्थित खनन अनुभाग के पास सोमवार को कुछ लोग संदिग्ध हालात में खड़े दिखाई दिए। खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी ने इन्हें बुलवाया तो ये भागने लगे।
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इस पर एक व्यक्ति को दौड़ा कर पकड़ लिया गया। पकड़े गए रमेश चंद्र विश्वकर्मा निवासी बेलनाडीह सिधारी ने पूछताछ में बताया कि वह ईट भट्ठा मालिकों के लिए कूटरचित चालान बनाता है। हर चालान के लिए उसे 500 रुपये मिलते हैं। उसकी निशानदेही पर नेहरू हाल स्थित ब्रिक एसोसिएशन के कार्यालय पर छापेमारी की गई, जहां से सात कूटरचित चालान, ब्रिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कई मुहरें बरामद हुई हैं।
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मामले की जानकारी के बाद डीएम ने उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। खनन अधिकारी सुधांशु रंजन द्विवेदी की तहरीर पर देर रात कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही थी।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि कूटरचित चालान के जरिए रायल्टी के करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की बातें सामने आ रही है। मैने खनन अधिकारी को पकड़े गए व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्देश दिया है। जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
जांच के घेरे में ब्रिक एसोसिएशन
फर्जी रॉयल्टी चालान
- फोटो : अमर उजाला
मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की निशानदेही पर नेहरू हाल स्थित ब्रिक एसोसिएशन के कार्यालय से फर्जी चालान बरामद होने से एसोसिएशन के पदाधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं। आरोपी रमेश चंद्र विश्वकर्मा के अनुसार उसे इसी काम के लिए रखा गया था।
प्रति चालान उसे 500 रुपये दिए जाते थे। ब्रिक किल्न एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाकांत सिंह ने कहा कि चार-पांच साल पहले आदेश आया था कि भट्ठे स्वयं ही रायल्टी जमा कर इसका चालान जमा करा दें। उसी के अनुसार काम किया जा रहा था।
मैं इस समय लखनऊ में हूं, पता चला है कि बाबू को उठाया गया है। एसोसिएशन की ओर से कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है। जिनती रायल्टी होती है उतना ही चालान जमा किया गया है। आरोप निराधार हैं।
डीएम कार्यालय से पास होने पर जमा होता है चालान
आजमगढ़ में संचालित ईंट-भट्ठों की रायल्टी कोषागार में जमा करने के लिए लेखा शीर्षक की पुष्टि के बाद चालान आदेश को जिलाधिकारी कार्यालय से पास किया जाता है। इसके बारे में सभी ईंट भट्ठा मालिकों को निर्देश भी जारी किया जा चुका है।
बावजूद इसके दलाल फर्जी एवं कूट रचित प्रपत्रों से सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा था। फर्जी एवं कूटरचित चालानों के आधार पर ब्रिक एसोसिएशन के नाम पर जिलाधिकारी के अधिकारों का स्वयं प्रयोग कर दुरुपयोग किया जा रहा था।
प्रति चालान उसे 500 रुपये दिए जाते थे। ब्रिक किल्न एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाकांत सिंह ने कहा कि चार-पांच साल पहले आदेश आया था कि भट्ठे स्वयं ही रायल्टी जमा कर इसका चालान जमा करा दें। उसी के अनुसार काम किया जा रहा था।
मैं इस समय लखनऊ में हूं, पता चला है कि बाबू को उठाया गया है। एसोसिएशन की ओर से कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है। जिनती रायल्टी होती है उतना ही चालान जमा किया गया है। आरोप निराधार हैं।
डीएम कार्यालय से पास होने पर जमा होता है चालान
आजमगढ़ में संचालित ईंट-भट्ठों की रायल्टी कोषागार में जमा करने के लिए लेखा शीर्षक की पुष्टि के बाद चालान आदेश को जिलाधिकारी कार्यालय से पास किया जाता है। इसके बारे में सभी ईंट भट्ठा मालिकों को निर्देश भी जारी किया जा चुका है।
बावजूद इसके दलाल फर्जी एवं कूट रचित प्रपत्रों से सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा था। फर्जी एवं कूटरचित चालानों के आधार पर ब्रिक एसोसिएशन के नाम पर जिलाधिकारी के अधिकारों का स्वयं प्रयोग कर दुरुपयोग किया जा रहा था।