वाराणसी में हादसे से सबक: गंगा से 200 मीटर तक भवनों की मरम्मत के लिए नहीं लेनी होगी अनुमति, जारी हुई गाइडलाइन
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास जर्जर मकान ढहने से हादसा हुआ तो जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया। यही वजह है कि मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने गंगा किनारे मकान निर्माण और पुनर्निर्माण के संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी।
विस्तार
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पास दो जर्जर मकान गिरने के बाद मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने मकान निर्माण और पुनर्निर्माण के संबंध में गाइडलाइन जारी की है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं ताकि दलालों से लोग बच सकें।
बताया कि गंगा नदी से 200 मीटर के अंतर्गत दीवारों पर सीमेंट प्लास्टर कराना या आंशिक मरम्मत कराने के लिए किसी भी विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं है। इसी तरह फर्श का निर्माण, रंगाई-पुताई, सेप्टिक टैंक व पिट का निर्माण और हैंडपंप लगवाने के लिए किसी भी अनुमति की जरूरत नहीं है। नालियों या अन्य उपकरण के नवीनीकरण और मरम्मत कार्य के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। इसे कभी भी करा सकते हैं। सौर ऊर्जा के लिए छत पर आवश्यक संरचनाओं का निर्माण कराया जा सकता है।
इनके लिए लेनी होगी प्राधिकरण की अनुमति
भवन व दीवारों का पुनर्निर्माण और छत, बालकनी और बरामदे में छज्जे का निर्माण। इसके अलावा मकान के अंदर आंतरिक परिवर्तन नहीं करा सकते हैं। भवन के बाहरी स्वरूप में बदलाव की अनुमति नहीं होगी। भवन के उपयोग में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। परिवर्तन करने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण की वेवसाइट और हेल्प डेस्क के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
आवेदक को भवन मरम्मत या पुनर्निर्माण के आवेदन के साथ मौजूदा भवन का मानचित्र भी देना होगा। साथ ही स्वामित्व संबंधी अभिलेख, भवन की लोकेशन, र्तमान स्थिति के सभी उपलब्ध दिशाओं से फोटाग्राफ, नगर निगम द्वारा जारी शपथ-पत्र जमा किए जाएंगे। आवेदन मिलने के 15 दिनों के अंदर उसका निस्तारण कराया जाएगा और जोनल अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे।
जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर
कमिश्नर ने कहा कि गंगा नदी तट से 200 मीटर के अंतर्गत भवनों के मरम्मत/पुनर्निर्माण हेतु आवेदन संबंधी प्रक्रिया/जानकारी हेतु और किसी भी प्रकार की परेशानी व दलाल की शिकायत के लिए प्राधिकरण के हेल्प लाइन नम्बर-0524-2283305 और व्हॉट्सएप नं-7518102822 पर संपर्क किया जा सकता है।