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वाराणसीः वर्चुअल मनेगी संत कबीर की जयंती, कई देशों से ऑनलाइन जुड़ेंगे लोग

Fri, 05 Jun 2020 01:52 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Fri, 05 Jun 2020 01:52 PM IST
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People will join online from many countries on sant Kabirs birth anniversary
संत कबीर। - फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी में श्रम साधक संत कबीर की जयंती सादगी पूर्वक शुक्रवार को मनाई जाएगी। कोरोना महामारी के कारण दूर-दराज से श्रद्धालुओं का आगमन नहीं होगा स्थानीय लोग ही संत को नमन करेंगे। जयंती के अवसर पर कई देशों से लोग ऑनलाइन जुड़ेंगे। संत मूलगादी मठ के महंत विवेक दास ने कहा कि जहां दया तहा धर्म हैं, जहां लोभ वहां पाप। जहां क्रोध तहा काल है, जहां क्षमा वहां आप।
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सभी संतों और महापुरुषों ने दया और क्षमा को धर्म का मूल माना है। लोभ, मोह, काम, क्रोध, अंहकार आदि वे दुर्गुण हैं जो मनुष्य को धर्म और इंसानियत से दूर ले जाते हैं। जिस समय देश में धार्मिक कर्मकांड और पाखंड का बोलबाला था ऐसे समय में संत साहेब ने हिंदू और मुस्लिम दोनों के पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया।
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ज्येष्ठï मास की पूर्णिमा को संत कबीर साहब की जयंती मनाई जाती है। इस बार लॉकडाउन और महामारी के कारण कोई आयोजन नहीं किया जा रहा है। सभी आयोजन ऑनलाइन ही होंगे। इनसेट आज भी प्रासंगिक हैं कबीर लहरतारा स्थित मठ के प्रबंधक गोविंद दास शास्त्री का कहना है कि कबीर आज भी प्रासंगिक लगते हैं कबीर ने मध्यकाल में जो बाते कही हैं आज 21वीं सदी में भी वे ऐसी लगती हैं जैसे उन्होंने आज के बारे में ही लिखी हों।
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कबीर एक मानवता के पक्षधर हैं वे जीव हत्या का विरोध करते हैं। कबीर धर्म के विरोध में नहीं बल्कि धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड के विरोध में खड़े हैं। जिस काशी को मोक्षदायिनी कहा जाता है और जहां लोग अंतिम समय में अपने प्राण त्यागना पसंद करते हैं कबीर ने वहां प्राण त्यागना भी पसंद नहीं किया और वहां से कुछ दूर मगहर नामक स्थान पर चले गये वहीं सन 1518 में उनका देहावसान हुआ। उन्होंने कहा था कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हंसे हम रोये। ऐसी करनी कर चलो, हम हंसे जग रोये।।
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