वाराणसी: सीएए-एनआरसी का ऐसा भ्रम, ग्रामीणों ने आर्थिक जनगणना टीम को बनाया बंधक
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीए) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) को लेकर देश भर में फैले भ्रम का असर आर्थिक जनगणना करने वालों को झेलना पड़ रहा है। गुरुवार को जक्खिनी के ढढोरपुर पहुंची जनगणना टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। सर्वे टीम के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
आशुतोष सिंह, कोमल, ध्यानी शंकर, दीपक ने बताया कि बस्ती में लोगों ने दुर्व्यवहार करने के बाद बंधक बनाकर बैठा लिया। इसकी जानकारी मिलने पर आराजी लाइन के सुपरवाइजर नीरज पांडेय मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को आर्थिक सर्वे के उद्देश्य को बताया। इसके बाद टीम को जाने दिया गया।
पिछले महीने ही पूरे देश के साथ वाराणसी में भी सातवीं आर्थिक जनगणना शुरू हुई है। सांख्यिकी निदेशालय के स्तर से कराई जा रही यह जनगणना इस बार कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से हो रही है। इसके लिए मॉनीटरिंग जिला स्तरीय समन्वय समिति के जिम्मे है। इस बार यह जनगणना पूरी तरह पेपरलेस यानी मोबाइल एप पर हो रही है।
शहर से लेकर गांव-कस्बों में जाकर गणनाकर्मी लोगों से सवाल-जवाब के आधार पर आर्थिक स्थिति की गणना कर रहे हैं। यानी एक तरह से घर-परिवार व व्यवसाय की डिजिटल आर्थिक कुंडली तैयार कर रहे हैं। सभी ब्लॉक में हो रही जनगणना को अगले छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विरोध करने वाले टीम से कहने लगे कि हम कागज नहीं दिखाएंगे।
इस पर टीम ने कहा कि उन्हें कागज़ नहीं देखना है। सिर्फ मुखिया नाम और परिवार की कमाई का जरिया चाहिए। टीम ने समझाने की कोशिश की। बताया कि यह आर्थिक गणना हो रही है। इसके बावजूद ग्रामीण नहीं माने और टीम के सदस्यों से दुर्व्यवहार करने के बाद सभी को बैठा लिया।