फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   People aged between 8 to 17 years are suffering from epilepsy, cystic circus is the reason

Varanasi News: मिर्गी की चपेट में आ रहे आठ से 17 साल की उम्र वाले, सिस्टी सर्कस है वजह

Fri, 17 Nov 2023 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Nov 2023 12:56 AM IST
विज्ञापन
People aged between 8 to 17 years are suffering from epilepsy, cystic circus is the reason
वाराणसी। आम तौर पर मिर्गी की चपेट में 30 साल से अधिक आयु वाले आते हैं लेकिन अब बच्चे भी इससे ग्रसित हो रहे हैं। कुछ बच्चों में तो इसकी वजह आनुवांशिक होती है लेकिन ज्यादातर बच्चों में इस बीमारी की वजह उनके दिमाग में पाए जाने वाले कीड़े हैं। आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में वाराणसी समेत आसपास के जिलो के 1200 से अधिक बच्चों (आठ से 17 साल) में मिर्गी के लक्षण मिले हैं। डॉक्टर इस उम्र में होने वाली बीमारी पर अध्ययन कर रहे हैं।
विज्ञापन

आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्र ने बताया कि मिर्गी ऐसी बीमारी है, जिसका असर सीधे तौर पर व्यक्ति के दिलोदिमाग पर पड़ता है। धीरे धीरे उसके सोचने-समझने की क्षमता कम होती जाती है। मिर्गी का समय पर इलाज हो तो उससे निजात मिल सकती है। लेकिन, शहरी और ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास हावी है। इससे बीमारी कम होने के बजाय बढ़ जाती है। यही नहीं यह बीमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम करती है। वरुणा-असि के संगम के किनारे गांवों में हरी सब्जियों में मिर्गी को बढ़ावा देने वाले कीड़े अधिक पाए जाते हैं।
विज्ञापन

---
पूर्वांचल में हैं सबसे अधिक मरीज
प्रो. विजयनाथ मिश्र के मुताबिक पूर्वांचल में मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया सहित आसपास के इलाके में इसका प्रकोप अधिक है। इसमें संक्रमण, टीबी के मरीजों की संख्या अधिक होने के साथ ही जल, वायु प्रदूषण भी मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी को बढ़ावा देने के लिए मुख्य वजह है। ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक मिर्गी होने की वजह सिस्टी सर्कस (दिमाग में घुसने वाला एक प्रकार का कीड़ा) का दिमाग में प्रवेश करना है। ये कीड़ा बंद गोभी, पालक, मूली, गाजर सहित हरी सब्जियों में पाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
केस-1
राजघाट निवासी 11 साल का बच्चा बृहस्पतिवार को न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में अपनी मां के साथ आया। मां ने बताया कि बेटे को झटके आ रहे हैं। प्रथम दृष्टया बच्चे की जांच के दौरान पता चला कि उसके दिमाग में सिस्टी सर्कस यानी हरी सब्जियों में मिलने वाला कीड़ा घुस गया था।
केस-2
नक्खीघाट निवासी 17 वर्षीय परवेज को मिर्गी की समस्या थी। जांच में पता चला कि उसके दिमाग में 90 से 100 कीड़े हैं। परिजन घबरा गए। मरीज को स्ट्राॅयड देने के साथ ही मिर्गी की दवाइयां दी जा रही है। इससे उसका असर धीर-धीरे कम होता जाएगा।

----
गोद में रखते हैं बंदर का बच्चा, चिता की आग पर सेंकते हैं रोटी
बीएचयू के प्रो. विजयनाथ मिश्र कहते हैं कि मिर्गी का इलाज संभव है। इस बारे में लोगों को अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाने, कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी लोगों में इस बीमारी को लेकर अंधविश्वास बहुत है। भदोही के औराई इलाके में मिर्गी के मरीज के गोद में बंदर का बच्चा डालने का अंधविश्वास है। लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे बंदर का बच्चा बड़ा होगा मिर्गी खत्म होती जाएगी। वाराणसी में जूता सुंघाने के साथ ही मणिकर्णिका घाट पर हर शुक्रवार-शनिवार को जलती चिता की आग पर रोटी सेंककर खिलाने, गंगा पार फल-सब्जियों की बलि देने का अंधविश्वास भी है। इसको दूर करने के लिए घाटों पर अभियान चलाने के साथ ही ओपीडी में आने वालों को भी जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed