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मुकदमे से डराकर धर्म की बात करने से रोक पाना संभव नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 08 Oct 2015 02:35 AM IST
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अन्याय प्रतिकार यात्रा के दौरान बवाल में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को कहा कि पुलिस उनको गिरफ्तार करे या नहीं, लेकिन वह जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी नहीं लगाएंगे। मुकदमे से डराकर उन्हें धर्म और परंपरा की रक्षा की बात करने से रोका नहीं जा सकता। किसी राजनीतिक दल में जाने या पार्टी बनाने की संभावना से उन्होंने इंकार किया। कहा कि पार्टी बनाना तो दूर, मेरी ओर से ऐसा सपने में सोचा भी नहीं जा सकता।
केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोहराया कि जानबूझ कर उनकी यात्रा को हिंसक रूप देने की कोशिश की गई लेकिन उनके साथ के लोग इतने संयमित और नियंत्रित थे कि आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाने के साथ ही फायरिंग करने पर भी सड़क पर चुुपचाप खड़े रहे। बवाल के बाद पुलिस ने संतों और भक्तों को दशाश्वमेध जाने का रास्ता दिया था, यह किसी से छिपा नहीं है। जमानत अर्जी कब कोर्ट में पेश की जाएगी, इस सवाल पर उनका कहना था कि मैं
अपराधी नहीं हूं। निर्दोष लोगों पर लाठी चलाने, गाड़ियों को फूंकने और पत्थर फेंके जाने की घटना का मुझे अफसोस है, लेकिन इसमें जो लोग शामिल थे, उन्हें पुलिस को सामने लाना चाहिए। बवाल का राजनीतिक लाभ लेने के क्या वह पार्टी बनाने जा रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं सन्यासी हूं और मेरी परंपरा में यह सब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि गंगा की सेवा मैं करता रहा हूं। गंगा की सेवा से बड़ा मेरे लिए कोई दल नहीं हो सकता। इसे लेकर कुछ लोग दुष्प्रचार शुरू कर रहे हैं।
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केदार घाट स्थित श्रीविद्यामठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोहराया कि जानबूझ कर उनकी यात्रा को हिंसक रूप देने की कोशिश की गई लेकिन उनके साथ के लोग इतने संयमित और नियंत्रित थे कि आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाने के साथ ही फायरिंग करने पर भी सड़क पर चुुपचाप खड़े रहे। बवाल के बाद पुलिस ने संतों और भक्तों को दशाश्वमेध जाने का रास्ता दिया था, यह किसी से छिपा नहीं है। जमानत अर्जी कब कोर्ट में पेश की जाएगी, इस सवाल पर उनका कहना था कि मैं
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अपराधी नहीं हूं। निर्दोष लोगों पर लाठी चलाने, गाड़ियों को फूंकने और पत्थर फेंके जाने की घटना का मुझे अफसोस है, लेकिन इसमें जो लोग शामिल थे, उन्हें पुलिस को सामने लाना चाहिए। बवाल का राजनीतिक लाभ लेने के क्या वह पार्टी बनाने जा रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं सन्यासी हूं और मेरी परंपरा में यह सब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि गंगा की सेवा मैं करता रहा हूं। गंगा की सेवा से बड़ा मेरे लिए कोई दल नहीं हो सकता। इसे लेकर कुछ लोग दुष्प्रचार शुरू कर रहे हैं।
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