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कुंड पाटकर बना दिए मकान
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 12 Jun 2016 02:18 AM IST
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भगवान शिव की बहन कौड़िया माता के मंदिर में रोज बड़ी संख्या में जुटते हैं आस्थावान
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काशी के गोवाबाई कुंड में स्नान करके कौड़िया माता का दर्शन करने से दरिद्रता दूर हो जाती है। माता के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से भक्त यहां हाजिरी लगाने आते हैं लेकिन गोवाबाई का कुंड अब गुजरे जमाने की चीज हो गया है। कुंड को पाट कर मकान बना लिए गए हैं।
बाकी बचे हिस्से पर भी निर्माण कराने के लिए कुछ लोग गिद्ध दृष्टि लगाए बैठे हैं। ऐसे हालात में प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो इस जलतीर्थ का बचा हिस्सा भी हाथ से निकल जाएगा।कबीर नगर स्थित गोवाबाई कुंड काशी के प्रधान तीर्थों में से है। इस कुंड परिसर में काशी खंडोक्त कौड़िया माता का धाम है, जिन्हें लोग भगवान शिव की बहन के रूप में पूजते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि गोवाबाई कुंड में स्नान कर कोटेश्वर महादेव और कौड़िया माता के दर्शन से दरिद्रता दूर हो जाती है। इस मुहल्ले के बनवारी लाल बताते हैं कि कभी शहर के दक्षिणी इलाके का बारिश का पानी इसी कुंड में जमा होता था। इस कुंड से होकर ही जल दुर्गाकुंड में जाता था। दुर्गाकुंड प्राचीन काल से ही गोवाबाई कुंड का सहायक जलस्रोत रहा है।
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इस कुंड से होकर वनकटी हनुमान होते हुए जल गंगा में चला जाता था लेकिन अब गोवाबाई कुंड के स्थान पर एक पार्कनुमा जगह नजर आने लगी है। आसपास कब्जा हो गया है। कौड़िया माता के दर्शन के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश समेत अन्य कई राज्यों से सैकड़ों भक्त प्रतिदिन आते हैं। कौड़िया माता को फूलमाला नहीं, बल्कि सिर्फ कौड़ी पसंद है।
इसलिए यहां सिर्फ कौड़ी की बिक्री होती है। कौड़ी से ही अब स्नान भी होता है और दान भी। इलाके के लोगों का कहना है कि कुंड के बचे हुए भाग से अतिक्रमण हटाकर इसकी ड्रेजिंग कराई जानी चाहिए, ताकि कुंड को अपने मूल स्वरूप में लाया जा सके।
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बाकी बचे हिस्से पर भी निर्माण कराने के लिए कुछ लोग गिद्ध दृष्टि लगाए बैठे हैं। ऐसे हालात में प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो इस जलतीर्थ का बचा हिस्सा भी हाथ से निकल जाएगा।कबीर नगर स्थित गोवाबाई कुंड काशी के प्रधान तीर्थों में से है। इस कुंड परिसर में काशी खंडोक्त कौड़िया माता का धाम है, जिन्हें लोग भगवान शिव की बहन के रूप में पूजते हैं।
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पौराणिक मान्यता है कि गोवाबाई कुंड में स्नान कर कोटेश्वर महादेव और कौड़िया माता के दर्शन से दरिद्रता दूर हो जाती है। इस मुहल्ले के बनवारी लाल बताते हैं कि कभी शहर के दक्षिणी इलाके का बारिश का पानी इसी कुंड में जमा होता था। इस कुंड से होकर ही जल दुर्गाकुंड में जाता था। दुर्गाकुंड प्राचीन काल से ही गोवाबाई कुंड का सहायक जलस्रोत रहा है।
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इस कुंड से होकर वनकटी हनुमान होते हुए जल गंगा में चला जाता था लेकिन अब गोवाबाई कुंड के स्थान पर एक पार्कनुमा जगह नजर आने लगी है। आसपास कब्जा हो गया है। कौड़िया माता के दर्शन के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश समेत अन्य कई राज्यों से सैकड़ों भक्त प्रतिदिन आते हैं। कौड़िया माता को फूलमाला नहीं, बल्कि सिर्फ कौड़ी पसंद है।
इसलिए यहां सिर्फ कौड़ी की बिक्री होती है। कौड़ी से ही अब स्नान भी होता है और दान भी। इलाके के लोगों का कहना है कि कुंड के बचे हुए भाग से अतिक्रमण हटाकर इसकी ड्रेजिंग कराई जानी चाहिए, ताकि कुंड को अपने मूल स्वरूप में लाया जा सके।