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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Patent named 'Child's Knowledge-Guru's Identity'

‘बच्चे का ज्ञान-गुरु जी की पहचान’ हुआ पेटेंट

Tue, 09 Mar 2021 10:31 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Mar 2021 10:31 PM IST
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Patent named 'Child's Knowledge-Guru's Identity'
ओ पी त्रिपाठी। तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी,मऊ। - फोटो : MAU
मऊ। मिशन पहचान के तहत बेसिक शिक्षा परिषद मऊ को बड़ी सफलता मिली है। मिशन पहचान के तहत तत्कालीन बीएसए ओपी त्रिपाठी की ओर से पिछले साल पंजीकृत कराए गए ‘बच्चे का ज्ञान-गुरु जी की पहचान’ शीर्षक के लोगो (चिह्न) को सांख्यिकी एवं औद्योगिक मंत्रालय ने बेसिक शिक्षा परिषद के नाम बौद्धिक संपदा घोषित किया है। इसका एकाधिकार भी उनको दिया है
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बीते वर्ष तत्कालीन बीएसए ओपी त्रिपाठी ने मिशन पहचान के तहत ‘बच्चे का ज्ञान-गुरु जी की पहचान’ शीर्षक का लोगो (चिह्न) दो अगस्त 2020 में रजिस्टर्ड कराया। 14 सितंबर 2020 को इसकी समीक्षा हुई और केंद्र सरकार के अधीन सांख्यिकी एवं औद्योगिक ने दो अगस्त 2030 तक मिशन पहचान के लोगो को बौद्धिक संपदा घोषित किया। मिशन पहचान के तहत शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन, ऑफलाइन शिक्षा की सुविधा, ऑडियो, वीडियो के माध्यम से पाठ्यक्रम की शिक्षा व्यवस्था का कॉपीराइट अधिकार मिशन पहचान के पास रहेगा। इस उपलब्धि पर जिले के प्राथमिक शिक्षकों में हर्ष है। मिशन पहचान से जुड़े शिक्षकों ने एक-दूसरे को बधाई दी। वर्तमान में लखीमपुर खीरी में डीआईओएस पद पर तैनात ओपी त्रिपाठी ने इस उपलब्धि का श्रेय मऊ के प्राथमिक शिक्षकों को दिया है। मिशन पहचान को भारत सरकार की ओर से बौद्धिक संपदा घोषित करने पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष रूपेश कुमार पांडेय ने भारत सरकार की सराहना की है।
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उल्लेखनीय है कि तत्कालीन बीएसए ने बच्चों के ज्ञान से शिक्षकों की पहचान का एक कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत शिक्षकों ने अपनी पहचान बनाए रखने के लिए बच्चों को बेहतर ढंग से शिक्षित करने का कार्य किया था। ब्लाक स्तर से लेकर जिले स्तर तक जिले में परीक्षा कराई गई थी।
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क्या है योजना
इस योजना के तहत कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में छात्रों का हर माह टेस्ट रूपी परीक्षा होती है, इसमें सफल छात्रों को ब्लाक स्तर पर होने वाली परीक्षा में शामिल किया जाता है। ब्लाक स्तर पर सफल बच्चे जिला स्तर की परीक्षा में शामिल होते हैं।
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