Varanasi: श्रावण पूर्णिमा से पहले बाबा की पंचबदन प्रतिमा का हुआ शृंगार, गूंजा झूला धीरे से झुलाऊं महादेव...
श्रावण पूर्णिमा से पहले बाबा विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा का तिरंगा शृंगार हुआ। साथ ही बाबा को कजरी सुनाई गई। इसके साथ ही सावन में बाबा श्री काशी विश्वनाथ के झूलनोत्सव की परंपराएं भी शुरू हो गईं।
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झूला धीरे से झुलाऊं महादेव, गंगा किनारे पड़ा हिंडोल... की धुन महंत आवास पर गूंजी तो भक्तों ने भी सुर से सुर मिलाया। इसके साथ ही सावन में बाबा श्री काशी विश्वनाथ के झूलनोत्सव की परंपराएं भी शुरू हो गईं। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पर कजरी से पहले बाबा की पंचबदन प्रतिमा का पारंपरिक रूप से तिरंगा शृंगार किया गया।
कलाकारों ने डमरूवाले औघड़दानी..., झिर झिर बरसे सावन रस बूंदिया..., कहनवा मानो ओ गौरा रानी... कजरी बाबा के चरणों में अर्पित की। इस दौरान मिर्जापुर के ध्रुव मिश्रा, संगीता पांडेय, अथर्व मिश्र, करूणा सिंह, सत्य प्रकाश पटेल, सूरज प्रसाद ने गायन किया।
श्रावण पूर्णिमा (19 अगस्त) पर मंदिर की स्थापना काल से चली आ रही लोक परंपरा के अंतर्गत बाबा को मां पार्वती और भगवान गणेश के साथ झूले पर विराजमान कराया जाएगा। काशी विश्वनाथ मंदिर में झूलनोत्सव शाम 5.30 बजे के बाद शुरू होगा। उससे पूर्व टेढ़ीनीम स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा की पूजा होगी।
पंचबदन प्रतिमा को सिंहासन पर विराजमान कराकर साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए विश्वनाथ मंदिर तक लाया जाएगा। इस दौरान बाबा का विग्रह श्वेत वस्त्र से ढंका रहेगा। मंदिर पहुंचने के बाद बाबा की पंचबदन प्रतिमा को मां पार्वती और गणेश के साथ पारंपरिक झूले पर विराजमान कराया जाएगा।
दीक्षित मंत्र से पूजन के बाद सर्वप्रथम गोलोकवासी पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के पुत्र वाचस्पति तिवारी बाबा को झूला झूलाएंगे। इसके बाद सप्तर्षि आरती कराने वाले महंत परिवार के सदस्य बाबा का झूला झूलाएंगे। बाबा के झूले की डोर थामने की आज्ञा सिर्फ उन्हीं भक्तों को होगी जो बिना सिला वस्त्र धारण किए रहेंगे।