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वाराणसी: सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही योग, गंगा घाट पर स्नान करने वालों की भक्तों की कमी, महिलाएं रखती हैं व्रत

Mon, 14 Dec 2020 12:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 14 Dec 2020 12:02 PM IST
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Panchagrahi Yoga on Somavati Amavasya shortage of devotees taking bath at Ganges Ghat women keep fast in Varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

सोमवती अमावस्या के दिन विवाहित महिलाओं के लिए पतियों की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत का विधान है। साथ ही इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए व्रत पूजन से आरोग्यता, समृद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। जिनके विवाह में विलंब हो रहा है या विवाह में अड़चन उत्पन्न हो रही है, उन्हें इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है।

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सोमवार को अमावस्या पड़ने के कारण इस दिन को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। कोविड 19 के चलते काशी के गंगा घाटों पर स्नान, दान करने वालों की भीड़ में काफी कमी देखने को मिल रही है।
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इसी दिन 14 दिसंबर को वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण भी है। इसके बाद सूर्य अपनी राशि बदलेंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहों के इस संयोग में किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ का अनंत फल मिलेगा।

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काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्रऔर केतु रहेंगे। पंचग्रही योग के कारण दिसंबर में वृष्टि एवं जल वृद्धि का योग है। सामान्य उथल पुथल की संभावना है। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं। इस तिथि को ग्रंथों में पर्व कहा गया है। इस दिन अनुष्ठानों का भी बहुत महत्व होता है।

अगहनी अमावस्या पर तीर्थ स्नान और दान के साथ ही शंख से भगवान कृष्ण का अभिषेक और पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गई है। अश्वत्थ यानि पीपल का पेड़। इस दिन शादीशुदा महिलाओं द्वारा पीपल के पेड़ की दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा कर पेड़ के चारों ओर सूत का धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान है। पितरों की संतुष्टि के लिए पूजा और तर्पण करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि 14 दिसंबर को सूर्य ग्रहण के रूप में इस साल का आखिरी ग्रहण भी होगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से इसका प्रभाव नहीं होने से सूतक काल नहीं माना जाएगा। ये ग्रहण अफ्रीका के दक्षिणी भाग, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका क्षेत्र में प्रभावी रहेगा।

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