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Varanasi News: शौक में खाया पान मसाला, अब नहीं ले पा रहे निवाला

Fri, 03 Feb 2023 10:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Feb 2023 10:53 PM IST
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Pan masala eaten in hobby, now unable to take morsel
शौक में पान मसाला खाने वालों के लिए अब निवाला निगलना भी मुश्किल हो रहा है। किसी का मुंह नहीं खुल रहा तो किसी के मुुंह में घाव हो गया है। इस तरह की समस्या से ग्रस्त लोग बीएचयू अस्पताल के रेडियोथेरेपी विभाग के साथ ही सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में रोजाना पहुंच रहे हैं।
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कैंसर के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। बीएचयू रेडियोथेरेपी विभाग के प्रो. सुनील चौधरी का कहना है कि कैंसर पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है। आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण होगा। हर दूसरा व्यक्ति कैंसर की चपेट में आ सकता है। इस दिशा में शोध भी चल रहा है।
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30 साल से कम उम्र वालों में मुंह का कैंसर ज्यादा
प्रो. चौधरी का कहना है कि वर्तमान में करीब 60 से 70 मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। 10 से ज्यादा पीड़ित मुंह कैंसर के आ रहे हैं। इनकी उम्र भी 30 वर्ष से कम रहती है। कैंसर की मुख्य वजह पान मसाला, गुटखा व तंबाकू खाना है। ब्रेस्ट कैंसर के मामले भी बढ़े हैं। आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में होता था, लेकिन अब धारणा बदल गई है। 30 से 35 वर्ष की महिलाएं भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
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आंखों में भी कैंसर का बड़ा खतरा
बीएचयू नेत्र रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रकाश मौर्या का कहना है कि आंखों में भी कैंसर का खतरा रहता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में जहां रेटिनोब्लास्टोमा (जानलेवा कैंसर) होता है। बड़े लोगों में पलकों का कैंसर होता है। इसे बेसल सेल कैंसर बोला जाता है। नेत्र गुहा में होने वाला लैकाइयल ग्लैंड (अश्रुग्रंथि) का कैंसर भी होता है।

पिछले साल 22194 मरीजों ने कराया था इलाज
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल में पिछले साल 22,194 कैंसर पीड़ितों का इलाज हुआ था। मुख और गले कैंसर विभाग के प्रभारी डॉ. असीम मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर मरीजों में गले और मुख के कैंसर की शिकायत होती है। इसके लिए तंबाकू उत्पादों का सेवन सबसे बड़ा कारण है। आंकड़ों पर नजर डालें तो थायराइड कैंसर के 300 पीड़ितों का इलाज हुआ है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह कैंसर ज्यादा होता है।
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