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बरेली एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करते वक्त देख सकेंगे काशी की झलक, रेलवे ने किया ऐसा कमाल

Mon, 16 Dec 2019 05:14 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 16 Dec 2019 05:14 PM IST
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Painting of Ganga Ghats and temples of Varanasi in coach of Bareilly Express train
बरेली एक्सप्रेस में दिखेगी काशी की झलक। - फोटो : अमर उजाला।

काशी के गंगा घाटों, प्राचीन मंदिरों और महान विभूतियों के बारे में जानना है तो बस बरेली एक्सप्रेस पकड़ लीजिए। खास कर वातानुकूलित कोच में आरक्षण कराइए और काशी की संस्कृति व सभ्यता को सफर के दौरान करीब से महसूस कर अपनी यात्रा को सुखद बनाइए। बरेली एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट क्लास के दो कोच को उत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के यांत्रिक अभियंताओं की टीम सजा और संवार रही है।

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लगभग 16 घंटे के सफर में वातानुकूलित यात्रियों को यह कोच फाइव स्टार होटल जैसे एहसास कराएंगे। इसके लिए यात्रियों से किसी भी तरह का कोई एडिशनल चार्ज नहीं वसूल किया जाएगा। 
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गंगा घाटों व मंदिरों का दिखेगा संगम
बरेली एक्सप्रेस के यात्रियों की यात्रा सुखद बनाने की तैयारी में जुटे डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियरों ने यह स्पष्ट किया है कि दोनों कोच की इंटीरियर डिजाइन तैयार कर ली गई है। केबिन के अंदर काशी घराने के मशहूर शहनाई वादक व भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान साहब की शहनाई बजाते हुए तस्वीर होगी तो उनके बगल में पद्मविभूषण व मशहूर तबला वादक पंडित किशन महाराज भी तबला के साथ दिखेंगे।
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यही नहीं, ठुमरी, दादरा, कजरी के लब्धप्रतिष्ठ गायक व पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र की भी तराना छेड़े हुए की तस्वीर रेल यात्रियों को काफी आकर्षित करेगी। काशी के तीनों महान विभूतियों की तस्वीर के पीछे गंगा घाटों और मंदिरों का संगम भी देखने को मिलेगा।

वातानुकूलित प्रथम श्रेणी कोच की खासियत 
बरेली एक्सप्रेस के दोनों कोच की केबिन, कॉरिडोर, फर्श व सीलिंग सबको अलग-अलग रंग दिया गया है। आंखों को भाने वाले कोच के अंदर कलरफुल पर्दे, वाल पेटिंग और सीट पर बेहतरीन चादर यात्रा को आरामदायक बनाएंगे। फर्श पर मैटिंग के अलावा बाथरूम की साज-सज्जा भी यात्रियों को आकर्षित करने वाली होगी।

खरमास बाद होगा कोच का शुभारंभ
मंडल यांत्रिक अभियंता राजेश कुमार के नेतृत्व में दस इंजीनियरों सहित कर्मचारियों की टीम ने कोच पर काम करना शुरू कर दिया है। डीएमई ने संभावना व्यक्त किया है कि दोनों कोच को तैयार करने में कम से कम अभी 25 दिन लगेंगे। इस तरह से देखा जाए तो 15 जनवरी तक दोनों कोच को तैयार करने का लक्ष्य है।

वाराणसी मंडल रेलवे के मंडल यांत्रिक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि उन यात्रियों के लिए यह वातानुकूलित कोच बेहतर साबित होगा, जो काशी की संस्कृति व सभ्यता को करीब से नहीं महसूस कर सके हैं। साथ ही उस्ताद साहब और पं. किशन महाराज के लिए भी यह सच्ची श्रद्धांजलि साबित होगी। 

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