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पृथ्वी का 'सुरक्षा कवच' ओजोन परत, इसे बचाएं

Wed, 16 Sep 2020 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 01:12 AM IST
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ozone layer day
वाराणसी। ओजोन परत ओजोन अणुओं की एक परत है, जो वायुमंडल में पाई जाती है। ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाती है। इसके संरक्षण के लिए 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस या ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। हमने जिला पर्यावरण समिति ( एनजीटी) के सदस्य डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव से जाना क्या है ओजोन परत, क्या है इसके क्षरण का कारण, कैसे इसके क्षरण को बचाया जा सकता है। पर्यावरणविद का मानना है कि ओजोन लेयर पृथ्वी का सुरक्षा कवच है और इसे बचाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 1995 के बाद से हर साल 16 सितंबर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस का आयोजन किया जाता है। ओजोन परत के क्षरण के बारे में संभव समाधान का खोज करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
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क्यों हो रहा ओजोन परत का क्षय
डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन परत में होने वाले विघटन के लिए उत्तरदायी है। इसके अलावा हैलोजन, मिथाइल क्लोरोफार्म, कार्बन टेट्राक्लोरिड आदि रसायन पदार्थ भी ओजोन को नष्ट करने में सक्षम है। इन रासायनिक पदार्थों को ही ओजोन क्षरण पदार्थ कहते हैं। यह एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर व प्लास्टिक आदि के इस्तेमाल में प्रमुखता से उत्सर्जित होते हैं।
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ई कचरा भी बना खतरा
ई कचरे में करीब 38 अलग-अलग प्रकार के रासायनिक तत्व शामिल होते हैं। टीवी व पुराने कंप्यूटर में लगी सीआरटी को रिसाइकल करना मुश्किल होता है। इस में लेड, मरक्यूरी केडमियम जैसे घातक तत्व होते हैं। कूड़े में पाया जाने वाले ई-कचरा हवा, मिट्टी, भूमिगत जल को प्रदूषित कर रहा है।
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ये हैं दुष्प्रभाव
ओजोन परत के बढ़ते क्षय के कारण अनेकों दुष्प्रभाव हो सकते हैं। जैसे कि सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें धरती पर वायुमंडल में प्रवेश कर सकती हैं। जो बेहद ही गर्म होती है और पेड़-पौधों व जीव जंतुओं के लिए हानिकारक होती है। शरीर में इन कारणों की वजह से त्वचा का कैंसर, अल्सर, मोतियाबिंद जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। यह किरणें मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती हैं।

ऐसे करें बचाव
ऐसे सौंदर्य प्रसाधन, एयरोसोल और प्लास्टिक के कंटेनर, स्प्रे जिसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन विद्यमान हैं, उन उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वाहन से अत्यधिक धुआं उत्सर्जन को रोकने के लिए वाहनों का नियमित रखरखाव करें । प्लास्टिक और रबड़ से बने टायर को जलाने से बचना चाहिए अधिक से अधिक पौधे लगाएं ताकि ऑक्सीजन अधिक से अधिक मात्रा में वायुमंडल में बनी रहे और इससे ओजोन अणुओं का निर्माण हो। रुई के गद्दे और तकियों का प्रयोग करें व फोम के उपयोग से बचे। मिट्टी के कुल्हड़ों, पत्तों की थालियों का प्रयोग करें।
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