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स्वामी स्वरूपानंद के बदल गए सुर
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 22 Mar 2015 02:34 AM IST
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द्वारका-शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शनिवार को स्वच्छ भारत के साथ ही स्वस्थ भारत के निर्माण पर जोर दिया। नव संवत्सर पर काशी में उनके सुर बदले नजर आए। उन्होंने झारखंड के विश्व कल्याण आश्रम में खुद कई वर्ष से घर वापसी का कार्यक्रम कराने खुलासा किया।
चिंता जताई कि मदरसों में इस्लाम की शिक्षा देने की तो छूट है लेकिन विद्यालयों में गीता नहीं पढ़ाई जा सकती। जब हम गीता की बात करते हैं तो हमें सांप्रदायिक माना जाता है। स्कूलों में बच्चों को गीता पढ़ाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी में संस्कारों के बीच अंकुरित हो सकें।
केदार घाट स्थित विद्यामठ में सुबह सनातनी पंचांग के विमोचन के बाद पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि जबतक गीता पढ़ाई नहीं जाएगी, तबतक लोग हिंदू धर्म के बारे में नहीं जान सकेंगे। महात्मा गांधी, विनोबा भावे, खुदीराम बोस ने भी गीता की व्याख्या की है।
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शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि रूस में जब गीता को प्रतिबंधित किया गया था तब इस ग्रंथ को लेकर भारत सरकार की चिंता सामने आई थी। उन्होंने याद दिलाया कि पीएम नरेंद्र मोदी जब अमेरिका और जापान यात्रा पर गए थे, तब उन्होंने वहां के राष्ट्राध्यक्षों को भी इसी गीता की प्रतियां भेंट की थीं। ऐसे में वो गीता देश में सांप्रदायिक कैसे हो जाती है। इस पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जब स्कूलों में बच्चों को गीता पढ़ाई जाएगी तभी हिंदू धर्म का ज्ञान होगा। इसके बाद ही सही मायने में लोगों की घर वापसी होगी। शंकराचार्य ने बताया कि हमलोग झारखंड के विश्व कल्याण आश्रम में कई वर्ष से लोगों की घर वापसी करवा रहे हैं। इस वर्ष भी कई लोगों की घर वापसी हुई है। कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि मुसलमानों को हिंदू बना देंगे लेकिन उनका खानपान वैसे है ही नहीं।
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चिंता जताई कि मदरसों में इस्लाम की शिक्षा देने की तो छूट है लेकिन विद्यालयों में गीता नहीं पढ़ाई जा सकती। जब हम गीता की बात करते हैं तो हमें सांप्रदायिक माना जाता है। स्कूलों में बच्चों को गीता पढ़ाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी में संस्कारों के बीच अंकुरित हो सकें।
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केदार घाट स्थित विद्यामठ में सुबह सनातनी पंचांग के विमोचन के बाद पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि जबतक गीता पढ़ाई नहीं जाएगी, तबतक लोग हिंदू धर्म के बारे में नहीं जान सकेंगे। महात्मा गांधी, विनोबा भावे, खुदीराम बोस ने भी गीता की व्याख्या की है।
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शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि रूस में जब गीता को प्रतिबंधित किया गया था तब इस ग्रंथ को लेकर भारत सरकार की चिंता सामने आई थी। उन्होंने याद दिलाया कि पीएम नरेंद्र मोदी जब अमेरिका और जापान यात्रा पर गए थे, तब उन्होंने वहां के राष्ट्राध्यक्षों को भी इसी गीता की प्रतियां भेंट की थीं। ऐसे में वो गीता देश में सांप्रदायिक कैसे हो जाती है। इस पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जब स्कूलों में बच्चों को गीता पढ़ाई जाएगी तभी हिंदू धर्म का ज्ञान होगा। इसके बाद ही सही मायने में लोगों की घर वापसी होगी। शंकराचार्य ने बताया कि हमलोग झारखंड के विश्व कल्याण आश्रम में कई वर्ष से लोगों की घर वापसी करवा रहे हैं। इस वर्ष भी कई लोगों की घर वापसी हुई है। कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि मुसलमानों को हिंदू बना देंगे लेकिन उनका खानपान वैसे है ही नहीं।