डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप: सरकारी अस्पतालों में वार्ड फुल, कहीं फिजिशियन तो कहीं बाल रोग विशेषज्ञ ही नहीं
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में कुल 330 बेड हैं। इस समय यहां करीब 300 मरीज भर्ती हैं। रविवार को अस्पताल का डेंगू वार्ड, इमरजेंसी और चिल्ड्रेन वार्ड मरीजों से भरा पड़ा था। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों की जांच, इलाज में लगे थे।
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किसी को जोड़ों में दर्द अधिक है तो किसी का बुखार कम नहीं हो रहा है। प्लेटलेट्स भी 50 हजार के नीचे आ गया। तेज बुखार से बच्चे भी परेशान हैं। वह दर्द से कराह रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में ऐसे तमाम लोग भर्ती भी हैं। चिल्ड्रेन, मेडिकल और सर्जिकल वार्ड सहित अन्य वार्ड फुल हैं। पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। इससे इलाज में दिक्कत आ रही है। जो डॉक्टर ओपीडी में परामर्श दे रहे हैं, वही वार्ड में भर्ती मरीजों को भी देख रहे हैं।
254 बेड का जिला अस्पताल, 240 पर मरीज भर्ती
डेंगू, वायरल फीवर के प्रकोप जारी है। 254 बेड वाले दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में 240 मरीज भर्ती हैं। इसमें बच्चे, महिलाएं भी शामिल हैं। मरीजों की संख्या भी हर दिन बढ़ रही है। यहां स्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 31 पर स्थायी डॉक्टर हैं। 13 संविदा और चार पुनर्नियोजन के डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है। यहां फिजिशियन के पांच पदों में केवल 3 चिकित्सक हैं, जबकि चर्म रोग विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्थिति यह है कि ओपीडी में 150 से 200 लोगों को परामर्श देने के बाद डॉक्टर वार्ड में भी मरीजों को देख रहे हैं। सीएमएस डॉ. दिग्विजय सिंह के अनुसार, अस्पताल के लिए जो उपलब्ध संसाधन हैं, उनमें सभी मरीजों का बेहतर इलाज हो रहा है। शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है।
शास्त्री अस्पताल में भी बेड फुल
शास्त्री अस्पताल रामनगर में 153 बेड का अस्पताल मरीजों से भरा पड़ा है। यहां 120 से अधिक मरीज अलग-अलग वार्ड में हैं। डेंगू के साथ ही मेडिकल वार्ड व इमरजेंसी में भी हर बेड पर मरीज हैं। यहां डॉक्टरों के कुल 32 पदों में से 16 खाली हैं। हृदय रोग, बाल रोग, दंत चिकित्सक, प्लास्टिक और न्यूरो सर्जन तो हैं ही नहीं। यही नहीं इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के चार पदों में कोई नहीं है। यहां भी 20 बेड बढ़ाने का फैसला लिया गया है। जब पहले से ही डॉक्टरों का संकट है तो बेड बढ़ने के बाद कैसे इलाज होगा। सीएमएस डॉ. अमरेंद्र चंद दूबे के अनुसार खाली पदों के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है। अस्पताल में मौजूद डॉक्टारों को ओपीडी के साथ ही वार्ड में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए लगाया गया है।
डेंगू वार्ड, इमरजेंसी फुल, चिल्ड्रेन वार्ड में भी जगह नहीं
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में कुल 330 बेड हैं। इस समय यहां करीब 300 मरीज भर्ती हैं। रविवार को अस्पताल का डेंगू वार्ड, इमरजेंसी और चिल्ड्रेन वार्ड मरीजों से भरा पड़ा था। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों की जांच, इलाज में लगे थे। यहां भी अगर पदों की बात करें तो कुल 41 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 30 डॉक्टर सेवा दे रहे हैं। इसमें भी हृदय रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन का संकट दूर नहीं हो पाया है। चेस्ट फिजिशियन में दो पदों में दोनों खाली चल रहे हैं। ईएनटी में भी एक चिकित्सक नहीं है। ऐसे में मरीजों का इलाज इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर सहित अन्य जो विशेषज्ञ हैं, उनके सहारे चल रहा है।
अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि जो भी मरीज अस्पताल आ रहे हैं, उनका जहां भी जगह मिल रहा है, रखकर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की निगरानी की जा रही है।