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वाराणसीः संपूर्णानंद में शुरू होगा कृषि में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, संस्कृत महाविद्यालयों में कृषि योग्य भूमि का हो सकेगा संरक्षण
Sat, 27 Nov 2021 11:20 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 27 Nov 2021 11:20 PM IST
सार
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत विद्यार्थियों के लिए रोजगार और संस्कृत के व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए एक वर्षीय कृषि डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है।
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sampurnanand university
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में नए सत्र से कृषि में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम का संचालन किया जाएगा। संस्कृत वांग्मय के आधार पर कृषि शास्त्र में डिप्लोमा पाठ्यक्रम संस्कृत भारती ने तैयार किया है। इससे क्षेत्रीय लोगों में संस्कृत शास्त्र में निहित कृषि शास्त्र के ज्ञान में अभिवृद्धि और अभिरुचि होगी।
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छात्रों को रोजगार और संस्कृत महाविद्यालयों में कृषि योग्य भूमि का संरक्षण भी होगा। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालयों के पास 10 से 30 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। इसमें भारतीय कृषि पद्धति से संस्कृत शास्त्रों या संस्कृत वांग्मय में कृषि कराने की जो पद्धति निहित है उसी के अनुसार संस्कृत भारती और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने कृषि में डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार किया है।
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संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महासचिव श्रीशदेव पुजारी संस्कृत विद्यार्थियों के लिए रोजगार और संस्कृत के व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए एक वर्षीय कृषि डिप्लोमा प्रारंभ करने के लिए सहयोग दे रहे हैं। कुलपति ने बताया कि पाठ्यक्रम में तकनीकी मुद्दों के ज्ञान और कृषि में अध्ययन को आरक्षित करना है। इस कोर्स में छात्र खेती और पशुधन प्रबंधन जैसे कि खेतों में चल रहे कीट, जलवायु और बुनियादी प्रबंधन प्रथाओं से निपटने वाले विषयों का अध्ययन करेंगे।
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