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पांडुलिपि संरक्षण के लिए एक करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अब्दुल समद ने शुक्रवार को सरस्वती भवन की दुर्लभ पांडुलिपियों का निरीक्षण किया। विशेष सचिव ने कहा कि इसका संरक्षण राष्ट्रहित, संस्कृत-संस्कृति एवं पीढ़ियों के लिए अति आवश्यक है। बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए कुलपति द्वारा पूर्व में भेजे प्रस्ताव के अंतर्गत शासन से 1 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं। हालांकि, वित्त विभाग में तकनीकी समस्याओं के कारण फंड जारी नहीं हुआ है। खुद इसे जारी कराने का प्रयास करुंगा।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि दुर्लभ पांडुलिपियों की स्थिति बेहद चिंतनीय है। इसे व्यवस्थित करने के लिए देश के बड़े उद्योगपतियों से सहयोग के लिए प्रयास करें। पांडुलिपियों के संरक्षण एवं इसे संस्कृत के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद कर प्रकाशित कराना चाहिए। इसके दूरगामी लाभ राष्ट्र को होंगे। विश्व वांगमय में यहां की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग प्राप्त होगा। पुस्तकालय में इंफोसिस के सहयोग से संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान द्वारा पांडुलिपि संरक्षण के कार्य को विशेष सचिव ने सराहा। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी से कहा कि पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजें, हर संभव मदद की जाएगी। कुलपति ने उन्हें विश्वविद्यालय से प्रकाशित केदारखंड एवं विश्वविद्यालय वार्ता भेंट की। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. शंभू नाथ शुक्ला, डॉ. पद्माकर मिश्र, लालजी मिश्र, कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, वित्त अधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव, डॉ. प्रेमचंद्र मिश्र मौजूद रहे।
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निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि दुर्लभ पांडुलिपियों की स्थिति बेहद चिंतनीय है। इसे व्यवस्थित करने के लिए देश के बड़े उद्योगपतियों से सहयोग के लिए प्रयास करें। पांडुलिपियों के संरक्षण एवं इसे संस्कृत के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद कर प्रकाशित कराना चाहिए। इसके दूरगामी लाभ राष्ट्र को होंगे। विश्व वांगमय में यहां की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग प्राप्त होगा। पुस्तकालय में इंफोसिस के सहयोग से संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान द्वारा पांडुलिपि संरक्षण के कार्य को विशेष सचिव ने सराहा। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी से कहा कि पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजें, हर संभव मदद की जाएगी। कुलपति ने उन्हें विश्वविद्यालय से प्रकाशित केदारखंड एवं विश्वविद्यालय वार्ता भेंट की। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. शंभू नाथ शुक्ला, डॉ. पद्माकर मिश्र, लालजी मिश्र, कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, वित्त अधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव, डॉ. प्रेमचंद्र मिश्र मौजूद रहे।
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