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‘घर वापसी’ के जरिए वर्णवादी व्यवस्था पर चोट
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2015 02:14 AM IST
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वाराणसी। ‘घर वापसी’ नाटक के मंचन के जरिए रविवार की रात वर्णवादी व्यवस्था के अस्तित्व पर चोट की गई। राष्ट्रीय नाट्य आंदोलन के तहत तीसरे दिन नए रूप में चल रहे धर्मांतरण के आंदोलन पर केंद्रित इस नाटक की प्रस्तुति नागरी नाटक मंडली के मुरारी लाल मेहता प्रेक्षागृह में की गई।
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इसके अलावा लघु नाटक ‘उजाले की ओर’के माध्यम से नेत्रदान और रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया।
शाम सात बजे कर्नल विनीत प्रभात, रामगोपाल गुप्ता, डॉ. सुनील शाह ने दीप जलाकर उद्घाटन किया। नाटककार राजेश कुमार का भी सम्मान किया गया। सबसे पहले लघु नाटक ‘उजाले की ओर’की प्रस्तुति हुई। इसमें अशरफी खान, गुंजन सिंह, वैशाली, रेखा, सैफ,कौशिक, गोल्डेन, अक्षय ने अभिनय किया।
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इसके बाद ‘घर वापसी’ का मंचन किया गया। शुरुआत होती है धर्मांतरण के आंदोलन का नेतृत्व स्वामी अपूर्वानंद को सौंपे जाने से। उसकी मुलाकात एक दिन तबरेज हैदर से होती है, जो पहले त्रिभुवन तिवारी था। वो हुश्ना से शादी करने के लिए अड़ जाता है।
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इससे नाराज होकर घर वालों ने तो उसे निकाला ही, समाज ने भी बिरादरी से बाहर कर दिया। त्रिभुवन जब हुश्ना के पास आया तब उसके समुदाय के लोगों ने उसके सामने धर्मपरिवर्तन की शर्त रखी। प्रेम और सत्य के लिए त्रिभुवन धर्म परिवर्तन के लिए राजी हो जाता है। यहीं से त्रिभुवन बन जाता है तबरेज। यह नाटक समानांतर संस्था की ओर से अनिल रंजन भौमिक के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया। आभार सलीम राजा ने प्रकट किया।