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बलिया रेलवे स्टेशन रेल पुलिस की खींचतान में गई वृद्ध की गई जान

Wed, 09 May 2018 06:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Updated Wed, 09 May 2018 06:32 PM IST
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older man died at ballia railway station rail pls dont care him
प्लेटफार्म पर अचेतावस्था में पड़े वृद्ध को किसी ने नहीं पहुंचाया अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी-छपरा रेलखंड के मॉडल रेलवे स्टेशन बलिया पर पर यात्रियों की सुरक्षा में तैनात जीआरपी और आरपीएफ के अलावा रेलवे के अधिकारी कितने असंवेदनशील हो गए हैं, इसकी एक बानगी बुधवार को देखने को मिली। प्लेटफार्म संख्या दो पर एक वृद्ध अचेतावस्था में पड़े-पड़े काल के गाल में समा गया।
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रेलवे की तरफ से मेमो जारी होने के बाद भी वृद्ध को लेकर जीआरपी और आरपीएफ में खींचतान बनी रही। किसी भी सक्षम अधिकारी ने वृद्ध को अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। काफी जद्दोजहद के करीब 16 घंटे बाद जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त रूप से शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की।  
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बताया जाता है कि बलिया स्टेशन में प्लेटफार्म संख्या 02 पर एक 60 वर्षीय वृद्ध मंगलवार की देर शाम करीब सात बजे एक बेंच पर अचेतावस्था में पाया गया। इसकी जानकारी होने पर गाड़ी परीक्षक ने मेमो जारी कर आरपीएफ और जीआरपी को तत्काल सूचित किया।
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आरपीएफ ने डॉक्टर के नहीं रहने पर रेलवे अस्पताल के कंपाउंडर से वृद्ध की जांच पड़ताल करवाई,जिसमें कंपाउंडर ने जांच पड़ताल के बाद मौखिक तौर पर वृद्ध को मृत घोषित कर दिया। लेकिन रेलवे अस्पताल में डाक्टर की उपस्थिति नहीं होने से इसकी पुष्टि लिखित रूप से नहीं हो सकी।

गाड़ी परीक्षक ने कपांडर की जांच के बाद जीआरपी को इस आशय का मेमो जारी किया कि देखने से प्रतीत होता है कि वृद्ध की मृत्यु हो गई है, लेकिन जीआरपी बिना मृत्यु प्रमाण पत्र मेमो रिसीव करने को तैयार नहीं थी।

इस बात को लेकर आरपीएफ इंस्पेक्टर और जीआरपी इंस्पेक्टर में कहासुनी भी हुई। अगले दिन जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त रूप से घटना स्थल पर पहुंच वृद्ध की जांच पड़ताल की।
वृद्ध के कपड़ों की तलाशी लेने पर उसके पास से कुछ कागजात प्राप्त हुए, जिसके आधार पर उसकी शिनाख्त करने की कोशिश की जा रही है। जीआरपी ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है।  

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मेमो जारी होने के बाद भी 16 घंटे बाद शुरू हुई कार्यवाही - फोटो : अमर उजाला
बलिया रेलवे स्टेशन पर चार माह से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। कंपाउंडर के सहारे ही अस्पताल संचालित हो रहा है, जबकि माडल रेवले स्टेशन पर रोज सैकड़ों लोगों की आवाजाही बनी रहती है। यही नहीं रेलवे कर्मचारियों का भी परिवार यहां निवास करता है।

लेकिन उन्हें डाक्टरी सुविधा से वंचित रहना पड़ता है। किसी की तबीयत खराब होने की दशा में निजी अस्पतालों सहित जिला अस्पताल का ही सहारा लेना पड़ेगा। मंगलवार की शाम को प्लेटफार्म पर वृद्ध अचेतावस्था में मिला, चिकित्सक के अभाव में उसके मौत की पुष्टि को लेकर खूब किरकिरी हुई। 

प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ  अमित कुमार राय ने कहा कि प्लेटफार्म पर वृद्ध के अचेतावस्था में पड़े होने की सूचना पर मैं रेलवे अस्पताल के कंपाउंडर को वहां लेकर गया। जांच पड़ताल के बाद फार्मासिस्ट ने मौखित रूप से मृत घोषित किया, जिसकी सूचना जीआरपी को मेमो के माध्यम से रेलवे की तरफ से दी गई, लेकिन जीआरपी ने शव लेने से मना कर दिया। जीआरपी प्रभारी का किसी भी मामले में सहयोगात्मक रवैया नहीं रहता है।  

जीआरपी  प्रभारी निरीक्षक राजा भइया ने कहा कि रेलवे की तरफ से स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर वृद्ध के मृत्यु की सूचना मंगलवार की रात को नहीं दी गई, दूसरे दिन बुधवार को सुबह लिखित रूप से मेमो के जरिए इसकी जानकारी दी गई। जानकारी मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई।  

अस्पताल पहुंचाया जाता तो बच सकती थी जान

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ballia - फोटो : अमर उजाला

प्रभारी स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने कहा कि  मंगलवार की देर शाम प्लेटफार्म पर वृद्ध के अचेतावस्था में मिलने पर तत्काल मेमो जारी कर आरपीएफ और जीआरपी को सूचित किया गया। स्टेशन पर रेलवे का चिकित्सक चार माह से नहीं है।

जिस वजह से फार्मासिस्ट ने मौके पर पहुंचकर जांच परीक्षण कर मौत की मौखिक पुष्टि कर दी थी। बावजूद शव को लेकर जीआरपी और आरपीएफ आपस में खींचतान करती रही।  

रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर मंगलवार की देर शाम वृद्ध अचेतावस्था में पाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो अगर समय से वृद्ध को अस्पताल पहुंचा दिया गया होता तो उसकी जान बच सकती थी। लेकिन यहां रेलवे के जिम्मेदारी अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ने में ही पूरी रात बिता दिए।  

जीआरपी की माने तो प्लेटफार्म पर मृत मिले वृद्ध के पास से कुछ कागजात बरामद हुए हैं, जिससे उसके बदायू जनपद के होने की आशंका जताई जा रही है। संबंधित कागजातों के आधार पर मृतक की शिनाख्त की जा रही है।
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