{"_id":"60e9e1a98ebc3e23af7214b0","slug":"oil-on-brother-in-law-sleeping-in-the-shop-varanasi-news-vns59972730","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुकान में सो रहे बहनोई पर तेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुकान में सो रहे बहनोई पर तेल
विज्ञापन
रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बंतरा गांव में शुक्रवार रात सोते समय बिल्डिंग मैटेरियल के कारोबारी को उसके साले ने ही तेल छिड़ककर जला दिया। मधुपुर सीएचसी में उपचार के बाद उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद भागते समय सुकृत चौकी के पास बाइक दुर्घटनाग्रस्त होने से आरोपी साला भी जख्मी हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी जेब से एक पत्र भी मिला जिसमें उसने प्रताड़ना के कारण बहनोई को रास्ते से हटाने का जिक्र किया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
मधुपुर निवासी सीताराम (50) की वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर बंतरा गांव के पास बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान है। शुक्रवार रात वह अपनी दुकान में सो रहा था। रात करीब डेढ़ बजे अचानक चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग जगे तो देखा कि सीताराम आग की लपटों में जलते हुए पड़ोस में ही बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान चला रहे साले बद्री निवासी अहरौरा मिर्जापुर के पीछे भाग रहा था, जबकि बद्री उसे छोड़कर बाइक से अहरौरा की ओर भाग निकला। आसपास के लोगों ने आग बुझाकर सीताराम को मधुपुर सीएचसी ले गए, जहां से उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। उधर, घटना के बाद भागते समय बद्री की बाइक सुकृत पुलिस चौकी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में उसे चोट आई। पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के पीछे दोनों में व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता की चर्चा है। सीताराम और बद्री ने करीब 12 साल पहले संयुक्त रूप से व्यापार शुरू किया था, लेकिन करीब छह वर्ष बाद मनमुटाव होने से दोनों अलग हो गए। इसके बाद बंतरा में ही दोनों ने अलग-अलग दुकान खोली। दोनों एक-दूसरे के विरोधी हो गए थे। कोतवाली प्रभारी विद्यासागर ने बताया कि मामले में झुलसे दुकानदार और उसके परिवार वालों ने साले पर ही पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की तहरीर दी है। घटना के पीछे व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता की बात सामने आई है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
---
मेरा जीजा रहम का पात्र नहीं...
मधुपुर। घटना के बाद भागते समय हादसे में घायल बद्री की जेब से पुलिस को एक पत्र मिला जिसमें उसने साफ शब्दों में घटना का उल्लेख करते हुए अपनी भी आत्महत्या का जिक्र किया है। पत्र में लिखा है कि मैं बद्री प्रसाद कर्ज से तंग आकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मैंने चेक पर पैसा लिया था। सबने दस परसेंट ब्याज पर पैसा दिया था। दो साल के लॉक डाउन में मैं ब्याज दे देकर खत्म हो गया। साथ में मैं अपने जीजा को भी ले जा रहा हूं। इसलिए कि वह बेइज्जती करता रहता है कि सब पैसा लेकर बद्री भाग गया। मेरा जीजा रहम का पात्र नहीं है। मैं जो कर रहा हूं, यह किसी को नहीं मालूम है। इसका जिम्मेदार मैं खुद हूं। इस आत्महत्या में किसी का हाथ नहीं है। पुलिस की पूछताछ में भी बद्री ने यह बातें बताई। कहा कि कर्ज से वह पूरी तरह टूट चुका है। उसे कोई और रास्ता नहीं सूझ रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
मधुपुर निवासी सीताराम (50) की वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर बंतरा गांव के पास बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान है। शुक्रवार रात वह अपनी दुकान में सो रहा था। रात करीब डेढ़ बजे अचानक चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग जगे तो देखा कि सीताराम आग की लपटों में जलते हुए पड़ोस में ही बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान चला रहे साले बद्री निवासी अहरौरा मिर्जापुर के पीछे भाग रहा था, जबकि बद्री उसे छोड़कर बाइक से अहरौरा की ओर भाग निकला। आसपास के लोगों ने आग बुझाकर सीताराम को मधुपुर सीएचसी ले गए, जहां से उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। उधर, घटना के बाद भागते समय बद्री की बाइक सुकृत पुलिस चौकी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में उसे चोट आई। पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के पीछे दोनों में व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता की चर्चा है। सीताराम और बद्री ने करीब 12 साल पहले संयुक्त रूप से व्यापार शुरू किया था, लेकिन करीब छह वर्ष बाद मनमुटाव होने से दोनों अलग हो गए। इसके बाद बंतरा में ही दोनों ने अलग-अलग दुकान खोली। दोनों एक-दूसरे के विरोधी हो गए थे। कोतवाली प्रभारी विद्यासागर ने बताया कि मामले में झुलसे दुकानदार और उसके परिवार वालों ने साले पर ही पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की तहरीर दी है। घटना के पीछे व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता की बात सामने आई है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
विज्ञापन
---
मेरा जीजा रहम का पात्र नहीं...
मधुपुर। घटना के बाद भागते समय हादसे में घायल बद्री की जेब से पुलिस को एक पत्र मिला जिसमें उसने साफ शब्दों में घटना का उल्लेख करते हुए अपनी भी आत्महत्या का जिक्र किया है। पत्र में लिखा है कि मैं बद्री प्रसाद कर्ज से तंग आकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मैंने चेक पर पैसा लिया था। सबने दस परसेंट ब्याज पर पैसा दिया था। दो साल के लॉक डाउन में मैं ब्याज दे देकर खत्म हो गया। साथ में मैं अपने जीजा को भी ले जा रहा हूं। इसलिए कि वह बेइज्जती करता रहता है कि सब पैसा लेकर बद्री भाग गया। मेरा जीजा रहम का पात्र नहीं है। मैं जो कर रहा हूं, यह किसी को नहीं मालूम है। इसका जिम्मेदार मैं खुद हूं। इस आत्महत्या में किसी का हाथ नहीं है। पुलिस की पूछताछ में भी बद्री ने यह बातें बताई। कहा कि कर्ज से वह पूरी तरह टूट चुका है। उसे कोई और रास्ता नहीं सूझ रहा था।
विज्ञापन