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भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में बाजारवाद से बढ़ी अश्लीलता 

Sun, 26 Aug 2018 03:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 26 Aug 2018 03:56 PM IST
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Obscenity increased in bhojpuri entertainment industry due to commercialization
साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
जाने-माने साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह ने कहा कि हर समस्या का समाधान समाज के अंदर ही है। समाज देखना बंद कर दे तो भोजपुरी मनोरंजन उद्योग से भी अश्लीलता खत्म हो जाएगी।
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बनारस में डॉ. सिंह शनिवार को पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान और काशी विद्यापीठ के मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में गांधी अध्ययन पीठ में आयोजित ‘भोजपुरी फिल्मों व गीतों में बढ़ती अश्लीलता का विरोध’ विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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डॉ. सिंह ने कहा, फिल्मांकन एक कला है, उसका लक्ष्य सिर्फ मनोरंजन होना चाहिए। अपने उपन्यास काशी का अस्सी पर बनी फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ का जिक्र करते हुए बताया कि निर्माता ने इस फिल्म में आइटम सांग डालने की बात कही थी लेकिन हमने मना कर दिया। भोजपुरी के समृद्ध होने की बात तो होनी चाहिए लेकिन हिंदी को नहीं भूलना चाहिए। संवाद की परंपरा बचा कर रखनी होगी।
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आयोजन के विशिष्ट अतिथि पद्मविभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र ने कहा कि भगवान शंकर ने संगीत की रचना की। ईश्वर प्राप्ति के लिए संगीत की रचना की गई लेकिन आज धन प्राप्ति के लिए इसमें अश्लीलता परोसी जा रही है। आजकल सूर, कबीर, मीरा के पद नहीं सुनने को मिलते। आज संगीत की दुर्गति इसलिए हो रही है क्योंकि इसका उद्देश्य भूल गए हैं। बाजारवाद के कारण भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता बढ़ी है।

Obscenity increased in bhojpuri entertainment industry due to commercialization
पद्मविभूषण पंडित छन्नू लाल - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि भोजपुरी फिल्मों में बढ़ रही अश्लीलता भयावह, सोचनीय और चिंतनीय है। समाज में संस्कृति और संस्कार नहीं रहेगा तो देश नष्ट हो जाएगा। अध्यक्षता उद्योगपति केशव जालान ने की।

आयोजक वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भोजपुरी फिल्मों, आर्केस्ट्रा में अश्लीलता चरम पर है। औरतों को वस्तु बनाकर पेश किया जा रहा है। इसके खिलाफ पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान ने पूर्वांचल में अभियान शुरू किया है। दस लाख से अधिक लोगों से हस्ताक्षर कराया जाएगा व उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों से मांग होगी कि इसे रोकने के लिए कानून बनाया जाए।

संगोष्ठी में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री चंद्रकांत त्रिपाठी, स्वामी सारंग, प्रो. देवव्रत चौबे, प्रो. जयराम तिवारी, मणिशंकर पांडेय, शिव कुमार, अनिल श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। 
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