एनआरएचएम घोटाले की नए सिरे से खुलेगी फाइल, 2007 से 2011 तक दवाओं की खरीददारी में हुई थी अनियमितता
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एनआरएचएम घोटाले की जांच में आरोपी दो पूर्व सीएमओ समेत छह लोगों की फाइल नए सिरे से खुलेगी। मामले की जांच सीबीआई तो कर ही रही है, अब निदेशक स्वास्थ्य ने भी जांच शुरू कर दी है। निदेशक ने वर्ष 2007 से 2011 तक दवा के साथ अन्य सामान की खरीददारी के सभी मूल कागजात और आरोपियों की तैनाती से जुड़े रिकार्ड तलब किए हैं। निदेशक का पत्र आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है और मांगी गई फाइलें जुटाई जा रही हैं।
एनआरएचएम के तहत जिले में 2007-2011 (वर्ष 2007-08, 2008-09, 2009-10, 2010-11) तक दवाइयाें के साथ ही चिकित्सकीय उपकरण भी खरीदे गए थे। इसमें अनियमितता की बात सामने आने पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जिले में इस दौरान तैनात रहे छह लोगों के कार्यकाल में हुई खरीददारी की मूल फाइलें अपने पास रख ली हैं।
इधर शासन ने निदेशक (प्रशासन) चिकित्सा और स्वास्थ्य से भी जांच कराने का फैसला लिया है। अब जांच अधिकारी निदेशक स्वास्थ्य डॉ. पूजा पांडेय ने सीएमओ से इस मामले के सभी कागजातों की दूसरी प्रति या छायाप्रति का प्रमाणित रिकार्ड तलब किया है। यह भी लिखा है कि अगर कोई कागजात नहीं मिलते हैं तो उसे सीबीआई से मांगकर देना होगा, ताकि जल्द जांच रिपोर्ट दी जा सके। सात में से एक आरोपी तत्कालीन समय में मंडलीय अस्पताल में प्रमुख अधीक्षक पद पर तैनात रहे हैं।
इन्हें मिल चुका है आरोप पत्र
डॉ. आरएस वर्मा, तत्कालीन सीएमओ वाराणसी, डॉ. प्यारे मोहन श्रीवास्तव, तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक मंडलीय अस्पताल, डॉ. अब्दुल हलीम, तत्कालीन सीएमओ वाराणसी, डॉ. एएन सिंह, तत्कालीन जिला परियोजना अधिकारी, वाराणसी, डॉ. अतुल कुमार सिंह, तत्काल एडिशनल सीएमओ(स्टोर) वाराणसी, डॉ. एलसी यादव, तत्कालीन एडिशनल सीएमओ (स्टोर)
निदेशक स्वास्थ्य (जांच अधिकारी) का पत्र मिला है। खरीददारी से जुड़े कागजातों के साथ ही आरोपियों की तैनाती संबंधी फाइल जल्द ही भिजवा दी जाएगी।
डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ