Varanasi News: अब बनारसी साड़ी के लिए बनारस में ही तैयार होगा सिल्क, रोजाना तीन हजार मीट्रिक टन सिल्क की खपत
अब सिल्क का उत्पादन बनारस और पड़ोसी जनपद सोनभद्र में ही होगा। यहां के बुनकरों और उद्यमियों को चीन और ताइवान या फिर कर्नाटक के सिल्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की ओर से दोनों जिलो में यूनिट लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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अब सिल्क का उत्पादन बनारस और पड़ोसी जनपद सोनभद्र में ही होगा। यहां के बुनकरों और उद्यमियों को चीन और ताइवान या फिर कर्नाटक के सिल्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की ओर से दोनों जिलो में यूनिट लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। जल्द ही इसका निमार्ण शुरू होगा।
रेशम अधिकारियों के अनुसार बनारस में रोजाना तीन हजार मीट्रिक टन सिल्क की खपत है। लिहाजा, ताइवान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक से सिल्क मंगाया जाता है। मौजूदा समय में दो हजार मीट्रिक टन ही सिल्क उपलब्ध हो पाता है। ऐसे में बनारस के सेवापुरी और सोनभद्र में सिल्क प्रोसेस की दो यूनिट खोले जाने का निर्णय लिया गया।
सेवापुरी और सोनभद्र में लगने वाली सिल्क प्रोसेस यूनिट से रोजाना 35-35 किलो सिल्क का उत्पादन हो सकेगा। इससे बनारसी साड़ी तैयार करने में सिल्क की उपलब्धता आसानी से हो सकेगी। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) अधिकारियों के मुताबिक बनारसी साड़ी में कच्चे माल की उपलब्धता और बिक्री बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। इससे रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
चीन, वियतनाम से सस्ता होगा बनारसी सिल्क
वियतनाम और चीन से आने वाला सिल्क काफी महंगा होता है। 5500 से लेकर 5800 रुपये प्रति किलो सिल्क का दाम होता है। जबकि पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के सिल्क का दाम पांच हजार रुपये प्रति किलो है। जिले में ही उत्पादन शुरू होने से बुनकरों और उद्यमियों के लिए सिल्क सस्ता पड़ेगा।