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प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े में अब 18 पर एफआईआर की तैयारी
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में अब एफआईआर दर्ज होगी। शासन ने एसआईटी को 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है। फर्जीवाड़े की जांच पिछले साल मार्च में ही पूरी हो गई थी और एसआईटी ने रिपोर्ट भी शासन को सौंप दी थी। एफआईआर का आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय में खलबली मची हुई है।
प्रदेश के 75 जिलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों की डिग्रियों का सत्यापन कराया गया था। फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में विश्वविद्यालय के 17 कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी। एसआईटी ने 2016 में जांच में पाया था कि विश्वविद्यालय की 3000 लोगों को फर्जी मार्कशीट बेची गई थी। यह मार्कशीट संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से जारी हुई थीं। 16 वर्षों का विवरण तलब कर एसआईटी ने वर्ष 1998 से 2014 के बीच संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर शिक्षक बने अभ्यर्थियों का ब्योरा बेसिक शिक्षा विभाग से तलब किया था। विश्वविद्यालय में अभिलेखों के सत्यापन में भारी अनियमितताएं मिली थीं।
विशेष सचिव ने की थी नौ अधिकारी और 10 कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति
पिछले साल जांच रिपोर्ट के बाद विशेष सचिव मनोज कुमार की ओर से विश्वविद्यालय को जारी पत्र में नौ अधिकारियों और 10 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। नौ अधिकारियों में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति डॉ. रजनीश शुक्ला, झारखंड में स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा, पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कुलसचिव महेंद्र कुमार, विद्याधर त्रिपाठी, योगेंद्र नाथ गुप्ता, प्रो. राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय प्रयागराज में सहायक कुलसचिव दीप्ति मिश्रा, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक प्रो. रमेश कुमार द्विवेदी, उपकुलसचिव इंदुपति झा, महेंद्र कुमार शामिल हैं। कर्मचारियों में कौशल कुमार वर्मा, कृपा शंकर पांडेय, भगवती प्रसाद शुक्ला, विजय शंकर शुक्ला, मिहिर मिश्रा, हरि उपाध्याय, शशि मिश्र, त्रिभुवन मिश्र, वीएम त्रिपाठी और मोहित मिश्र को जांच में दोषी पाया गया था। विश्वविद्यालय के 10 कर्मचारियों में से दो को पहले जेल भी हो चुकी है। एक कर्मचारी कई साल से लापता है।
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छह हजार से अधिक प्रमाणपत्र मिले थे फर्जी
जांच के दौरान पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और बीएड के फर्जी अंकपत्र व प्रमाणपत्र लगाकर पूरे प्रदेश भर में छह हजार से अधिक शिक्षक नौकरी करते पाए गए थे। सबसे अधिक फर्जी अंकपत्र बलिया, देवरिया, कुशीनगर, आगरा, सिद्धार्थ नगर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, सोनभद्र, बागपत समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के मिले थे।
कोट
अभी शासन से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। शासन से आदेश मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. ओमप्रकाश, कुलसचिव
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प्रदेश के 75 जिलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों की डिग्रियों का सत्यापन कराया गया था। फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में विश्वविद्यालय के 17 कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी। एसआईटी ने 2016 में जांच में पाया था कि विश्वविद्यालय की 3000 लोगों को फर्जी मार्कशीट बेची गई थी। यह मार्कशीट संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से जारी हुई थीं। 16 वर्षों का विवरण तलब कर एसआईटी ने वर्ष 1998 से 2014 के बीच संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर शिक्षक बने अभ्यर्थियों का ब्योरा बेसिक शिक्षा विभाग से तलब किया था। विश्वविद्यालय में अभिलेखों के सत्यापन में भारी अनियमितताएं मिली थीं।
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विशेष सचिव ने की थी नौ अधिकारी और 10 कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति
पिछले साल जांच रिपोर्ट के बाद विशेष सचिव मनोज कुमार की ओर से विश्वविद्यालय को जारी पत्र में नौ अधिकारियों और 10 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। नौ अधिकारियों में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति डॉ. रजनीश शुक्ला, झारखंड में स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा, पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कुलसचिव महेंद्र कुमार, विद्याधर त्रिपाठी, योगेंद्र नाथ गुप्ता, प्रो. राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय प्रयागराज में सहायक कुलसचिव दीप्ति मिश्रा, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक प्रो. रमेश कुमार द्विवेदी, उपकुलसचिव इंदुपति झा, महेंद्र कुमार शामिल हैं। कर्मचारियों में कौशल कुमार वर्मा, कृपा शंकर पांडेय, भगवती प्रसाद शुक्ला, विजय शंकर शुक्ला, मिहिर मिश्रा, हरि उपाध्याय, शशि मिश्र, त्रिभुवन मिश्र, वीएम त्रिपाठी और मोहित मिश्र को जांच में दोषी पाया गया था। विश्वविद्यालय के 10 कर्मचारियों में से दो को पहले जेल भी हो चुकी है। एक कर्मचारी कई साल से लापता है।
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छह हजार से अधिक प्रमाणपत्र मिले थे फर्जी
जांच के दौरान पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और बीएड के फर्जी अंकपत्र व प्रमाणपत्र लगाकर पूरे प्रदेश भर में छह हजार से अधिक शिक्षक नौकरी करते पाए गए थे। सबसे अधिक फर्जी अंकपत्र बलिया, देवरिया, कुशीनगर, आगरा, सिद्धार्थ नगर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, सोनभद्र, बागपत समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के मिले थे।
कोट
अभी शासन से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। शासन से आदेश मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. ओमप्रकाश, कुलसचिव