अमेरिका में रह रहे बीएचयू के पूर्व छात्र की खोज: बीज सूंघकर भांप जाते हैं कब होगा कीड़ों का हमला, फसल बर्बादी होगी कम
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व छात्र डॉ. अभिनव मौर्य की यह खोज किसानों के लिए वरदान साबित होगी और उनकी फसल की रक्षा कीड़ों से करेगी। पौधों के सेल्फ डिफेंस पर इस तरह का यह पहला रिसर्च है जो कि अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल केमिकल इकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अब पौधे भी कीड़ों से अपना सेल्फ डिफेंस कर सकेंगे। जी हां चौंकने की जरूरत नहीं है, जल्द ही पौधे भी वातावरण में मौजूद गंध को सूंघकर आगामी खतरे को भांप लेंगे और अपने अंदर इम्युनिटी विकसित कर लेंगे। अगली बार जब कीड़े पौधों पर धावा बोलते हैं तो उनके बीज इस हमले से खुद को तैयार करने लायक बना लेते हैं।
एक तरह से बीज जब अंकुरित होकर पौधा बनता है तो अपने अंदर कीट प्रतिरोधक क्षमता तैयार कर लेता है। इन बीजों में भी इंसानों की तरह से मेमोरी में सूचनाएं इकट्ठा करने की क्षमता होती है।बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व छात्र डॉ. अभिनव मौर्य की यह खोज किसानों के लिए वरदान साबित होगी और उनकी फसल की रक्षा कीड़ों से करेगी।
पौधों के सेल्फ डिफेंस पर इस तरह का यह पहला रिसर्च है जो कि अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल केमिकल इकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। डॉ. अभिनव मौर्य बताते हैं कि बीजों में गंध द्वारा सीड प्राइमिंग की पहली बार खोज हुई है। यह तकनीक अब पौधों के सेल्फ डिफेंस सिस्टम को बढ़ाएगी। इसे सीड प्राइमिंग और डायरेक्ट एक्टिविज्म ऑफ प्लांट डिफेंड मैकेनिज्म कहा जाता है।
वैज्ञानिकों के साथ तैयार करेंगे इम्युनिटी बूस्टर
अब डॉ. मौर्य दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर तमाम हानिकारक कीड़ों की महक से नेचुरल इम्युनिटी बूस्टर तैयार करने पर काम करेंगे। डॉ. मौर्य ने कहा कि यदि दवा बनाकर इनकी गंध बीजों को सूंघा दें तो वह भविष्य के किसी भी खतरे को संभाला जा सकता है। आगामी दिनों में काफी हद तक कीड़ों से नुकसान होने वाली फसलों को बचाया जा सकेगा। इसके प्रोविजनल पेटेंट के लिए आवेदन दिया जा चुका है।
मेडिकागो और अर्बिडॉप्सिस के पौधे पर रिसर्च
डॉ. अभिनव ने इस रिसर्च के लिए मेडिकागो और अर्बिडॉप्सिस का पौधा लिया था। उन्होंने कहा कि इस रिसर्च को करने में कुल पांच साल का लंबा वक्त लगा है। बीज के अंदर जींस की जांच की गई है। लेकिन अभी तक पता नहीं चली कि यह मेमोरी किस तरह विकसित हुई है।
बीएचयू के हैं कृषि स्नातक
डॉ. अभिनव मौर्य जौनपुर स्थित समसपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता अवधेश मौर्य जौनपुर में अधिवक्ता और गायत्री देवी गृहिणी हैं। डॉ. अभिनव मौर्य ने कृषि विज्ञान संस्थान में (2009-13) कृषि स्नातक किया था। इसके बाद आईआईएम-अहमदाबाद गए, मगर उसी बीच अमेरिका में उन्हें रिसर्च फेलोशिप मिल गई। वहां से उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉदर्न कोलेराडो और यूनिवर्सिटी ऑफ लुइसविले से रिसर्च पूरा किया।