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मनोरंजन ही नहीं, गंभीर संदेश भी देते हैं नुक्कड़ नाटक

Tue, 12 Apr 2022 12:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2022 12:57 AM IST
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Not only entertainment, street plays also give serious messages
सामूहिक संदेश देने का पुराना, लेकिन प्रभावी जरिया रहा है नुक्कड़ नाटक। मनोरंजन की चादर तले गंभीर विषयों पर संदेश, चिंतन और मनन का ऐसा मंच जिसने कई सदियों से अपनी अलग पहचान बना रखी है। मजलूमों, गरीबों की आवाज बना नुक्कड़ नाटक का समय के साथ रूप भी बदला और ढंग भी। रंगमंच, सिनेमा के दौर में भले ही अब इसका दायरा कुछ सिमट सा गया है लेकिन कला साहित्य और संस्कृति की भूमि काशी में नुक्कड़ नाटक पूरी जिंदादिली से मुस्कुरा रहा है। गली मोहल्ले, घाट, चौराहे पर नुक्कड़ नाटकों का जादू अब भी कायम है। यहां कई संस्थाएं भी इसमें निष्ठा और समर्पण से जुटी हैं।
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कुरीतियों को आइना दिखा रहा रंगभूमि
नुक्कड़ नाटक संस्था की बात की जाए तो बनारस में अलग छाप छोड़ने का काम किया रंगभूमि ग्रुप ऑफ आर्ट के कलाकारों ने। अपने अभिनय के जरिये समाज के विभिन्न वर्ग को जागरूक करने के लिए पिछले आठ साल से प्रयासरत हैं। संस्था के कलाकार चिलचिलाती धूप से लेकर सड़क पर तेज शोर के साथ हॉल के खामोशी में अपने आप को ढालते हुए अभिनय का लोहा मनवा रहे हैं। कलाकारों के इस समूह में अनुराग मौर्या, शशि यदुवंशी, दीपक सिंह व भानुप्रिया तिवारी ऐसे कई कलाकार है, जो नुक्कड़ नाटक की इस थाती को आज भी सहेजने में अपना अहम योगदान दे रहे है।
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नुक्कड़ नाटक के क्षेत्र में प्रेरणा है कला मंच
थियेटर कलाकार सफदर हाशमी को प्रेरणा मानकर आज से 29 साल पहले काशी में प्रेरणा कला मंच की स्थापना हुई थी। प्रेरणा कला मंच ने अपने ढाई दशक से ज्यादा के सफर में 8000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियां देश भर में दी है। श्रीलंका से लेकर मेडागास्कर में नुक्कड़ नाटक को जीवंत करने का श्रेय भी काशी को ही जाता है। इसी मंच के जरिये ही काशी से पूर्वोत्तर तक नुक्कड़ नाटक की कला परवान चढ़ी। यहीं से प्रशिक्षण पाकर ही बनारस में लोगों ने अपनी कई संस्थाएं शुरू कर दी हैं।
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सफदर हाशमी की याद में मनाते हैं नुक्कड़ नाटक दिवस
जाने माने थियेटर कलाकार सफदर हाशमी की याद में राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस मनाया जाता है। 12 अप्रैल को उनके जन्मदिवस को इस दिवस के नाम किया गया है। भारत में आधुनिक नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने का श्रेय सफदर हाशमी को ही जाता है।
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