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सदर में 1980 के बाद से लगातार दो बार नहीं जीता कोई दल
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जौनपुर। सदर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक होगा। हालांकि अभी आम आदमी पार्टी को छोड़ किसी दल ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। लोग प्रत्याशियों को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। वहीं, संभावित प्रत्याशी लखनऊ और दिल्ली का चक्कर काट रहे हैं। साथ ही अपने स्तर से जनता के बीच जाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं। इस सीट पर 1980 के बाद से कोई भी दल लगातार दूसरी बार नहीं जीता है। हालांकि इस रिकार्ड को तोड़ने के लिए भाजपा रणनीति बनाकर जुटी हुई है। वहीं, विपक्षी दल भी पुराने इतिहास को बनाए रखते हुए अपनी जीत सुनिश्चित करने में एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं।
साल 1952 में हुए पहले चुनाव में सदर सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस सबसे अधिक 6 बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। आंकड़ों के मुताबिक साल 1952, 1967, 1974, 1977, 1980 में कांग्रेस जीती थी। इसके बाद आखिरी बार साल 2012 में लंबे अंतराल के बाद जीत दर्ज की थी। वहीं, बात अगर अन्य दलों की करें तो जनसंघ ने इस सीट पर 1957, 1962 और भाजपा 2017 में हुए विधानसभा चुनाव जीत दर्ज की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी 1996 के बाद आखिरी बार साल 2007 में जीती थी। जबकि बसपा और जद एक-एक बार इस सीट पर जीत सकी है। इस बार 1880 के चले आ रहे रिकार्ड को तोड़ने के लिए भाजपा बेताब है। इसी सीट से साल 2017 में विधायक बने गिरीशचंद्र यादव को भाजपा ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया। वहीं, लगातार दूसरी बार कमल खिलाने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज नेता अधिसूचना लागू होने के पहले सभाएं कर चुके हैं। वहीं, भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दो रुके थे। जनरथ लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में गए हैं। जबकि बसपा के सतीशचंद्र मिश्र, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कार्यक्रम कर चुके हैं।
आजादी के बाद से लेकर अब तक हुए चुनाव के विजेता
1952-हर गोविंद सिंह-(कांग्रेस)
1957-यादवेद्र दत दुबे (जनसंघ)
1962-यादवेंद्र दत दुबे (जनसंघ)
1967-कमलापति त्रिपाठी (कांग्रेस)
1969-जंग बहादुर यादव (जनसंघ)
1974-ओम प्रकाश श्रीवास्तव (कांग्रेस)
1977-कमला प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1980-कमला प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1985-चंद्रसेन सिंह (दगकिपा)
1989-अर्जुन यादव (निर्दल)
1991-लालचंद्र मौर्य (जद)
1993-अरशद खान (बसपा)
1996-अफजाल अहमद (सपा)
2002-सुरेंद्र प्रताप सिंह (भाजपा)
2007-जावेद अंसारी (सपा)
2012-नदीम जावेद (कांग्रेस)
2017-गिरीश चंद्र यादव (भाजपा)
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साल 1952 में हुए पहले चुनाव में सदर सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस सबसे अधिक 6 बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। आंकड़ों के मुताबिक साल 1952, 1967, 1974, 1977, 1980 में कांग्रेस जीती थी। इसके बाद आखिरी बार साल 2012 में लंबे अंतराल के बाद जीत दर्ज की थी। वहीं, बात अगर अन्य दलों की करें तो जनसंघ ने इस सीट पर 1957, 1962 और भाजपा 2017 में हुए विधानसभा चुनाव जीत दर्ज की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी 1996 के बाद आखिरी बार साल 2007 में जीती थी। जबकि बसपा और जद एक-एक बार इस सीट पर जीत सकी है। इस बार 1880 के चले आ रहे रिकार्ड को तोड़ने के लिए भाजपा बेताब है। इसी सीट से साल 2017 में विधायक बने गिरीशचंद्र यादव को भाजपा ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया। वहीं, लगातार दूसरी बार कमल खिलाने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज नेता अधिसूचना लागू होने के पहले सभाएं कर चुके हैं। वहीं, भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दो रुके थे। जनरथ लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में गए हैं। जबकि बसपा के सतीशचंद्र मिश्र, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कार्यक्रम कर चुके हैं।
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आजादी के बाद से लेकर अब तक हुए चुनाव के विजेता
1952-हर गोविंद सिंह-(कांग्रेस)
1957-यादवेद्र दत दुबे (जनसंघ)
1962-यादवेंद्र दत दुबे (जनसंघ)
1967-कमलापति त्रिपाठी (कांग्रेस)
1969-जंग बहादुर यादव (जनसंघ)
1974-ओम प्रकाश श्रीवास्तव (कांग्रेस)
1977-कमला प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1980-कमला प्रसाद सिंह (कांग्रेस)
1985-चंद्रसेन सिंह (दगकिपा)
1989-अर्जुन यादव (निर्दल)
1991-लालचंद्र मौर्य (जद)
1993-अरशद खान (बसपा)
1996-अफजाल अहमद (सपा)
2002-सुरेंद्र प्रताप सिंह (भाजपा)
2007-जावेद अंसारी (सपा)
2012-नदीम जावेद (कांग्रेस)
2017-गिरीश चंद्र यादव (भाजपा)