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16 लाख का चेक जमा करने भेजा था करीबी को, फिर गया तहसील
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वाराणसी। सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर नितेश सिंह उर्फ बबलू ने हत्या से थोड़ी देर पहले अपने एक करीबी को 11 लाख और पांच लाख के दो चेक देकर बैंक में जमा करने को कहा था। इस बीच नितेश ने अपने उस करीबी को आगाह भी किया था कि चेक जमा करने में लापरवाही मत करना। इसके बाद बबलू दीवानी कचहरी गया और फिर वहां से सदर तहसील के लिए निकला।
तफ्तीश में लगी पुलिस टीमों के अनुसार लोहिया नगर स्थित घर से बाहर निकलते ही बबलू की मुखबिरी शुरू हो गई थी। पुलिस ने आशंका जताई है कि पल्सर बाइक सवार दो बदमाश बबलू के वाहन के पीछे चल रहे थे और दो बदमाश पहले से सदर तहसील के पिछले वाले गेट के समीप मौजूद थे। बबलू सदर तहसील के पिछले गेट से प्रवेश कर फार्च्यूनर खड़ी किया तो बदमाशों को फायरिंग का सही मौका नहीं मिल पाया।
अदालत का कामकाज निबटा कर वह वापस लौट कर आया और वाहन में बैठने लगा तो बदमाशों ने उपयुक्त समय देख ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग शुरू होते ही तहसील के पिछले गेट के इर्दगिर्द मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। चर्चा यह भी रही कि तहसील की खिड़कियों से वारदात को देख रहे कर्मचारियों की ओर लक्ष्य कर भी बदमाशों ने फायरिंग की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
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न काम आई पिस्टल और न बुलेट प्रूफ वाहन
कहा जाता है कि मौत आती है तो किसी तरह का उपाय काम नहीं आता है। बबलू के पास दो लाइसेंसी असलहे थे और पिस्टल वह हमेशा साथ लेकर चलता था। इसके अलावा उसकी फार्च्यूनर कार बुलेट प्रूफ थी। इसके बाद भी बबलू को खुद की जान बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। वहीं, फार्च्यूनर का लखनऊ का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसका पता पुलिस के शक के घेरे में है। पुलिस फार्च्यूनर के नंबर और उसके पते की जांच करा रही है।
दो बार पूछने गए तहसील में, नमस्ते कह कर मारी गोली
शार्प शूटर सोमवार को पूरी तैयारी कर बबलू की हत्या करने आए थे। पुलिस के अनुसार दोनों शूटर प्रोफेशनल हैं और बाहर से बुलाए गए थे। उन्हें बताया गया था कि बबलू के जमीन संबंधी मुकदमे की पेशी सदर तहसील के नायब तहसीलदार की अदालत में है। बबलू के पेशी पर पहुंचने से पहले दो बार उसके संबंध में अनजान लोगों ने पूछताछ की। बबलू आया और अदालत के काम से खाली होकर वापस जब अपनी फार्च्यूनर में बैठने लगा तो उसे नमस्ते कह कर दोनों बदमाशों ने फायरिंग शुरू की। पुलिस के अनुसार बाइक चला रहा बदमाश हेलमेट पहना हुआ था और उसके पीछे बैठा हृष्टपुष्ट कद-काठी का बदमाश आसमानी रंग की शर्ट पहने हुआ था। दोनों ने बबलू को गोली मारने के बाद उसकी मौत की तस्दीक की और फिर उसे गोली मारी। बदमाशों के असलहे से निकली गोली बबलू की फार्च्यूनर के खिड़की के शीशे में भी धंसी हुई थी।
आशापुर की जमीन सहित चार बिंदुओं पर की जा रही जांच
सारनाथ थाना अंतर्गत आशापुर चौराहा स्थित लाखों की कीमती जमीन को लेकर मौजूद समय में बबलू की मुकदमेबाजी और विवाद चल रहा था। इंस्पेक्टर शिवपुर ने बताया कि आशापुर स्थित जमीन से जुड़े विवाद को वारदात की एक अहम वजह मान कर तफ्तीश की जा रही है। डॉ. डीपी सिंह की हत्या का आरोपी होने के बाद भी उनके घर आने-जाने की बात को ध्यान में रख कर भी प्रकरण की जांच की जा रही है। वरुणा पार क्षेत्र के जिन डॉक्टरों और बिल्डरों से बबलू पर रंगदारी मांगने का आरोप है, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा गाजीपुर जिले के एक पूर्व ब्लाक प्रमुख की हत्या से भी घटना के तार जोड़ कर पुलिस जांच कर रही है।
शुरुआती जांच में सीसी कैमरों से नहीं मिली मदद
शिवपुर तहसील के सामने के हिस्से में सीसी कैमरा लगा हुआ है, लेकिन पीछे के हिस्से में ऐसी व्यवस्था नहीं है। शुरुआती जांच में पुलिस ने सदर तहसील के पीछे के गेट से निकलने वाले दाएं और बाएं रास्ते पर लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।
सहेली बबलू के नाम से चर्चित था हिस्ट्रीशीटर
बबलू सिंह की बसें गाजीपुर और सोनभद्र मार्ग पर चलती हैं। बस के अगल-बगल सहेली और पीछे रोजा लिखा है। इसके चलते बबलू अपने करीबियों में सहेली बबलू के नाम से चर्चित था और उसकी पैठ पूर्वांचल के कमोबेश सभी गिरोहों में थी। इसी वजह से बबलू बदमाशों को भी कुछ नहीं समझता था। परिजनों ने बताया कि तीन भाइयों में सबसे बड़े बबलू की शादी तकरीबन 25 वर्ष पहले अनीता सिंह से हुई थी। बड़ा बेटा ऋषभ हाईकोर्ट में अधिवक्ता है और छोटा बेटा प्रांजल देहरादून में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ चुकी अनीता को पति की हत्या की जानकारी परिजनों ने घंटों नहीं दी। पुलिस और परिजनों का घर पर जमावड़ा शुरू हुआ तो अनीता को शंका हुई और पति की हत्या की बात पता लगते ही वह अचेत हो गईं।
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे मंत्री सहित कई दलों के नेता
बबलू की हत्या की जानकारी मिलने पर प्रदेश के मंत्री रवींद्र जायसवाल बीएचयू स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके साथ ही पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, कई पार्षद और अन्य दलों के नेता भी पहुंचे। सभी ने बबलू को बेहद मिलनसार बताते हुए घटना पर अफसोस जताया और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया।
वारदात दर वारदात से पुलिसिंग पर गंभीर सवाल
22 जुलाई को पहड़िया क्षेत्र में पाइप कारोबारी की हत्या, 28 जुलाई को मढ़वा गांव से सथवा के पूर्व प्रधान का अपहरण, तीन सितंबर को मढ़वा में दिव्यांग चाय-पान दुकानदार की हत्या, आठ सितंबर को सारनाथ में वृद्धा की हत्या, 21 सितंबर को सरायगोवयर्धन में तीर्थ पुरोहित दंपती की हत्या और सोमवार को बबलू की हत्या से जिले की पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इन सभी वारदातों के अहम आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके हैं। ताबड़तोड़ वारदातों से आम आदमी के बीच दहशत का माहौल व्याप्त है और कानून व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर रवाना की गई तीन टीमें
बबलू की हत्या के बाद वारदात की तफ्तीश में लगी तीन पुलिस टीमों को चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर रवाना किया गया। पुलिस की एक टीम ने जिला जेल जाकर चर्चित बदमाशों से बबलू की हत्या के संबंध में पूछताछ की। इसके साथ ही हाल में जेल से जमानत पर छूटे शूटरों की पुलिस ने जानकारी जुटाई।
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तफ्तीश में लगी पुलिस टीमों के अनुसार लोहिया नगर स्थित घर से बाहर निकलते ही बबलू की मुखबिरी शुरू हो गई थी। पुलिस ने आशंका जताई है कि पल्सर बाइक सवार दो बदमाश बबलू के वाहन के पीछे चल रहे थे और दो बदमाश पहले से सदर तहसील के पिछले वाले गेट के समीप मौजूद थे। बबलू सदर तहसील के पिछले गेट से प्रवेश कर फार्च्यूनर खड़ी किया तो बदमाशों को फायरिंग का सही मौका नहीं मिल पाया।
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अदालत का कामकाज निबटा कर वह वापस लौट कर आया और वाहन में बैठने लगा तो बदमाशों ने उपयुक्त समय देख ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग शुरू होते ही तहसील के पिछले गेट के इर्दगिर्द मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। चर्चा यह भी रही कि तहसील की खिड़कियों से वारदात को देख रहे कर्मचारियों की ओर लक्ष्य कर भी बदमाशों ने फायरिंग की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
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कहा जाता है कि मौत आती है तो किसी तरह का उपाय काम नहीं आता है। बबलू के पास दो लाइसेंसी असलहे थे और पिस्टल वह हमेशा साथ लेकर चलता था। इसके अलावा उसकी फार्च्यूनर कार बुलेट प्रूफ थी। इसके बाद भी बबलू को खुद की जान बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। वहीं, फार्च्यूनर का लखनऊ का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसका पता पुलिस के शक के घेरे में है। पुलिस फार्च्यूनर के नंबर और उसके पते की जांच करा रही है।
दो बार पूछने गए तहसील में, नमस्ते कह कर मारी गोली
शार्प शूटर सोमवार को पूरी तैयारी कर बबलू की हत्या करने आए थे। पुलिस के अनुसार दोनों शूटर प्रोफेशनल हैं और बाहर से बुलाए गए थे। उन्हें बताया गया था कि बबलू के जमीन संबंधी मुकदमे की पेशी सदर तहसील के नायब तहसीलदार की अदालत में है। बबलू के पेशी पर पहुंचने से पहले दो बार उसके संबंध में अनजान लोगों ने पूछताछ की। बबलू आया और अदालत के काम से खाली होकर वापस जब अपनी फार्च्यूनर में बैठने लगा तो उसे नमस्ते कह कर दोनों बदमाशों ने फायरिंग शुरू की। पुलिस के अनुसार बाइक चला रहा बदमाश हेलमेट पहना हुआ था और उसके पीछे बैठा हृष्टपुष्ट कद-काठी का बदमाश आसमानी रंग की शर्ट पहने हुआ था। दोनों ने बबलू को गोली मारने के बाद उसकी मौत की तस्दीक की और फिर उसे गोली मारी। बदमाशों के असलहे से निकली गोली बबलू की फार्च्यूनर के खिड़की के शीशे में भी धंसी हुई थी।
आशापुर की जमीन सहित चार बिंदुओं पर की जा रही जांच
सारनाथ थाना अंतर्गत आशापुर चौराहा स्थित लाखों की कीमती जमीन को लेकर मौजूद समय में बबलू की मुकदमेबाजी और विवाद चल रहा था। इंस्पेक्टर शिवपुर ने बताया कि आशापुर स्थित जमीन से जुड़े विवाद को वारदात की एक अहम वजह मान कर तफ्तीश की जा रही है। डॉ. डीपी सिंह की हत्या का आरोपी होने के बाद भी उनके घर आने-जाने की बात को ध्यान में रख कर भी प्रकरण की जांच की जा रही है। वरुणा पार क्षेत्र के जिन डॉक्टरों और बिल्डरों से बबलू पर रंगदारी मांगने का आरोप है, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा गाजीपुर जिले के एक पूर्व ब्लाक प्रमुख की हत्या से भी घटना के तार जोड़ कर पुलिस जांच कर रही है।
शुरुआती जांच में सीसी कैमरों से नहीं मिली मदद
शिवपुर तहसील के सामने के हिस्से में सीसी कैमरा लगा हुआ है, लेकिन पीछे के हिस्से में ऐसी व्यवस्था नहीं है। शुरुआती जांच में पुलिस ने सदर तहसील के पीछे के गेट से निकलने वाले दाएं और बाएं रास्ते पर लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।
सहेली बबलू के नाम से चर्चित था हिस्ट्रीशीटर
बबलू सिंह की बसें गाजीपुर और सोनभद्र मार्ग पर चलती हैं। बस के अगल-बगल सहेली और पीछे रोजा लिखा है। इसके चलते बबलू अपने करीबियों में सहेली बबलू के नाम से चर्चित था और उसकी पैठ पूर्वांचल के कमोबेश सभी गिरोहों में थी। इसी वजह से बबलू बदमाशों को भी कुछ नहीं समझता था। परिजनों ने बताया कि तीन भाइयों में सबसे बड़े बबलू की शादी तकरीबन 25 वर्ष पहले अनीता सिंह से हुई थी। बड़ा बेटा ऋषभ हाईकोर्ट में अधिवक्ता है और छोटा बेटा प्रांजल देहरादून में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ चुकी अनीता को पति की हत्या की जानकारी परिजनों ने घंटों नहीं दी। पुलिस और परिजनों का घर पर जमावड़ा शुरू हुआ तो अनीता को शंका हुई और पति की हत्या की बात पता लगते ही वह अचेत हो गईं।
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे मंत्री सहित कई दलों के नेता
बबलू की हत्या की जानकारी मिलने पर प्रदेश के मंत्री रवींद्र जायसवाल बीएचयू स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके साथ ही पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, कई पार्षद और अन्य दलों के नेता भी पहुंचे। सभी ने बबलू को बेहद मिलनसार बताते हुए घटना पर अफसोस जताया और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया।
वारदात दर वारदात से पुलिसिंग पर गंभीर सवाल
22 जुलाई को पहड़िया क्षेत्र में पाइप कारोबारी की हत्या, 28 जुलाई को मढ़वा गांव से सथवा के पूर्व प्रधान का अपहरण, तीन सितंबर को मढ़वा में दिव्यांग चाय-पान दुकानदार की हत्या, आठ सितंबर को सारनाथ में वृद्धा की हत्या, 21 सितंबर को सरायगोवयर्धन में तीर्थ पुरोहित दंपती की हत्या और सोमवार को बबलू की हत्या से जिले की पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इन सभी वारदातों के अहम आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके हैं। ताबड़तोड़ वारदातों से आम आदमी के बीच दहशत का माहौल व्याप्त है और कानून व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर रवाना की गई तीन टीमें
बबलू की हत्या के बाद वारदात की तफ्तीश में लगी तीन पुलिस टीमों को चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर रवाना किया गया। पुलिस की एक टीम ने जिला जेल जाकर चर्चित बदमाशों से बबलू की हत्या के संबंध में पूछताछ की। इसके साथ ही हाल में जेल से जमानत पर छूटे शूटरों की पुलिस ने जानकारी जुटाई।