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निर्जला एकादशी आज: सात साल बाद बन रहा पंचयोग, श्रद्धालु रखेंगे व्रत
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ज्येष्ठ मास शुक्लपक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार मंगलवार को रखा जाएगा। इस बार एकादशी पर सात साल बाद पंचयोग बन रहा है। साथ ही स्वाति नक्षत्र भी रहेगा। इसलिए व्रत काफी फलदायी है। हालांकि, कुछ लोगों ने सोमवार को भी व्रत रखकर गंगा में स्नान किया और भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन किया।
प्रख्यात ज्योतिष और वैदिक विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के अनुसार सोमवार को एकादशी तिथि लग रही है। मगर 60 घटिका की एकादशी प्राप्त होने से मंगलवार को सूर्योदय के समय से एकादशी मनाई जाएगी।
हिंदू पंचांगों के अनुसार 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी यानी भीमसेनी सबसे श्रेष्ठ होती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सालभर की एकादशी का फल मिलता है। ज्योतिष आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार स्वाति नक्षत्र में जययोग, त्रिपुष्कर, रवि, शिव और ध्वज योग बन रहा है। एकादशी तिथि सोमवार को सुबह 5:11 बजे से मंगलवार को सुबह 6:26 बजे तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। लोग व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करेंगे। इस दिन गो, वस्त्र, छत्र, घड़ा आदि दान करना फलदायी होता है।
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प्रख्यात ज्योतिष और वैदिक विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के अनुसार सोमवार को एकादशी तिथि लग रही है। मगर 60 घटिका की एकादशी प्राप्त होने से मंगलवार को सूर्योदय के समय से एकादशी मनाई जाएगी।
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हिंदू पंचांगों के अनुसार 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी यानी भीमसेनी सबसे श्रेष्ठ होती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सालभर की एकादशी का फल मिलता है। ज्योतिष आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार स्वाति नक्षत्र में जययोग, त्रिपुष्कर, रवि, शिव और ध्वज योग बन रहा है। एकादशी तिथि सोमवार को सुबह 5:11 बजे से मंगलवार को सुबह 6:26 बजे तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। लोग व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करेंगे। इस दिन गो, वस्त्र, छत्र, घड़ा आदि दान करना फलदायी होता है।
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