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यूपी: रूस की नीना ने पिता और रूस-यूक्रेन युद्ध में मृतात्माओं की शांति के लिए कराया बलि-त्रिपिंडी श्राद्ध

Thu, 10 Sep 2026 06:48 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 10 Sep 2026 06:48 PM IST
सार

रूस की निवासिनी नीना ने अपने पिता एण्ड्रे और रूस-यूक्रेन युद्ध में मृतात्माओं की शांति एवं मोक्ष की कामना से काशी के पिशाचमोचन तीर्थ में नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया। पं. आशापति शास्त्री के निर्देशन में हुए अनुष्ठान में नीना और उनकी मित्र ईन्गा रूस से ऑनलाइन जुड़ी रहीं। अमावस्या पर सुबह 11 से शाम पांच बजे तक कर्मकांड हुआ।

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Nina from Russia performs Bali-Tripindi Shraddha peace father soul souls those who died Russia-Ukraine war
रूस की निवासिनी नीना ने अपने पिता एण्ड्रे का काशी में कराया श्राद्ध। - फोटो : संवाद

विस्तार

रूस की निवासिनी नीना ने अपने पिता एण्ड्रे और रूस-यूक्रेन युद्ध में मृत आत्माओं की शांति एवं मोक्ष की कामना से काशी में नारायण बलि और त्रिपिंडी श्राद्ध कराया। रूस में रहकर नीना अपनी मित्र ईन्गा के साथ ऑनलाइन माध्यम से पूरे अनुष्ठान में जुड़ी रहीं। अमावस्या के अवसर पर पिशाचमोचन तीर्थ क्षेत्र में सुबह 11 बजे शुरू हुआ अनुष्ठान शाम पांच बजे तक चला।

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वाग्योग चेतनापीठम् के अध्यक्ष एवं पद्मश्री वागीश शास्त्री के पुत्र पं. आशापति शास्त्री के निर्देशन में यह धार्मिक अनुष्ठान दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में नारायण बलि का कर्म कराया गया। पं. संजय कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व में आचार्य संदीप मिश्र, आचार्य विकास पांडेय, नीलकांत दुबे और आयुष द्विवेदी ने अनुष्ठान संपन्न कराया। दूसरे चरण में त्रिपिंडी श्राद्ध का विधान हुआ, जिसे पं. संजय कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व में आचार्य संदीप मिश्र, आचार्य विकास पांडेय और नीलकांत दुबे ने पूरा कराया।

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नीना के प्रतिनिधि के रूप में नीलकांत दुबे ने समस्त धार्मिक विधान का निर्वहन किया। पं. आशापति शास्त्री ने बताया कि नीना ने पिछले महीने अपनी रूसी शिष्या ईन्गा के माध्यम से संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि नीना सनातन परंपरा के अनुरूप अपने पिता और युद्ध में मारे गए लोगों की आत्माओं की शांति एवं मुक्ति के लिए अनुष्ठान कराना चाहती थीं। इसी उद्देश्य से अमावस्या के दिन काशी के पिशाचमोचन तीर्थ में यह कर्मकांड कराया गया।

पं. आशापति शास्त्री के अनुसार वाग्योग चेतनापीठम् की स्थापना महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ ने 46 वर्ष पूर्व की थी। संस्था के माध्यम से विश्व के 80 से अधिक देशों में 50 हजार से अधिक अनुयायियों के बीच सनातन परंपरा और संस्कृति का प्रसार किया जा रहा है।

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