बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण ना करना बीएचयू अस्पताल को पड़ा भारी, चुकाने होंगे 5 करोड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बायो मेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण ना करने के मामले में सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू और ट्रॉमा सेंटर पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है। यह संस्तुति (समन) एनजीटी के आदेश पर बनी यूपी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉनीटरिंग कमेटी ने की है। जस्टिस डीपी सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पूर्व में किए गए निरीक्षण और इस दौरान मिली गड़बड़ियों के बाद भी व्यवस्था ना सुधरने पर यह कार्रवाई की है। अध्यक्ष की ओर से जुर्माने की संस्तुति एनजीटी को भेजी गई है।
कमेटी के सचिव राजेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 का पालन ना करने के मामले में पांच करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। अस्पताल के पैथोलॉजी की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है।
जगह-जगह बायोमेडिकल वेस्ट फेंके मिले, जिससे संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह की ओर से पांच करोड़ या उससे अधिक पर्यावरणीय क्षति के रूप में जुर्माना लगाए जाने की संस्तुति एनजीटी को भेजी गई है।
सरकारी और निजी अस्पतालों से हर दिन भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट निकलता है। इसमें पट्टी, बोतलें, सीरिंज के साथ ही कहीं-कहीं ऑपरेशन के बाद अंग भी काटकर यहीं फेंके जाते हैं। इसी साल जनवरी में अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट निस्तारण की हकीकत जानने आई कमेटी के सामने इसकी पोल खुली थी।
जस्टिस डीपी सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा का दौरा किया था।
इस दौरान टीम को बड़े पैमाने पर खामियां मिलीं थी। व्यवस्था में सुधार का निर्देश संबंधित अस्पताल के अधिकारियों को दिया गया था। इसमें मंडलीय अस्पताल में तो ईटीपी बनने लगा, लेकिन बीएचयू अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर में निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
बीएचयू के कुलपति प्रो.राकेश भटनागर ने बताया कि कमेटी की ओर से जुर्माना लगाए जाने की जानकारी नहीं है। इस पर संबंधित लोगों से बातचीत कर व्यवस्था को दुरूस्त कराया जाएगा। अस्पताल समेत बीएचयू परिसर से निकलने वाले कचरों के इस्तेमाल से बिजली बन सके, इसके लिए विश्वविद्यालय में यंत्र लगाया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।