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Karwa Chauth: इस साल करवा चौथ का व्रत नहीं रख पाएंगी नव विवाहिताएं, इस वजह से नहीं होगी नए व्रत की शुरुआत
Thu, 13 Oct 2022 10:23 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 13 Oct 2022 10:23 AM IST
सार
जिन नवविवाहित स्त्रियों का पहला करवाचौथ है, वह इस बार व्रत नहीं रख सकेंगी। सौभाग्यवती स्त्रियां पहले से व्रत कर रही हैं, उन्हें कोई दोष नहीं लगेगा लगेगा, नवविवाहिता जिनकी शादी अभी हुई है वह इस व्रत का प्रारंभ अगले वर्ष से करेंगी।
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करवा चौथ 2022
- फोटो : istock
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विस्तार
अखंड सौभाग्य एवं स्त्रियों के दांपत्य जीवन में पतिसौख्य का प्रतीक संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत एवं करक चतुर्थी करवा चौथ का व्रत 13 अक्तूबर को मनाया जाएगा। जिन नवविवाहित स्त्रियों का पहला करवाचौथ है, वह इस बार व्रत नहीं रख सकेंगी। शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों के साथ ही नए व्रत की शुरुआत नहीं की जा सकती है।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि दो अक्तूबर से 20 नवंबर तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा। शुक्र के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों के साथ ही नए व्रत की शुरूआत नहीं हो सकती है। सौभाग्यवती स्त्रियां पहले से व्रत कर रही हैं, उन्हें कोई दोष नहीं लगेगा लगेगा, नवविवाहिता जिनकी शादी अभी हुई है वह इस व्रत का प्रारंभ अगले वर्ष से करेंगी।
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि दो अक्तूबर से 20 नवंबर तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा। शुक्र के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों के साथ ही नए व्रत की शुरूआत नहीं हो सकती है। सौभाग्यवती स्त्रियां पहले से व्रत कर रही हैं, उन्हें कोई दोष नहीं लगेगा लगेगा, नवविवाहिता जिनकी शादी अभी हुई है वह इस व्रत का प्रारंभ अगले वर्ष से करेंगी।
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करवा चौथ मेहंदी डिजाइन
- फोटो : instagram
सौभाग्य का मंगल पर्व संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी एवं करक चतुर्थी करवा चौथ धर्म शास्त्रों के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक होगा। इस बार करवा चौथ पर कृतिका नक्षत्र एवं सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग होने से यह व्रत अपने में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है। विवाहित स्त्रियाें को मुख्य रूप से शिव पार्वती के साथ श्री गणेश एवं भगवान कार्तिकेय के पूजन, कथा श्रवण एवं चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। चंद्रमा को अर्घ्य देने का मूल कारण यह है की इनके वैवाहिक जीवन में चंद्र के समान शीतलता बनी रहे। चंद्रोदय रात्रि 7:54 पर होगा। चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि में ही चंद्र को अर्घ्य देने की परंपरा है।
व्रत का विधान
करक चतुर्थी करवा चौथ के दिन सौभाग्यवती स्त्रियों को प्रात: काल में स्नानादि करके तिथि वार नक्षत्र का मन में स्मरण करते हुए हाथ में जल लेकर संकल्प करना चाहिए। सुख, सौभाग्य, पुत्र, पौत्र आदि के अखंड सौभाग्य स्थिर लक्ष्मी की कामना करनी चाहिए। सायं काल में मिट्टी के करवे को रखकर भगवान शिव, पार्वती, श्रीगणेश, कार्तिकेय का पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात कथा श्रवण एवं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सपरिवार मंगल की कामना करना चाहिए। - पं. दीपक मालवीय ज्योतिषाचार्य एवं सदस्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद वाराणसी
व्रत का विधान
करक चतुर्थी करवा चौथ के दिन सौभाग्यवती स्त्रियों को प्रात: काल में स्नानादि करके तिथि वार नक्षत्र का मन में स्मरण करते हुए हाथ में जल लेकर संकल्प करना चाहिए। सुख, सौभाग्य, पुत्र, पौत्र आदि के अखंड सौभाग्य स्थिर लक्ष्मी की कामना करनी चाहिए। सायं काल में मिट्टी के करवे को रखकर भगवान शिव, पार्वती, श्रीगणेश, कार्तिकेय का पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात कथा श्रवण एवं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सपरिवार मंगल की कामना करना चाहिए। - पं. दीपक मालवीय ज्योतिषाचार्य एवं सदस्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद वाराणसी