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ना समय से इलाज...ना ही डॉक्टर: 29 बेड में से इस्तेमाल होते हैं 12 बेड, गर्भवती महिलाओं ने सुनाई व्यथा

Thu, 22 Jun 2023 12:56 PM IST
किरन रौतेला रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 22 Jun 2023 12:56 PM IST
सार

डॉक्टर सहित ज्यादातर स्टाफ 1.20 घंटे की देरी से आया। कक्ष में पहुंचते ही नाश्ता किया, फिर 15 मिनट बाद लाइन में खड़ी गर्भवती व अन्य महिलाओं को देखना शुरू किया। कमोबेश यही स्थिति रोज रहती है। इस पर गर्भवती महिलाएं झल्लाती हैं। वे कहती हैं कि अस्पताल की व्यवस्था ही बीमार है। इसे सही इलाज की जरूरत है। यहां आने के बाद राहत कम, दर्द ज्यादा मिलता है।

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Neither timely treatment nor doctors 12 out of 29 beds are used, pregnant women narrate their agony
एमसीएच विंग के वार्ड में फेंका गया बोर्ड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल परिसर में संचालित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग कागजों में 50 बेड का है, लेकिन हकीकत कुछ और सामने आई। पड़ताल से पता चला कि अस्पताल में 29 बेड ही रखे गए हैं। इनमें से ग्राउंड फ्लोर व प्रथम तल के 12 बेडों का इस्तेमाल ही किया जा रहा है। इसका मतलब है कि 21 बेड गायब हैं। बुधवार को इस अस्पताल में आठ मरीज ही भर्ती पाए गए। डॉक्टरों की उपस्थिति और महिलाओं के इलाज की व्यवस्था ध्वस्त मिली है।

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डॉक्टर सहित ज्यादातर स्टाफ 1.20 घंटे की देरी से आया। कक्ष में पहुंचते ही नाश्ता किया, फिर 15 मिनट बाद लाइन में खड़ी गर्भवती व अन्य महिलाओं को देखना शुरू किया। कमोबेश यही स्थिति रोज रहती है। इस पर गर्भवती महिलाएं झल्लाती हैं। वे कहती हैं कि अस्पताल की व्यवस्था ही बीमार है। इसे सही इलाज की जरूरत है। यहां आने के बाद राहत कम, दर्द ज्यादा मिलता है। दरअसल, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मामला लगातार उठा रही थीं। इसीलिए बुधवार की सुबह सात से दस बजे के बीच अमर उजाला संवाददाता ने व्यवस्था की पड़ताल की। इससे पता चला कि अस्पताल में गर्भवती आठ महिलाएं ही भर्ती हैं। ओपीडी की व्यवस्था बेपटरी है। इमरजेंसी सेवा अभी तक नहीं शुरू की जा सकी। यह स्थिति तब है, जब शासन ने सात डॉक्टरों को तैनाती दे दी है।

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Neither timely treatment nor doctors 12 out of 29 beds are used, pregnant women narrate their agony
ओपीडी के सामने डॉक्टर के आने का इंतजार करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

सुबह आठ बजे की ओपीडी, डॉक्टर 9.20 बजे पहुंचीं

अस्पताल के संचालन के लिए गत सात जून को ही शासन ने सात महिला डॉक्टरों को तैनात किया है। इसके बावजूद ओपीडी की व्यवस्था बेपटरी है। ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक है, लेकिन डॉ. ज्योतिठाकुर, डॉ. प्रीति यादव, डॉ. आरती दिव्या और डॉ. अर्चना सिंह बुधवार की सुबह 9.20 बजे अस्पताल पहुंचीं। महिलाएं कक्ष के बाहर पहले से खड़ी थीं, लेकिन इसकी चिंता नहीं की गई। कहा गया कि नाश्ता करके देखेंगे। सुबह करीब 9.35 बजे से डॉक्टरों ने महिलाओं को देखना शुरू किया।

सात डॉक्टर व 11 पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती

चिकित्सा अनुभाग के संयुक्त सचिव अजीज अहमद ने गत सात जून को ही डॉ. ज्योति ठाकुर, पैथालॉजिस्ट डॉ. दीपिका चतुर्वेदी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार सिंह, ईएमओ डॉ. मनमोहन शंकर, डॉ. मृत्युंजय सिंह, एनेस्थेस्टि डा. सुरेंद्र कुमार शाही, डॉ. प्रीति की तैनाती की थी। 11 पैरामेडिकल स्टाफ भी तैनात किए गए। इसके बावजूद मौके पर दो स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट ही नजर आए। पैथालॉजिस्ट और अन्य स्टाफ नर्स मौके पर नहीं दिखे।

एमसीएच विंग का बोर्ड भी गायब

एमसीएच विंग का भवन तो चार मंजिला है, लेकिन बोर्ड गायब है। आसपास के लोगों से पूछने के बाद ही पता चलता है कि यही भवन है। अंदर जाएंगे तो स्टाफ मिलेगा।

 

Neither timely treatment nor doctors 12 out of 29 beds are used, pregnant women narrate their agony
वार्ड में फेंके पड़े कई जरूरी उपकरण,समान - फोटो : अमर उजाला

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य महकमा

- जब 50 बेड का एमसीएच विंग है तो 29 बेड ही क्यों लगे? जबकि हर साल प्रति बेड के हिसाब से शासन बजट देता है।

- जब 12 बेडों पर ही मरीज भर्ती किए जाने थे तो 50 बेड के लिहाज से सामान, फर्नीचर, मशीनें, बेड सहित अन्य संसाधन क्यों मंगाए गए?

- एमसीएच विंग में इमरजेंसी सेवा का संचालन क्यों नहीं?, जबकि एक साथ सात डॉक्टरों व 11 पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है।

- कई वार्डों का ताला तक नहीं खुला। जाहिर है, यहां किसी अधिकारी ने अब तक दौरा नहीं किया।

- एमसीएच विंग में जांच की सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रहीं?

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए खुला विंग

शहर की गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को एक ही छत के नीचे ओपीडी, जांच, भर्ती सहित अन्य सुविधाएं मिले, इसलिए जिला अस्पताल परिसर में ही 50 बेड का एमसीएच विंग खोला गया। वरुणापार के सारनाथ, आशापुर, पहड़िया, घौसाबाद, सिंधौरा, हुकुलगंज, भोजुबीर, चौबेपुर आदि इलाकों से गर्भवती महिलाएं इलाज कराने आती हैं।

पांच वार्डों में बेड नहीं, 14 बेकार पड़े

एमसीएच विंग के तृतीय तल पर छह-छह बेड के आठ वार्ड बनाए गए हैं। पंखा व एसी लगे हैं। दरवाजों पर वार्ड की सूचना भी चस्पा है, लेकिन पांच वार्ड में एक भी वेड नहीं है। वार्ड धूल से पटे पड़े हैं। तीन वार्ड में 14 बेड पड़े हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है। महंगे उपकरण खरीदकर डंप कर दिए गए हैं। इनका इस्तेमाल तक नहीं हो पा रहा है। चार मंजिला भवन है। पहले से चौथे तल तक धूल ही धूल दिखी है। सफाई व्यवस्था बेहद खराब है।

नहीं चलती इमरजेंसी, एक स्टाफ नर्स व स्वीपर चलाती व्यवस्था

बुधवार की सुबह एमसीएच विंग में इमरजेंसी नहीं चलती मिली। सुबह 7 बजे पहुंचने पर पता चला कि इमरजेंसी कक्ष नहीं है। इमरजेंसी के लिए कोई डॉक्टर भी नहीं है। बस एक स्वीपर मिली। पूछने पर स्वीपर ने बताया कि कोई डॉक्टर नहीं है। एक स्टाफ नर्स हैं। वही देखेंगी। स्वीपर ही मरीजों को चादर व अन्य सामान दे रही थी।

एमसीएच विंग के देखभाल की जिम्मेदारी दीनदयाल अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के पास है। इमरजेंसी सेवा न चलने, ओपीडी में डॉक्टरों के देरी से पहुंचने का मामला गंभीर है। लापरवाही पर डॉक्टरों, कर्मचारियों के साथ ही प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक से जवाब मांगा जाएगा। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

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केस-1

सिंधौरा से आई महिला को स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना था। वह बुधवार की सुबह 8.30 बजे अस्पताल आ गई। ओपीडी के बाहर बैठी रही। डॉ. ज्योति ठाकुर 9.20 बजे आईं। महिला के मुताबिक, गर्मी ज्यादा है। जल्दी दिखाने के चक्कर में आए थे, लेकिन डॉक्टर ही देर से आईं। फिर बोला गया नाश्ता करके देखेंगे। व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

केस-2

पांडेयपुर से एक महिला डाॅ. आरती दिव्या को दिखाने आई थी। सुबह 8 बजे से आकर ओपीडी खुलने का इंतजार करती रही। डाॅ. आरती करीब 9.30 बजे अपने कमरे में पहुंची। इसके बाद मरीजों को देखना शुरू किया।

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